प्रतीकात्मक तस्वीर
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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने के लिए एक पहल शुरू की है. इसका उद्देश्य SHG महिलाओं को हर साल कम से कम 1 लाख रुपये कमाने में सक्षम बनाना है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मंत्रालय ने अगले 2 वर्षों में 2.5 करोड़ ग्रामीण एसएचजी महिलाओं को आजीविका सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है. इसके लिए देशभर में मौजूद विभिन्न मॉडलों के आधार पर राज्य सरकारों को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है.
हाल ही में हुई हुई चर्चा में महिलाओं की 1 लाख तक की कमाई सालाना कैसे हो इसपर बात की गयी. इसमें बताया गया कि कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुधन, एनटीएफपी (गैर-लकड़ी वन उत्पाद) और दूसरे काम जिनसे पैसे कमाए जा रहे हैं, इनमें विविधता लाने के महत्व पर जोर दिया जाये ताकि लगातार एक लाख रुपये की सालाना कमाई हो सके.
अब तक किया गया है 7.7 करोड़ महिलाओं को शामिल
आपको बता दें, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 7.7 करोड़ महिलाओं को 70 लाख स्वयं सहायता समूहों में शामिल किया गया है. इनके माध्यम से 6768 ब्लॉकों को कवर किया गया है. ग्रामीण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एसएचजी को शुरुआत में आर्थिक सहायता देने के लिए सालाना लगभग 80 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं.
किसे किया जाता है इसमें शामिल?
दरअसल, इस मिशन के तहत, अलग-अलग वर्गों और जाति की गरीब महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और उनके संगठनों में शामिल होती हैं. ये वे संगठन होते हैं जो अपने सदस्यों को उनकी आय और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक विकास सेवाएं प्रदान करते हैं.
मंत्रालय द्वारा बताया गया कि जो राशि एसएचजी द्वारा बैंक से उधार ली गई उसका उपयोग अब महिलाओं के लिए आजीविका के अलग-अलग अवसर पैदा करने के लिए किया जा रहा है. हालांकि, इन सबका फायदा महिलाओं को सीधे पहुंच रहा है, लेकिन फिर भी ऐसा महसूस किया गया कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कुछ और करने की जरूरत है. बयान में आगे कहा गया कि किसी भी महिला एसएचजी सदस्यों के जीवन को स्थायी बनाने के लिए प्रति वर्ष कम से कम 1 लाख रुपये की आय होनी ही चाहिए.
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