देश का पहला बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्लांट
देश का पहला बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्लांट
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में देश का पहला बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्लांट लगाया जा रहा है. इस प्लांट के लिए बेल्जियम से एक विशालकाय मशीन भारत लाई गई है. करीब 200 टन वजनी इस मशीन को 308 पहियों वाले भारी-भरकम ट्रक से लखीमपुर खीरी पहुंचाया गया. इसका नाम 'साइकिलाइजेशन रिएक्टर' है. इसे कुंभी चीनी मिल में बन रहे बायोप्लास्टिक प्लांट में स्थापित किया जाएगा. इस विशालकाय ट्रक और मशीन को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुटी और कई लोग वीडियो बनाते नजर आए.
बेल्जियम से ओडिशा के समुद्र तट तक पहुंची मशीन
प्लांट के जीएम डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि यह मशीन करीब छह महीने पहले रवाना हुई थी और ओडिशा पोर्ट पर उतारी गई थी. वहां से इसे लखीमपुर खीरी लाया गया है. उन्होंने बताया कि मशीन अगले दिन सुबह यहां से आगे रवाना होगी और कुंभी प्लांट पहुंचेगी. इसके बाद इसे स्थापित करने का काम शुरू किया जाएगा.
डॉ. सुनील कुमार यादव के मुताबिक, साइकिलाइजेशन रिएक्टर प्लांट की मुख्य मशीन है. इसमें लैक्टिक एसिड डालकर कैटालिस्ट की मदद से रिएक्शन कराया जाएगा. इस प्रक्रिया के बाद पॉलीलैक्टिक एसिड तैयार होगा, जिसका इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के दो प्रमुख चरण हैं. पहले चीनी से लैक्टिक एसिड बनाया जाएगा. इसके बाद लैक्टिक एसिड को कैटालिस्ट के जरिए रिएक्शन कराकर पॉलीलैक्टिक एसिड में बदला जाएगा. यही इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य चक्र है.
एक ही छत के नीचे होगा पूरा उत्पादन
जीएम ने बताया कि यह भारत का पहला और दुनिया का पहला ऐसा इंटीग्रेटेड प्लांट है, जहां एक ही छत के नीचे कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक की प्रक्रिया पूरी होगी. यहां कच्चा माल भी मिलेगा और तैयार उत्पाद भी यहीं बनेगा. उनके मुताबिक, प्लांट में पॉलीलैक्टिक एसिड से पेलेट्स तैयार किए जाएंगे. इन पेलेट्स से अलग-अलग सांचों के जरिए कई तरह की चीजें बनाई जा सकेंगी. उन्होंने बताया कि इस सामग्री से कपड़े बनाने के लिए धागा तैयार किया जा सकता है. इससे शर्ट, कटलरी और प्लास्टिक की दूसरी चीजें भी बनाई जा सकती हैं. प्लांट से जिप्सम भी निकलेगा, जिसके लिए अलग से जिप्सम फैक्ट्री लगाने की योजना है. ये सभी इसके बाय-प्रोडक्ट होंगे.
छह महीने में मिट्टी में मिल जाएगा बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक
डॉ. यादव ने बताया कि मौजूदा प्लास्टिक और पॉलीथिन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है. ये नदियों और नालों में जाकर उन्हें जाम कर देते हैं. ऐसे में बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक इसका विकल्प बन सकता है. उनके अनुसार, यह प्लास्टिक मिट्टी में जाने के बाद छह महीने के भीतर उसमें मिल जाएगा और इससे प्रदूषण नहीं होगा.
डॉ. सुनील कुमार यादव ने कहा कि प्लांट को स्थापित करने का काम शुरू किया जाएगा और उम्मीद है कि नवंबर में इसका संचालन शुरू हो जाएगा. उन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए सरकार, संबंधित मशीनरी और भारतभर के शुभचिंतकों के सहयोग का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हनुमान जी की कृपा से यह काम आगे बढ़ रहा है और सभी के सहयोग से प्लांट स्थापित किया जा रहा है.
विशालकाय ट्रक को देखने उमड़ी भीड़
करीब 308 पहियों वाले ट्रक पर इतनी बड़ी मशीन को देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए. ट्रक के साथ पुलिस अधिकारी चल रहे थे. उसके आगे एक बस भी थी, ताकि पुलिस अधिकारी उसमें आराम कर सकें. इसके साथ एंबुलेंस भी चल रही थी. ट्रक देखने पहुंचे एक बच्चे ने बताया कि कुंभी में बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्री बनने जा रही है. उसके मुताबिक, दुनिया में बायोडिग्रेडेबल प्लांट पहले भी बने हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि यहां एक ही जगह पर उत्पादन और बाय-प्रोडक्ट तैयार करने की व्यवस्था होगी.
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा फायदा
बच्चों ने उम्मीद जताई कि इस मेगा प्रोजेक्ट से लखीमपुर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. इससे लोगों को यहां काम करने के अवसर मिल सकते हैं. साथ ही, यहां बनने वाले बायो-प्रोडक्ट से स्थानीय रिटेलर और होलसेलर को फायदा हो सकता है. इन उत्पादों को दूसरे राज्यों और देशों में भेजने यानी निर्यात करने की संभावनाएं भी होंगी. उसने यह भी कहा कि बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. पुराने प्लास्टिक के नष्ट नहीं होने के कारण लैंडफिल के लिए काफी जमीन की जरूरत पड़ती है. ऐसे में भविष्य में इन जगहों का इस्तेमाल अस्पताल और कॉलेज बनाने जैसे कामों के लिए किया जा सकेगा.
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