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Republic Day 2026: 2 को कीर्ति चक्र... 10 को शौर्य चक्र, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीर जवानों को वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कार देकर किया सम्मानित 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना के वीर जवानों को वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया. इसमें 2 कीर्ति चक्र, 10 शौर्य चक्र (1 मरणोपरांत), 45 सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं. 

President Draupadi Murmu Honored the Soldiers President Draupadi Murmu Honored the Soldiers

गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के बहादुर अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और वीर जवानों को वीरता व विशिष्ट सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार देने की स्वीकृति दी. ये सम्मान विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और निरंतर उत्कृष्ट सेवा के लिए दिए गए हैं. ये पुरस्कार देश की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में सैनिकों के योगदान को सम्मानित करते हैं. 

वीरता पुरस्कार
चक्र श्रेणी:
2 कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र प्रदान किए गए. इनमें 1 शौर्य चक्र मरणोपरांत दिया गया. 

सेना मेडल (वीरता): 1 (दूसरी बार) और 44 सेना मेडल (वीरता) प्रदान किए गए, जिनमें 5 मरणोपरांत शामिल हैं.

विशिष्ट सेवा पुरस्कार
राष्ट्रपति ने विशिष्ट सेवा के लिए भी कई पुरस्कार मंजूर किए. इसमें 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल और 7 युद्ध सेवा मेडल शामिल हैं. इसके अलावा, सेना मेडल (विशिष्ट) 2 बार,  43 सेना मेडल (विशिष्ट) और 85 विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किए गए. साथ ही, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन ऑर्किड, ऑपरेशन मेघदूत सहित विभिन्न अभियानों, बचाव कार्यों और हताहत निकासी अभियानों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 81 मेंशन-इन-डिस्पैच भी दिए गए.

कीर्ति चक्र से ये हुए सम्मानित
मेजर अरशदीप सिंह (1 असम राइफल्स): 14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर एक विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते हुए अचानक हुए हमले में मेजर अरशदीप सिंह ने घने जंगल के बीच ऊंचाई पर मौजूद दुश्मनों के ठिकाने पर साहसिक हमला किया. भारी गोलीबारी के बावजूद उन्होंने कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा.

नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस): 11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान उन्होंने भारी फायर के बीच आगे बढ़ते हुए एक विदेशी आतंकवादी को मार गिराया. इतना ही नहीं दूसरे आतंकी को भी निष्क्रिय किया. इस दौरान नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा ने धैर्य और साहस कमाल का दिखाया.  

शौर्य चक्र
लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा स्पेशल फोर्सेस): 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा पर सटीक अभियान की योजना बनाकर स्वयं नेतृत्व किया, जिसमें एक मजबूत उग्रवादी शिविर नष्ट किया और 9 आतंकवादी मारे.

मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स): 29 अप्रैल 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत साहस दिखाते हुए एक उग्रवादी को ढेर किया. कुल तीन उग्रवादी मारे गए.

मेजर शिवकांत यादव (पैरा स्पेशल फोर्सेस): 12-13 मई 2025 की रात शोपियां में कठिन परिस्थितियों में आतंकवादियों का पीछा करते हुए एक खतरनाक आतंकवादी को नजदीकी मुकाबले में मार गिराया.

मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स): 15 मई 2025 को पुलवामा में तलाशी अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ‘ए+ श्रेणी’ के आतंकवादी को मार गिराया.

मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह (पैरा स्पेशल फोर्सेस): अपहृत नागरिकों को छुड़ाने के उच्च जोखिम वाले अभियान में उन्होंने साहस दिखाते हुए आतंकवादियों को नजदीक से निष्क्रिय किया और एक निर्दोष नागरिक को सुरक्षित बचाया.

कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (पैरा स्पेशल फोर्सेस): 21 जुलाई 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में घात लगाकर किए गए अभियान में एक कुख्यात जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी को मार गिराया.

सूबेदार पीएच मोसेस (1 असम राइफल्स): 14 मई 2025 को भारी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए बेहतर मोर्चा संभाला और कई आतंकवादियों को निष्क्रिय किया.

लांस दफादार बलदेव चंद (42 राष्ट्रीय राइफल्स)-मरणोपरांत: 19 सितंबर 2025 को किश्तवाड़ में आतंकवादियों से आमने-सामने की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंत तक लड़ते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया.

राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई (3 असम राइफल्स): 9 जून 2025 को मणिपुर में घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान तीन सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराकर अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा.

राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स): 19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत से लौटते समय हुए हमले में घायल होने के बावजूद वाहन को खतरे से बाहर निकालकर आठ साथियों की जान बचाई.

(शिवानी शर्मा की रिपोर्ट)