PNG vs LPG
PNG vs LPG
देश में रसोई गैस को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने आदेश जारी कर उन इलाकों में LPG से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में शिफ्ट होना अनिवार्य कर दिया है, जहां PNG उपलब्ध है. नोटिस मिलने के बाद घरों को 3 महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद LPG कनेक्शन बंद किया जा सकता है. यह फैसला सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए लिया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz फिलहाल बाधित है. इसी रास्ते से दुनिया की बड़ी मात्रा में LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई होती है.
इसके अलावा, खाड़ी देशों के कई गैस प्रोसेसिंग प्लांट भी प्रभावित हुए हैं. यानी सप्लाई और प्रोसेसिंग दोनों ही स्तर पर दिक्कत है. इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं.

सरकार क्या बदलाव कर रही है
सरकार इस संकट से निपटने के लिए तेजी से गैस इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रही है.
1. तेजी से पाइपलाइन नेटवर्क विस्तार
देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेज किया जाएगा, ताकि हर घर तक PNG पहुंच सके.
2. बेवजह की अड़चनें खत्म होंगी
अब कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने में आने वाली दिक्कतें जैसे कई विभागों से अनुमति, ज्यादा फीस, या सोसायटी/RWA की रोक इन सबको हटाया जाएगा.
3. LPG से PNG में शिफ्ट
जहां PNG उपलब्ध है, वहां लोगों को LPG छोड़कर पाइप्ड गैस अपनानी होगी.
4. पूरे देश में एक समान नियम
अब अलग-अलग राज्यों के बजाय पूरे देश में गैस पाइपलाइन के लिए एक जैसा नियम लागू होगा.

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले के बाद आपकी सोसायटी या RWA पाइपलाइन बिछाने से मना नहीं कर सकेगी. इससे ज्यादा घरों तक PNG कनेक्शन जल्दी पहुंचेगा. यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, ताकि भविष्य में किसी विदेशी संकट का असर कम हो.
PNG क्यों बढ़ा रही है सरकार
सप्लाई ज्यादा सुरक्षित: पाइपलाइन नेटवर्क अलग-अलग स्रोतों से गैस ला सकता है, सिर्फ एक रूट पर निर्भर नहीं रहता
सस्ती गैस: PNG, LPG से 30-40% तक सस्ती पड़ती है.
ज्यादा सुविधा: सिलेंडर खत्म होने या डिलीवरी का इंतजार नहीं
सब्सिडी का बोझ कम: LPG पर सरकार भारी सब्सिडी देती है
कम प्रदूषण: नेचुरल गैस ज्यादा साफ ईंधन है.
क्या इससे आयात पर निर्भरता खत्म होगी?
पूरी तरह नहीं. भारत के पास सीमित गैस भंडार हैं, इसलिए आयात जारी रहेगा. हालांकि, सरकार अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से भी गैस सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है. PNG नेटवर्क मजबूत होने से अलग-अलग स्रोतों से गैस जोड़ना आसान होगा, जिससे एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम होगी.
फिर भी LPG क्यों रहेगा जरूरी?
ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन पहुंचाना मुश्किल है.
पूरे देश में PNG नेटवर्क बनाने में कई साल लगेंगे.
गैस का आयात फिर भी समुद्री रास्तों से ही होगा.
यानी LPG पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन शहरों में इसकी भूमिका धीरे-धीरे कम हो सकती है.

PNG और LPG में क्या है बेहतर
PNG की सबसे बड़ी खासियत इसकी निरंतर सप्लाई है, क्योंकि यह सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचती है, जबकि LPG सिलेंडर पर निर्भरता में बुकिंग, डिलीवरी और स्टोरेज जैसी परेशानियां शामिल रहती हैं. आमतौर पर PNG 30-40% तक सस्ता पड़ता है. इसके अलावा PNG को अधिक सुरक्षित और किफायती भी माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कम प्रेशर होता है और उपयोग के अनुसार बिलिंग होती है. सुरक्षा के मामले में भी PNG को बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह हवा से हल्की होती है और लीकेज होने पर जल्दी फैल जाती है, जबकि LPG हवा से भारी होती है और नीचे जमा होकर खतरा बढ़ा सकती है.