Odisha government sets up 24x7 control room amid Nepal flash floods
Odisha government sets up 24x7 control room amid Nepal flash floods
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है. अचानक आई बाढ़ के बाद कई जगहों पर अफरा-तफरी और अनिश्चितता का माहौल है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैकड़ों भारतीयों के अब तक संपर्क में नहीं आने की खबर है. स्थिति को देखते हुए भारतीय अधिकारी राहत और बचाव से जुड़ी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए ओडिशा सरकार ने भी कदम उठाया है.
राज्य सरकार ने नई दिल्ली स्थित ओडिशा निवास में 24 घंटे और सातों दिन काम करने वाला कंट्रोल रूम शुरू किया है. इसका उद्देश्य नेपाल में मौजूद ओडिशा के लोगों और उनके परिवारों को जरूरी सहायता और जानकारी उपलब्ध कराना है. यदि नेपाल में मौजूद किसी ओडिशा निवासी से संपर्क नहीं हो पा रहा है या किसी तरह की मदद की जरूरत है, तो परिवार कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए ओडिशा ने कंट्रोल रूम के नंबर जारी किए हैं.
कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर
यहां भी कर सकते हैं संपर्क
नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने भी नेपाल स्थित आपातकालीन संपर्क नंबर साझा किए हैं. नेपाल में +977 9851316807 और +977 9709107500 पर आपातकालीन संपर्क किया जा सकता है. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अपडेट के लिए @MEAIndia को फॉलो करने की अपील की गई है. ओडिशा सरकार की ओर से डायरेक्टोरेट ऑफ ओडिशा परिवार में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी और नोडल अधिकारी प्रीतिश पंडा को भी सहायता और जानकारी के लिए जिम्मेदारी दी गई है. जरूरत पड़ने पर उनसे +91 95833 21964 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है.
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. इस बीच उन परिवारों से तुरंत संबंधित हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम से संपर्क करने की अपील की गई है, जिनके परिजन नेपाल के प्रभावित इलाकों में हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. अधिकारी नेपाल में भारतीय मिशनों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित लोगों का पता लगाने और उन्हें जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए समन्वय कर रहे हैं. परिवारों से अपील की गई है कि वे अपने लापता या प्रभावित परिजनों की जानकारी उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत साझा करें, ताकि राहत और बचाव एजेंसियों को उन्हें तलाशने में मदद मिल सके.