गिरफ्तार किए गए 17 फर्जी डॉक्टर
गिरफ्तार किए गए 17 फर्जी डॉक्टर
राजकोट जिले के औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ करने वाले 17 फर्जी डॉक्टरों को ग्रामीण SOG टीम ने पकड़ा है. पुलिस जांच में सामने आया है कि इन 17 लोगों में से 3 व्यक्ति 10वीं पास, 3 ग्रेजुएट, 8 व्यक्ति 12वीं पास और 3 व्यक्ति केवल 11वीं पास हैं. इतना ही नहीं, पकड़े गए 17 लोगों में से एक व्यक्ति 25 साल से, एक 20 साल से और बाकी 15 लोग एक से सात साल तक से क्लिनिक चला रहे थे.
इस अभियान को जारी रखते हुए अन्य फर्जी डॉक्टरों को पकड़ने के लिए जांच चल रही है. पुलिस ने संभावना जताई है कि राजकोट जिले में और भी 'मुन्नाभाई MBBS' (फर्जी डॉक्टर) पकड़े जा सकते हैं.
एक दिन 17 फर्जी डॉक्टर की धड़पकड़
राजकोट जिला पुलिस प्रमुख विजय सिंह गुर्जर ने बताया कि राजकोट ग्रामीण SOG टीम ने पूरे जिले में अलग-अलग टीमें बनाकर उन फर्जी डॉक्टरों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की थी, जो बिना किसी प्रमाण पत्र या मान्यता के क्लीनिक चलाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे.
इसी क्रम में, कल एक ही दिन में कुल 17 फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा गया. इनमें पाटनवाव पुलिस स्टेशन क्षेत्र से 2, जसदन पुलिस स्टेशन क्षेत्र से 3, जेतपुर तालुका, शापर और जेतपुर शहर से दो-दो, तथा कोटडासांगाणी, मेटोडा GIDC, पडधरी, गोंडल तालुका और जेतपुर उद्योगनगर से एक-एक फर्जी डॉक्टर पाए गए. इनके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
10वीं पास कंपाउंडर बने डॉक्टर
पुलिस जांच में पता चला कि पकड़े गए 17 आरोपियों में से 14 केवल 10वीं और 12वीं कक्षा तक ही पढ़े हैं, जबकि बाकी तीन आरोपी सामान्य ग्रेजुएट हैं. ये सभी आरोपी पहले असली डॉक्टरों के सहायक (कंपाउंडर) के तौर पर या मेडिकल स्टोर में काम कर चुके थे.
यहां से मिले अनुभव के आधार पर उन्होंने खुद ही क्लिनिक खोलकर चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. ये नकली डॉक्टर सामान्य बुखार, सर्दी और खांसी जैसी बीमारियों के लिए होम्योपैथिक और एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करते थे. साथ ही मरीजों को एलोपैथिक उपचार तथा इंजेक्शन भी देते थे.
केवल चंद महीनों पहले शुरू की प्रैक्टिस
पकड़े गए कुछ आरोपी पिछले दो-तीन महीनों से ही इस धंधे में आए थे, जबकि कुछ लोग 10 वर्षों से भी अधिक समय से बिना किसी चिकित्सा योग्यता के बिना मरीजों का इलाज कर रहे थे. राजकोट ग्रामीण पुलिस के विशेष अभियान के दौरान, पकड़े जाने के डर से कई फर्जी डॉक्टर अपने क्लिनिक बंद करके मौके से फरार हो गए.
आने वाले दिनों में भी पूरे जिले से फर्जी डॉक्टरों का पता लगाने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए विशेष अभियान जारी रखा जाएगा. फिलहाल, पकड़े गए सभी 17 आरोपियों के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है.
आरोपियों के पास एलोपैथी प्रैक्टिस के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई प्रमाण-पत्र या लाइसेंस नहीं है, और न ही उनके पास एलोपैथिक उपचार के लिए आवश्यक डिग्री प्रमाण-पत्र मौजूद है, इसलिए मेडिकल प्रैक्टिस एक्ट-30 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है.