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शुरू हुई गांव ग्वाला योजना, मंत्री बोले-गाय का दूध पीने वाला होता बुद्धिमान, भैंस का दूध पीने वालों में सुस्ती

गांव ग्वाला योजना के तहत ये ग्वाले प्रतिदिन गांव की गायों को सामूहिक रूप से गोचर भूमि तक चराने ले जाएंगे और शाम को वापस घरों तक पहुंचाएंगे. योजना की रूपरेखा बताते हुए मंत्री ने कहा कि 70 गायों पर एक गांव ग्वाला नियुक्त किया जाएगा.

Gaon Gwala scheme Gaon Gwala scheme
हाइलाइट्स
  • क्या है गांव ग्वाला योजना

  • अब गाय चराने के लिए मिलेगी सैलरी

राजस्थान के कोटा की रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र की चेचट तहसील के खेड़ली गांव में गौ संवर्धन एवं गोचरण परंपरा के पुनः शुभारंभ का भव्य समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने 'गांव ग्वाला' योजना की शुरुआत करते हुए क्षेत्र के 14 गांवों में एक-एक ग्वाला नियुक्त कर प्राचीन गोचारण परंपरा को पुनर्जीवित करने की घोषणा की.

कार्यक्रम की शुरुआत में शाहपुरा (भीलवाड़ा) स्थित रामस्नेही संप्रदाय की पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल जी महाराज के सानिध्य में मंत्री मदन दिलावर ने गौ माता का विधिवत पूजन कर योजना का शुभारंभ किया. इस अवसर पर जगतगुरु ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे गौ संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

गाय का दूध पीने वाला होता बुद्धिमान, भैंस का दूध पीने वालों में सुस्ती
अपने संबोधन में मंत्री मदन दिलावर ने गौ माता के दूध का महत्व बताते हुए कहा कि जो बच्चे गाय का दूध पीते हैं, वे अधिक बुद्धिमान और स्फूर्तिशील बनते हैं, जबकि भैंस का दूध पीने वालों में सुस्ती देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि ऊंचे कंधे वाली देसी गाय का दूध सबसे उत्तम माना जाता है और बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए इसे प्राथमिकता देनी चाहिए.

मंत्री ने अपने तर्क को समझाते हुए कहा कि भैंस के झुंड में छोड़ा गया नवजात बच्चा अपनी मां को पहचानने में समय लेता है, जबकि गाय का बछड़ा सीधे अपनी मां के पास पहुंच जाता है. इसी तरह भैंस का दूध पीकर उसका बच्चा अक्सर बैठकर सुस्ताने लगता है, जबकि गाय का बछड़ा दूध पीने के बाद पूंछ उठाकर उछलता-कूदता है, जो उसकी स्फूर्ति और सक्रियता को दर्शाता है.

पॉलीथिन का उपयोग बंद करें
रामदयाल महाराज ने कहा कि गौमाता का संरक्षण केवल कानून से नहीं, बल्कि जन-संकल्प से संभव है. उन्होंने लोगों से प्रतिदिन गौ सेवा का संकल्प लेने और पॉलीथिन का उपयोग बंद करने की अपील की. उन्होंने चेताया कि पॉलीथिन खाने से गायों की अकाल मौत हो रही है, इसलिए इसे खुले में फेंकना गंभीर पाप है.

महाराज ने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गोचरण कर इस परंपरा को गौरव दिया. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि केवल त्योहारों पर नहीं, बल्कि रोजाना गायों को चारा खिलाने की व्यवस्था विकसित की जाए. कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदयाल जी महाराज ने यह भी बताया कि वे पुष्पमाला इसलिए स्वीकार नहीं करते क्योंकि उस धन से गौ माता को चारा खिलाना अधिक पुण्य का कार्य है. उन्होंने लोगों से सम्मान में माला लाने के बजाय गौ सेवा में सहयोग करने की अपील की.

क्या है गांव ग्वाला योजना
गांव ग्वाला योजना के तहत ये ग्वाले प्रतिदिन गांव की गायों को सामूहिक रूप से गोचर भूमि तक चराने ले जाएंगे और शाम को वापस घरों तक पहुंचाएंगे. योजना की रूपरेखा बताते हुए मंत्री ने कहा कि 70 गायों पर एक गांव ग्वाला नियुक्त किया जाएगा. संख्या बढ़ने पर दो या तीन ग्वाले लगाए जाएंगे. प्रत्येक ग्वाले को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा और पूरी व्यवस्था भामाशाहों के सहयोग से संचालित होगी.

समारोह में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही पीठ शाहपुरा के सानिध्य में कई संत-महात्माओं की उपस्थिति रही. वहीं कनवास स्थित कर्नेश्वर वेद विद्यालय के 11 बटुकों ने स्वस्तिवाचन कर वेद ऋचाओं का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया. स्थानीय लोगों का मानना है कि 'गांव ग्वाला' योजना से आवारा गौवंश की समस्या कम होगी और गौ संरक्षण की परंपरा को नई मजबूती मिलेगी.

-चेतन गुर्जर की रिपोर्ट