Junagadh
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गुजरात के मछुआरों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने मछली पकड़ने वाली नावों के लिए डीजल की कीमत में की गई 22.43 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को वापस लेने का फैसला किया है. इस निर्णय से न केवल हजारों मछुआरों को आर्थिक संकट से बचाया गया है, बल्कि पूरे मछली उद्योग को ठप होने से भी रोक लिया गया है. चलिए डिटेल में आपको बताते हैं कि पूरी खबर क्या है.
दरअसल, गुजरात के मांगरोल में करीब 2500 नावें मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े हैं. मांगरोल माछीमार एसोसिएशन के प्रमुख दामोदर चामुंडिया के अनुसार, यदि डीजल की कीमत में बढ़ोतरी लागू होती, तो प्रत्येक नाव को 75 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता. एक नाव एक बार समुद्र में जाने पर लगभग 3000 लीटर डीजल खर्च करती है.
पहले जहां डीजल 88 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वहीं बढ़ोतरी के बाद यह 111 रुपये तक पहुंच जाता, जिससे मछुआरों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो जाता. इससे न केवल मांगरोल बल्कि पूरे गुजरात की लगभग 20 हजार नावों पर असर पड़ता और मछली उद्योग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका थी.
डीजल कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ मछुआरों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया. इसके बाद राज्य के मत्स्य पालन मंत्री जीतूभाई वाघाणी और मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष मछुआरों की समस्याओं को रखा. मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने मछुआरों की मांग को स्वीकार किया और भारत पेट्रोलियम को बढ़ोतरी तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए.
मछुआरों में खुशी की लहर
मांगरोल के मछुआरों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की है. फिशिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष दामोदर चामुंडिया और मछुआरे किशनभाई भाद्रेचा ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया. उनका कहना है कि सरकार ने समय रहते कदम उठाकर मछुआरों को भारी नुकसान से बचा लिया है.
रिपोर्टर: भार्गव जोशी
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