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Manipur Politics: मणिपुर में एक्टिव हैं कौन-कौन सी पार्टियां? सूबे की सियासत को समझिए

मणिपुर में युमनाम खेमचंद सिंह ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है. सरकार में बीजेपी के अलावा नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट और निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 37 विधायक हैं. जबकि एनपीएफ के पास 5 और एनपीपी के पास 7 विधायक हैं.

Yumnam Khemchand with family members (Photo/PTI) Yumnam Khemchand with family members (Photo/PTI)

मणिपुर की सियासत में बड़ा बदलाव है. एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटने वाला है. युमनाम खेमचंद सिंह सूबे के अगले मुख्यमंत्री होंगे. बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनको नेता चुन लिया गया है. इस छोटे से राज्य की सियासत भी भी कई सियासी दल एक्टिव हैं. इसमें बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू, एनपीएफ, केपीए और एनपीपी जैसे सियासी दल अपनी-अपनी विचारधारा के साथ चलते हैं. मणिपुर की सियासत कैसी है? किस पार्टी की कितनी पकड़ है?  चलिए आपको मणिपुर की पूरी सियासत समझाते हैं.

कौन-कौन पार्टियां हैं एक्टिव?
मणिपुर पूर्वोत्तर भारत का एक अहम राज्य है. मैतेई और कुकी समुदाय बड़ी आबादी है. सिर्फ 28 लाख आबादी वाले इस राज्य की सियासत काफी दिलचस्प है. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसी नेशनल पार्टियों के अलावा कई छोटी-छोटी पार्टियां सक्रिय हैं. इसमें नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP), नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF), कुकी पीपल्स एलायंस (KPA) शामिल हैं. इन पार्टियों के अलावा जेडीयू जैसी पार्टियों की भी अच्छी-खासी जमीनी पकड़ है.

सूबे में बीजेपी की सियासत-
सूबे में बीजेपी की बड़ी ताकत है. 60 सदस्यों वाली विधानसभा में साल 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के  32 विधायक थे. अब जेडीयू के 5 विधायकों के आने के बाद बीजेपी के 37 विधायक हो गए हैं. साल 2023 में सूबे में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा शुरू हुई थी. जो करीब डेढ़ साल तक चली. जिसकी वजह से तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था. उसके बाद सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. अब फिर से बीजेपी के युमनाम सिंह मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

जेडीयू के कितने विधायक?
साल 2022 विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के 6 विधायकों ने जीत दर्ज की थी. जेडीयू ने बीजेपी सरकार को समर्थन दिया था. लेकिन साल 2022 में बीजेपी ने जेडीयू के 5 विधायकों को तोड़ लिया था और अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. जिसकी वजह से जेडीयू ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. फिलहाल सदन में जेडीयू के पास सिर्फ एक विधायक है. इकलौती विधायक वाली पार्टी ने बीजेपी की बनने वाली सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है.

एनपीएफ की ताकत-
नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) एक क्षेत्रीय दल है. जिसकी अच्छी-खासी पकड़ मणिपुर में है. एनपीएफ मणिपुर के अलावा नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सियासत में भी एक्टिव है. फिलहाल मणिपुर विधायक में एनपीएफ के पास 5 विधायक हैं. इस दल की स्थापना नागालैंड पीपुल्स काउंसिल के नाम से हुई थी. लेकिन साल 2002 में इसका नाम बदलकर एनपीएफ कर दिया गया था. एनएफपी मणिपुर की बीरेन सरकार में सहयोगी थी.
 एनपीएफ का चुनावन चिन्हा मुर्गा है. यह चुनाव चिन्ह पार्टी के तिरंगे झंडे पर है. इस झंडे में ऊपर की तरफ नीली पट्टी, बीच में सफेद पट्टी और नीचे लाल पट्टी होती है.

सूबे में एनपीपी की सियासत-
नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) एक क्षेत्रीय दल है. इसकी पकड़ मणिपुर के अलावा नागालैंड, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में है. मणिपुर में एनपीपी के 7 विधायक हैं. एनपीपी एनडीए की सहयोगी पार्टी है. वो भी सूबे की बीजेपी की नई सरकार में शामिल होगी.

एनपीपी की स्थापना पूर्णो अगिटोक संगमा ने की थी. पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट कॉनराड संगमा है. संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री भी हैं. हालांकि पार्टी में कई बार फूट भी पड़ी है. अभी हाल ही में मणिपुर में एनपीपी में फूट पड़ गई. उसके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जॉयकुमार सिंह ने नई पार्टी एनपीपी (तेरा लाई) बना ली है.

KPA के 2 विधायक-
कुकी पीपल्स एलायंस का भी मणिपुर की सियासत में पैठ है. मौजूदा समय में इस पार्टी के 2 विधायक हैं. केपीए सूबे की बीरेन सिंह की सरकार में शामिल थी. लेकिन बाद में समर्थन वापस ले लिया था.

कांग्रेस के 5 विधायक-
मणिपुर विधानसभा में कांग्रेस के 5 विधायक हैं. फिलहाल कांग्रेस विपक्ष में हैं. मणिपुर कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह हैं. 

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