गैस का फर्जीवाड़ा
गैस का फर्जीवाड़ा
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एलपीजी गैस चोरी के बड़े मामले का पुलिस ने खुलासा किया है. इस पूरे मामले में पुलिस ने करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये की LPG गैस चोरी का पर्दाफाश करते हुए महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को कथित फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड माना है. पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है.
छह LPG कैप्सूल ट्रकों से शुरू हुई कहानी
इस मामले की शुरुआत 23 दिसंबर 2025 से हुई. महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस ने छह LPG कैप्सूल ट्रकों से घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों में अवैध तरीके से रिफिलिंग करते हुए पकड़ा था. कार्रवाई के बाद पुलिस ट्रकों को थाने लेकर गई और उन्हें वहीं खड़ा कर दिया गया.
इन ट्रकों में बड़ी मात्रा में LPG गैस भरी हुई थी. मार्च महीने में गर्मी बढ़ने के बाद थाने में इतने बड़े स्तर पर ज्वलनशील गैस से भरे ट्रकों को रखना जोखिम भरा माना गया. ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखकर ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की.
यहीं से शुरू हुआ गैस चोरी का कथित खेल
पुलिस जांच के अनुसार, 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच बैठक हुई. इसी बैठक में गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों से LPG निकालकर बेचने की कथित योजना बनाई गई. जांच में सामने आया कि दोनों ने अनुमान लगाया कि ट्रकों में भारी मात्रा में गैस मौजूद है, जिसे बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है. आरोप है कि पंकज चंद्राकर को खरीदार तलाशने और पूरी डील तय करने, जबकि मनीष चौधरी को रायपुर की गैस एजेंसियों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी गई.
105 मीट्रिक टन गैस का लगाया गया अनुमान
पुलिस के मुताबिक, 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर खुद सिंघोड़ा थाने पहुंचे. वहां उन्होंने ट्रकों में मौजूद LPG का आकलन किया और अनुमान लगाया कि ट्रकों में करीब 105 मीट्रिक टन गैस भरी हुई है, जिसे निकालकर बेचा जा सकता है. उसी रात आरोपियों ने कथित तौर पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर के साथ बैठक की और पूरी डील करीब 80 लाख रुपये में तय हो गई.
50 लाख रुपये मिलने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि 31 मार्च, यानी ट्रकों की कस्टडी सौंपे जाने के अगले ही दिन, रायपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर ने अजय यादव को 50 लाख रुपये दिए. बाकी 30 लाख रुपये में से 10 लाख मनीष चौधरी और 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को दिए गए.
इसके बाद 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारियों ने छह LPG ट्रकों की जिम्मेदारी सुपुर्दनामा के जरिए ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दी. ट्रकों को सिंघोड़ा थाने से रायपुर जिले के अभनपुर स्थित पेट्रोकेमिकल्स प्लांट ले जाया गया.
92 मीट्रिक टन गैस निकालकर बेचने का आरोप
पुलिस के अनुसार, करीब एक हफ्ते के भीतर ट्रकों से लगभग 92 मीट्रिक टन LPG गैस निकालकर बेच दी गई, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है. इतना ही नहीं, पूरे मामले को दबाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी वजन पर्चियां और नकली दस्तावेज तैयार करने का भी आरोप है.
चार आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर लिया. वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है.
महासमुंद के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं
(रिपोर्ट- अरविंद यादव)
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