पंजाब की शादी
पंजाब की शादी
पंजाब और चंडीगढ़ क्षेत्र में इन दिनों एलपीजी सिलेंडरों की गंभीर कमी देखने को मिल रही है. इस संकट का असर अब शादियों पर भी पड़ने लगा है. आमतौर पर अपनी भव्यता और बड़े आयोजन के लिए पहचानी जाने वाली पंजाबी शादियां इस बार कई मुश्किलों का सामना कर रही हैं. मार्च के महीने में हजारों शादियां हो रही हैं, लेकिन गैस की कमी से लोगों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है.
जानकारी के अनुसार मार्च महीने में इस इलाके में करीब 10,000 शादियां तय हैं. ऐसे में परिवारों, कैटरर्स और मैरिज पैलेस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी के कारण सभी को नई व्यवस्था करने की कोशिश करनी पड़ रही है.
कई परिवार कर रहे कार्यक्रमों में बदलाव
गैस की कमी का असर अब शादी के कार्यक्रमों पर साफ नजर आने लगा है. कई परिवार अपने कुछ फंक्शन आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग मेहमानों की संख्या कम कर रहे हैं. जो शादियां पहले कई दिनों तक बड़े स्तर पर मनाई जाती थीं, अब उन्हें छोटा और साधारण रखने की योजना बनाई जा रही है. इससे खाना बनाने की जरूरत भी कम हो जाएगी.
खाने के मेन्यू में भी किया जा रहा बदलाव
कैटरर्स का कहना है कि सबसे बड़ा बदलाव खाने के मेन्यू में देखने को मिल रहा है. पहले जहां शादियों में कई तरह के स्टॉल और लाइव काउंटर लगाए जाते थे, अब उन्हें कम किया जा रहा है. तंदूरी आइटम और ज्यादा तेल में बनने वाले पकवान भी कम किए जा रहे हैं, क्योंकि इन्हें बनाने में काफी गैस की जरूरत होती है.
वैकल्पिक तरीकों की भी हो रही कोशिश
कुछ मैरिज पैलेस और कैटरिंग टीम इलेक्ट्रिक उपकरणों या दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि उनका कहना है कि बड़े आयोजनों में सैकड़ों या हजारों लोगों के लिए खाना तैयार करने में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती. ऐसे में गैस की कमी ने इस शादी सीजन में कई परिवारों और आयोजकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
(रिपोर्ट- कमलजित संधु)
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