गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने नवरात्रि के दौरान गरबा प्रेमियों के साथ हुए 8 लाख रुपये के कथित नकली पास घोटाले का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने राजस्थान के दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंस्टाग्राम विज्ञापनों और व्हॉट्सएप के जरिए नकली पास बनाकर लोगों को ठगते थे.
पुलिस ने दोनों आरोपियों से मिले डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच तेज कर दी है. पकड़े गए आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय वीरेंद्र सिंह राठौड़ (BBA स्नातक) और 22 वर्षीय किशन सिंह राठौड़ (BCA स्नातक) के रूप में हुई है. दोनों फिलहाल बेरोजगार हैं. दोनों ने अहमदाबाद के करीब 25 से ज्यादा बडे गरबा आयोजनों के 600 से ज्यादा फर्जी पास बनाकर लोगों को बेचे और करीब 8 लाख से ज्यादा रुपए ठगे है.
ChatGPT से तैयार किए फर्जी पास, सोशल मीडिया पर चलाए ऐड
साइबर क्राइम डीसीपी लविना सिंहा ने बताया कि आरोपियों ने एक इंस्टाग्राम प्रोफाइल और एक फर्जी नाम से ईमेल आईडी बनाई थी. उन्होंने आयोजकों की जानकारी के बिना अहमदाबाद में आयोजित प्रसिद्ध 'अनंत ब्रह्मांड' गरबा महोत्सव के नाम और लोगो का अवैध रूप से इस्तेमाल किया था.
आरोपियों ने बुकिंग और प्रमोशनल मैसेज तैयार करने तथा असली टिकट जैसे दिखने वाले QR कोड और बारकोड वाले पास डिजाइन करने के लिए 'ChatGPT' का इस्तेमाल किया था. इसके बाद, मेटा (Meta) प्लेटफॉर्म पर पेड टारगेटेड विज्ञापन चलाकर गरबा के शौकीनों को भारी छूट का लालच दिया गया. उनका एक विज्ञापन अहमदाबाद के लगभग 40 हजार लोगों तक पहुंचा था.
जगह बदल-बदल कर रहे पुलिस से बचते
जांच में सामने आया है कि 19 अगस्त से 14 अक्टूबर के बीच हुए इस घोटाले में लगभग 686 नकली पास बेचकर 8 लाख रुपये प्राप्त किए गए थे. बैंक खाते में रकम आने के बाद इसे अन्य संदिग्ध (म्यूल) खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था.
गांधीनगर के सांतेज पुलिस स्टेशन में 3 अक्टूबर को मामला दर्ज होने के बावजूद, आरोपी जोधपुर, बीकानेर और सीकर जैसे शहरों में अपना स्थान बदलकर नकली पास बेचना जारी रखे हुए थे. पुलिस ने इस मामले में दोनों के खिलाफ अपराध दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.
पहले इवेंट कंपनी में भी किया फर्जी पास का फ्रॉड
पिछले 1 महीने से दोनों दोस्त नकली पास बेच रहे थे. जैसे-जैसे लोग गरबा स्थल पहुंचे तब उन्हें पता चला कि उनके पास नकली है. जिसके बाद उन्होंने पुलिस का संपर्क किया. जिसके बाद पुलिस जांच में यह सारी जानकारी सामने आई.
दोनों दोस्त पढ़े लिखे हैं, एक ने बीबीए किया है तो दूसरे ने बीसीए किया है. इसकी शुरुआत इन्होंने अगस्त महीने में एक गरबा इवेंट पिंक बटरफ्लाई से की थी. उसमें ये उस समय काम करते थे. वहां पहले फर्जी पास से फ्रॉड किया, जिसके बाद कंपनी ने निकाल दिया. उसके बाद उसे ये आइडिया आया की इस तरह से फेक पास देके लोगों के पास से पैसे कमाए जा सकते हैं.