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Parliament Monsoon Session: इस बार मॉनसून सत्र में कौन से बिल लाएगी मोदी सरकार... संसद में क्या है नंबर गेम... विपक्ष किन मुद्दों पर घेरने के लिए है तैयार... सबकुछ यहां जान लीजिए आप 

Parliament Monsoon Session 2026: इस बार संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. मोदी सरकार जहां इस सत्र में कई विधेयक पास कराने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष भी कई मुद्दों को लेकर संसद में सरकार को घेरने के लिए तैयार है. ऐसे में मॉनसूत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है. यहां आप जान सकते हैं सरकार मॉनसून सत्र में कौन से बिल लाने वाली है, लोकसभा व राज्यसभा में नंबर गेम क्या है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है.  

Lok Sabha (File Photo: PTI)  Lok Sabha (File Photo: PTI) 

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर जो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. मोदी सरकार इस मॉनसून सत्र में जो विधेयक यानी बिल लेकर आ रही है, यदि वह लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया तो देश की राजनीति, चुनाव प्रणाली, आरक्षण और सत्ता का समीकरण तक एक तरह से पूरा बदल जाएगा. हालांकि संसद में बिल तो मॉनसून सत्र के दौरान आएगा लेकिन नंबरों का जोड़-घटाव अभी से शुरू हो गया है.

आपको मालूम हो कि संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए. लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एनडीए सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है. इसी बहुमत को जुटाने में मोदी सरकार जुटी हुई है. उधर, विपक्ष भी कई मुद्दों को लेकर संसद में सरकार को घेरने के लिए तैयार है. ऐसे में इस बार मॉनसूत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है. यहां आप जान सकते हैं सरकार मॉनसून सत्र में कौन से बिल लाने वाली है, लोकसभा व राज्यसभा में नंबर गेम क्या है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है.  

कौन से बिल मॉनसून सत्र में ला रही सरकार
1.  महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)
2. परिसीमन विधेयक
3. 129वां संविधान संशोधन विधेयक
4. 130वां संविधान संशोधन विधेयक
5. FCRA संशोधन विधेयक
6. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का बिल, एंटी-डोपिंग बिल और कॉरपोरेट कानून में सुधार विधेयक 

महिला आरक्षण विधेयक: सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को साल 2023 के सितंबर में संसद के विशेष सत्र में पेश किया था लेकिन यह उस समय लागू नहीं हो सका था. अब इस विधेयक फिर लाने की तैयारी में सरकार है. आपको मालूम हो कि इस बिल के तहत लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है. हालांकि इसमें एक बड़ी शर्त यह है कि यह आरक्षण तभी लागू होगा जब परिसीमन (डेलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. 

परिसीमन विधेयक: मोदी सरकार इस बार मॉनसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश में है. आपको मालूम हो कि परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से बंटवारा. साल 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होनी है. 

129वां संविधान संशोधन विधेयक: सरकार इस बार मॉनसून सत्र में 129वां संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने की कोशिश में है. इस बिल के पास होने पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराया जा सकेगा. आपको मालूम हो कि एक देश, एक चुनाव कराने को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. 

130वां संविधान संशोधन विधेयक: मोदी सरकार मॉनसून सत्र में 130वां संविधान संशोधन विधेयक लेकर आ रही है. इसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है और उसे जेल की सजा होती है, तो सजा शुरू होने के 30 दिनों के भीतर वह खुद ही अपने पद से हट जाएगा. 

FCRA संशोधन विधेयक: मोदी सरकार विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन करके एनजीओ और धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर कंट्रोल चाहती है. 

विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने के लिए है तैयार
संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष कई मुद्दों को लेकर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है. विपक्ष मोदी सरकार से नीट परीक्षा के पेपर लीक, अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए बयान, मणिपुर में जारी हिंसा, बेरोजगारी, बढ़ती मंहगाई, ई-20 यानी एथेनॉल ईंधन को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी जैसे मुद्दे को संसद में उठाकर घरने की तैयारी में है. कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार एक देश एक चुनाव के प्रस्ताव, परिसीमन और संविधान संशोधन विधेयक सदन में लाती है तो विपक्ष इसका जमकर विरोध करेगा. 

क्या है संसद में नंबर गेम 
आपको मालूम हो कि संविधान संशोधन के लिए दो शर्तें हैं. पहला लोकसभा में कुल सदस्यता का बहुमत यानी 543 में से कम से कम 272 सांसद और दूसरा ससंद में उपस्थित और वोट डालने वालों का दो-तिहाई संख्या. लोकसभा में मौजूदा समय में सांसदों की कुल प्रभावी संख्या 540 है. ऐसे में दो-तिहाई बहुमत 360 हुआ. लोकसभा में एनडीए के पास 324 सांसद हैं. ऐसे में लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए एनडीए  36 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे. अब सवाल उठ रहा है कि सरकार को कहां से वोट मिल सकता है. सरकार की नजर कई विपक्षी सांसदों पर है. विपक्ष में समाजवादी पार्टी यानी सपा के 37 सांसद हैं, राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी के 4 सासंद और एनसीपी शरदचंद्र पवार के 8 सांसद हैं. सूत्रों के अनुसार जेएमएम के तीन सांसद, आम आदमी पार्टी यानी आप के तीन सांसद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो सांसद भी सत्ता पक्ष के संपर्क में बताए जा रहे हैं. सरकार समर्थन जुटाने के साथ ही वोटिंग से दूरी के विकल्प पर भी काम कर रही है. 

शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद यदि सरकार के साथ आते हैं तो एनडीए का आंकड़ा 324 से बढ़कर 332 हो जाएगा. ऐसे में और 28 वोट की जरूरत होगी. डीएमके के लोकसभा में 22 सांसद हैं. यदि डीएमके सरकार के समर्थन में वोट करती है तो सरकार का आंकड़ा 354 तक पहुंच जाएगा. इस तरह से सिर्फ और 6 वोट की जरूरत होगी. यदि डीएमके समर्थन के बजाय अनुपस्थित रहती है तो सदन में मौजूद सांसदों की संख्या घटेगी और बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा. इसका मतलब है कि डीएमके समर्थन करे या दूरी बनाए दोनों ही स्थिति में उसका फैसला महत्वपूर्ण है. ऐसे में डीएमके का बहुत बड़ा रोल हो सकता है. उधर, राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत 164 है. बंगाल की 3 सीटों पर उपचुनाव के बाद एनडीए सरकार की संख्या राज्यसभा में 158 हो जाएगी. इस तरह से दो-तिहाई बहुमत के लिए सिर्फ 6 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. यदि 12 सांसद वोटिंग से दूर रहते हैं तो सरकार के लिए गणित और आसान हो सकता है. राज्यसभा में डीएमके के 8 सांसद हैं. इस तरह से यदि राज्यसभा में भी डीएमके समर्थन करे या अनुपस्थित रहे तो सरकार का काम आसान हो सकता है.