scorecardresearch

Gadchiroli News: रक्षाबंधन के दिन गर्भवती मां की जान जोखिम में, पुल नहीं होने से एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी गांव तक, बाढ़ के पानी में कांवड़ के सहारे सफर

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के अति दुर्गम कोईंदुल गांव के लोग आज भी पक्की सड़क और पुल के लिए तरस रहे हैं. पुल नहीं होने से बारिश के मौसम में आवागमन में काफी परेशानी होती है. रक्षाबंधन के दिन गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी.

Advertisement
पक्की सड़क और पुल नहीं होने से आवागमन में परेशानी. पक्की सड़क और पुल नहीं होने से आवागमन में परेशानी.

Maharashtra News: रक्षाबंधन के दिन जब बहन की रक्षा का संकल्प लिया जा रहा था, वहीं महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के अति दुर्गम कोईंदुल गांव में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी. नालों पर पुल नहीं होने और बाढ़ के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. ऐसे में ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर कांवड़ के सहारे बाढ़ का पानी पार कराया और नदी के दूसरी ओर पहुंचाया.

आज भी पक्की सड़क के लिए तरस रहे ग्रामीण 
गडचिरोली जिले में एटापल्ली तहसील के कोईंदुल गांव में आज भी पक्की सड़क की सुविधा नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिए दो नाले पार करने पड़ते हैं. शुक्रवार सुबह छाया सुरेश नैताम (26) को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी था, लेकिन लगातार बारिश के कारण दोनों नालों में बाढ़ आ गई और एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई.

हर साल बारिश के मौसम में होती है परेशानी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्परता दिखाई. गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर कांवड़ के सहारे बाढ़ के पानी से दोनों नाले पार कराए गए. इसके बाद दूसरी ओर पहुंची एंबुलेंस से महिला को अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान स्वास्थ्य सेविका भी उनके साथ मौजूद थीं. ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे पहले 20 जुलाई को भी पुष्पा परसा नामक गर्भवती महिला को नाला पार कर इलाज के लिए ले जाने की नौबत आई थी. अन्य मरीजों को भी कई बार इसी तरह जोखिम उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल और पक्की सड़क की मांग बार-बार किए जाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है. इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है.

प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय 
आजादी के 79 वर्ष बाद भी बुनियादी परिवहन सुविधा के अभाव में गर्भवती महिला को बाढ़ के पानी से होकर अस्पताल ले जाने की नौबत आना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है. अब प्रशासन को जागकर पुल और पक्की सड़क का काम तत्काल शुरू करना चाहिए. ऐसी मांग राजेश नरोटे सहित कोईंदुळ के ग्रामीणों ने की है. जिला आरोग्य अधिकारी गडचिरोली डॉ. प्रताप शिंदे ने कहा कि रक्षाबंधन के दिन सामने आई यह घटना गडचिरोली के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

(अभिजीत की रिपोर्ट)