मुजफ्फरनगर के साइबर ठगों का खुला राज
मुजफ्फरनगर के साइबर ठगों का खुला राज
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की साइबर क्राइम पुलिस ने तीन शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, यह गैंग पिछले छह महीनों से सक्रिय था और 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था. जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने देशभर में करीब 85 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया, जिसके संबंध में लगभग 70 शिकायतें दर्ज हैं. पुलिस की कार्रवाई के बाद इस नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं.
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नदीम और गुफरान चरथावल क्षेत्र के रहने वाले हैं. दोनों केवल पांचवीं तक पढ़े हैं और पहले कपड़े सिलने का काम करते थे. तीसरा सदस्य मयूर अफजल राणा है, जो USDT के क्रय-विक्रय से जुड़ा काम करता था. पुलिस का कहना है कि इन तीनों ने मिलकर एक संगठित तरीके से ठगी का नेटवर्क खड़ा किया था.
ठगी का तरीका और पैसों का लेन-देन
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जिन बैंक खातों में ठगी का पैसा आता था, उन्हें वही संचालित करते थे. इसके बाद नकद निकासी कर रकम को USDT ट्रांजैक्शन में बदला जाता था. इस प्रक्रिया में वे 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन अपने पास रखते और बाकी रकम आगे ट्रांसफर कर देते थे. इस तरीके से पैसों की ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी.
प्रतिबिंब पोर्टल से मिला सुराग
अधिकारियों के अनुसार गृह मंत्रालय की प्रतिबिंब पोर्टल की नियमित मॉनिटरिंग के दौरान तमिलनाडु से जुड़े 4.5 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट मामले की जानकारी मिली. जांच में पता चला कि इस रकम की निकासी मुजफ्फरनगर से हुई है. ट्रेस करने पर चरथावल क्षेत्र के गुलफाम और नदीम का नाम सामने आया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गैंग के तीनों सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
(रिपोर्ट- संदीप सैनी)
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