The MEA said a passport is primarily a travel document issued by the government to enable international travel.
The MEA said a passport is primarily a travel document issued by the government to enable international travel.
भारतीय नागरिकों को जारी होने वाला पासपोर्ट, कोई नागरिकता का प्रमाण नहीं है. इस बात की घोषणा विदेश मंत्रालय ने 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस पर की. इस स्टेटमेंट के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बहस छिड़ गई, जिसमें बात हो रही है कि आखिर नागरिकता का प्रमाण फिर किस चीज़ से साबित होता है. यह एक ऐसा मुद्दा है जिसपर क्रेंद ने साफ रूप से कोई बात नहीं कही है.
बुधवार को विदेश मंत्रालय ने बयान दिया कि पासपोर्ट केवल ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, जो भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है, जिससे विदेशी यात्रा की जा सकें. अगर किसी के पास भारतीय पासपोर्ट है, तो केवल उससे व्यक्ति की नागरिकता साबित नहीं होती है. यह स्थिति सवाल पैदा कि करती है कि जब पासपोर्ट से भारतीय नागरिकता साबित नहीं होता, तो यह गैर-भारतीयों को जारी क्यों नहीं किया जाता.
दरअसल जब आपको पासपोर्ट मिलता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह आपका हो गया. दरअसल पासपोर्ट के पिछले पन्ने पर एक नोट लिखा होता है, कि यह भारतीय सरकार की प्रॉपर्टी है और जब भी सरकार आदेश देगी तो आपको इसे सरेंडर करना होगा.
2026 की शुरुआत में SIR के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्पष्ट किया था, कि आधार कार्ड नागरिकता के दायरे में नहीं आता. वह केवल एक पहचान का पत्र है. वोटर आईडी कार्ड को भी नागरिकता के डॉक्यूमेंट के बाहर रखा जाता है. उसका काम केवल मतदाता द्वारा चुनाव में मतदान किए जाने तक सीमित है.
नागरिकता कानून के तहत, यदि कोई 26 जनवरी 1950 के दिन या उसके बाद पैदा हुआ है तो वह भारतीय है. लेकिन यहां भी एक शर्त है, वह युवक 1 जुलाई 1987 से पहले पैदा होना चाहिए. तभी वह जन्म से भारतीय होगा. अब ऐसे में अगर कोई 1 जुलाई 1987 के बाद पैदा हुआ, और उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय है, तो वह भारतीय होगा.
जो लोग 3 दिसंबर 2004 के दिन, या उसके बाद पैदा हुए हैं, वह भी भारतीय होने का दावा कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए एक शर्त है. उनके लिए या तो माता-पिता दोनों का भारतीय होना जरूरी है, या फिर दोनों में कोई एक भारतीय हो, लेकिन दूसरा अवैध अप्रवासी नहीं हो चाहिए जन्म के समय.
बुधवार को विदेश मंत्रालय ने भारतीय पासपोर्ट सेवा नेटवर्क को लेकर कई मील के पत्थर गिनवाए, जिनमें चिप वाले ऊ-पासपोर्ट भी शामिल रहे. विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि 2025 में पासपोर्ट और उससे जुड़ी 1.5 करोड़ सेवा दी गईं. जिसमें केवल पासपोर्ट की 1.39 थी.
विदेश मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट से जुड़ी सेवा देने के समय को भी सुधारा गया है. डेटा के अनुसार पुलिस सत्यापन को हटा दिया जाए, तो पासपोर्ट डिलीवर होने में 6 दिन का समय लगता है. साथ ही लोगों को पासपोर्ट सेवा केंद्र पर केवल 45 मिनट का समय लगता है काम करवाने में.
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के कम समय लगने के पीछे का है कि पासपोर्ट सेवा केंद्र में 6 गुना का इजाफा. वर्तमान समय में भारत में 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र है, जो केवल एक दशक पहले 77 हुआ करते थे.