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Mumbai Manthan 2026: मुंबई में कौन है भूमिपुत्र? आदित्य ठाकरे ने बता दिया

मुंबई मंथन 2026 के मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा कि सीएम फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. लेकिन सत्ता के लिए चिपके हुए हैं. हम महाराष्ट्र के हित के लिए साथ आए हैं. दो ठाकरे एक साथ आएं और पवार साहब का आशीर्वाद साथ में हो तो क्या दिक्कत है? उन्होंने कहा कि हम सत्ता के लिए चिपके हुए नहीं हैं.

Aaditya Thackeray Aaditya Thackeray

महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव हो रहा है. इसको लेकर आजतक का कार्यक्रम 'मुंबई मंथन' का महामंच सजा है. इस मंच पर शिवसेना (यूबीटी) के लीडर और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने शिरकत की. इस दौरान आदित्य ठाकरे ने बांग्लादेशी घुसपैठ, बीएमसी, बीजेपी और राज ठाकरे को लेकर खुलकर बात की.

बीएमसी में 25 साल के काम पर क्या बोले आदित्य?
25 साल के बीएमसी के कार्यकाल पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि हमने साल 2022 तक जो किया है, इस चुनाव में उसे होर्डिंग पर लगाया है. लेकिन बीजेपी ने दो चेहरे लगाए. जिसका योगदान महाराष्ट्र का क्या है, उसका पता नहीं है. उन्होंने कहा कि साल 1997 में जबी बीएमसी में हमारा मेयर बना तो बीएमसी 600 करोड़ के कर्ज में थी, लेकिन अब हम 92000 करोड़ के सरप्लस पर ले आए हैं. इस दौरान हमने ना तो टोल बढ़ाया और ना ही टैक्स लगाया.

बीएमसी में जो है, दूसरे शहरों में नहीं- आदित्य
उन्होंने कहा कि बीएमी में हमने कई ऐसे काम किए हैं, जो दूसरे शहरों में नहीं हैं. मुंबई के 1230 प्राइमरी स्कूल में 8 भाषाओं में 3 लाख स्टूडेंट्स पढ़ते हैं. एक्स्ट्रा करिकुलर में एस्ट्रोनॉमी क्लब, नेचर क्लब, फुटबॉल जैसी चीजें भी हैं. एसएससी बोर्ड के अलावा कई बोर्ड के तहत पढ़ाई होती है. हर एक चीजें जो बच्चे प्राइवेट स्कूल में सीखते हैं, उसे पब्लिक स्कूल में लेकर आए. उन्होंने कहा कि बीएमसी में सिर्फ प्राथमिक आरोग्य केंद्र नहीं है, बल्कि अस्पताल, 4 मेडिकल कॉलेज हैं.

12 साल में बांग्लादेशी क्यों नहीं भगाया- आदित्य
आदित्य ठाकरे ने कहा कि जब साल 2014 में बीजेपी की सरकार बनी तो उन्होंने कहा था कि पीओके वापस लेंगे और बांग्लादेशियों को वापस भेजेंगे. अभी 12 साल बाद भी हिंदू खतरे में होगा और बांग्लादेशी घुसपैठिए नहीं भगाए गए तो बीजेपी क्या कर रही थी.

कौन है भूमिपुत्र?
आदित्य ठाकरे ने कहा कि भूमिपुत्र वो हैं, जो इस भूमि में जन्मे हुए हैं. मराठी तो थे ही, अगर उत्तर भारतीयों का परिवार 2-3 पीढ़ियों पहले से यहीं पर पला-बढ़ा है तो वो भी भूमिपुत्र हुए. उनको भी मराठी से प्यार है. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि दूसरा आकर यहां काम नहीं कर सकता. मुंबई में लोग अपना सपना पूरा करने आते हैं.

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