scorecardresearch

कहां रखा है भारत का असली संविधान, गैस चैंबर में क्यों रखी गई असली कॉपी? साइंटिफिक है तरीका...

Indian Constitution: 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान को पूरे देश में लागू किया गया. भारत को अपना संविधान मिल गया लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस किताब के सहारे 140 करोड़ लोगों का लोकतंत्र चलता है, उसकी असली प्रति कैसी है और कहां रखी है? अगर नहीं... तो चलिए हम आपको बताते हैं.

Indian Constitution Indian Constitution

Where is the original copy of Indian Constitution: 26 जनवरी आने वाली है, इस दिन को भारत में गणतंत्र दिवस (Republic Day) के तौर पर मनाया जाता है. 26 जनवरी 1950 के दिन हमारा यानी भारत का संविधान लागू हुई थी, तब से हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है. इस दिन अंग्रेजों से आजादी के बाद भारत के अपने कानून और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ ही जनता का शासन, जनता के लिए हो इसी सोच के साथ 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान को पूरे देश में लागू किया गया. भारत को अपना संविधान मिल गया लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस किताब के सहारे 140 करोड़ लोगों का लोकतंत्र चलता है, उसकी असली प्रति कैसी है और कहां रखी है? अगर नहीं... तो चलिए हम आपको बताते हैं.

दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान
आपको जानकर हैरानी होगी कि, भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है. इसकी मूल प्रति कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हाथ से लिखी थी. जी हां, हमारे संविधान की मूल प्रति ना तो टाइप की गई थी और ना ही प्रिंट की गई थी. प्रेम बिहारी नारायण ने इटैलिक शैली में अपने हाथों से इसे लिखा था. इसकी मूल प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में सुरक्षित हैं. इस ऐतिहासिक काम के लिए प्रेम बिहारी नारायण ने कोई मेहनताना नहीं लिया, बल्कि सिर्फ इतना चाहा कि उनके दादा का नाम संविधान में दर्ज हो.

संविधान के हर पन्ने को शांतिनिकेतन से जुड़े महान कलाकारों ने सजाया था. नंदलाल बोस और उनके सहयोगियों ने इसमें भारत की सभ्यता, इतिहास और परंपराओं को चित्रों के जरिए उकेरा. इन चित्रों में सिंधु घाटी से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक की झलक मिलती है, जो संविधान को एक कलात्मक धरोहर बनाती है.

भारत के संविधान की मूल प्रति कहां रखी है?
भारत के संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति नई दिल्ली स्थित संसद पुस्तकालय (Parliament Library) में रखी गई है. यह प्रति  विशेष हीलियम-भरे ग्लास केस में नियंत्रित तापमान और नमी, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संरक्षित है. ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके. बता दें कि, यह आम लाइब्रेरी नहीं, बल्कि अत्यधिक सुरक्षा और नियंत्रित वातावरण वाला स्थान है. यहां बिना अनुमति पहुंच संभव नहीं है.

कितने पन्ने और कितने हस्ताक्षर?
संविधान की मूल प्रति कुल 251 पन्नों की है. ये सभी पन्ने पार्चमेंट यानी चर्मपत्र पर लिखे गए हैं, जो सामान्य कागज से ज्यादा टिकाऊ होता है. इन पन्नों पर संविधान सभा के 284 सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं. यही हस्ताक्षर इस दस्तावेज को कानूनी ही नहीं, ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं.

सुरक्षा के लिए 'हीलियम गैस' का कवच
कागज की उम्र और उसकी स्याही को बचाना सबसे मुश्किल काम होता है. संविधान की मूल प्रति 'पार्चमेंट पेपर' पर हाथ से लिखी गई है. इसे सामान्य हवा में रखने पर नमी और ऑक्सीजन की वजह से कागज पीला पड़ सकता है या कीड़े उसे नष्ट कर सकते हैं. इसलिए  संविधान को हीलियम गैस से भरे एक खास पारदर्शी बॉक्स में रखा गया है. बता दें कि, हीलियम एक इनर्ट गैस है, जो किसी रासायनिक प्रतिक्रिया में हिस्सा नहीं लेती है. इससे ऑक्सीजन बाहर रहती है और फंगस, बैक्टीरिया या कीड़ों का खतरा खत्म हो जाता है. संविधान को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ गैस बॉक्स ही नहीं, बल्कि पूरे कमरे का वातावरण नियंत्रित किया जाता है. वहां का तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता करीब 30 प्रतिशत रखी जाती है. 

ये भी पढ़ें: