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RVM: क्या है रिमोट वोटिंग मशीन? जानें इसपर विपक्ष क्यों उठा रहा सवाल 

प्रवासी कामगारों के लिए रिमोट वोटिंग मशीन शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों का विरोध जारी है. इसके कारण चुनाव आयोग रिमोट वोटिंग मशीन के प्रोटोटाइप का डेमो नहीं दे सका. विपक्षी नेताओं का कहना है कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए आरवीएम को लाया जा रहा है.

रिमोट वोटिंग मशीन पर विपक्ष ने उठाए सवाल. रिमोट वोटिंग मशीन पर विपक्ष ने उठाए सवाल.
हाइलाइट्स
  • मतदान के लिए प्रवासियों को घर लौटने की जरूरत नहीं होगी

  • एक साथ 72 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करवाया जा सकता है

चुनाव आयोग ने रिमोट वोटिंग का जो नया फॉर्मूला तैयार किया है, उस पर कई विपक्षी दलों ने ऐतराज जताया है. सोमवार को चुनाव आयोग रिमोट वोटिंग मशीन के प्रोटोटाइप का डेमो नहीं दे सका क्योंकि विपक्ष ने इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोई भी विपक्षी दल  रिमोट वोटिंग मशीन (आरवीएम) के प्रदर्शन को नहीं देखना चाहता. पहले ऐसी मशीन की आवश्यकता का मुद्दा सुलझाया जाना चाहिए. विपक्षी दलों का कहना है कि यह सत्तारूढ़ पार्टी को सियासी फायदा देने का नया तरीका विकसित किया गया है.

गृह राज्य से बाहर रह रहे मतदाता भी दे सकते हैं वोट
दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग जहां हैं वहां वोटिंग कर सकें, इसके लिए चुनाव आयोग ने नया प्रोटोटाइप तैयार किया है. इसे रिमोट वोटिंग सिस्टम नाम दिया गया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक घरेलू प्रवासी नागरिक यानी अपने गृह राज्य से बाहर रह रहे मतदाता भी इस मशीन से अपने क्षेत्र में वोट डाल सकते हैं. आयोग के मुताबिक ऐसे मतदाताओं के लिए आरवीएम केंद्र बनाए जाएंगे. इन केंद्र पर जाकर कोई भी मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित जानकारियां ले सकेगा. इस केंद्र पर प्रत्याशियों की सूची उपलब्ध हो जाएगी और मतदाता आसानी से अपने पसंदीदा प्रत्याशी को मतदान कर सकेगा. इस मशीन से एक साथ 72 निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करवाया जा सकता है. इस मशीन में वीवीपैट मशीन के माध्यम से मतों की गणना संभव होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के मुताबिक, यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिनका रवैया वोट डालने का नहीं है.

विपक्ष ने क्या सवाल उठाए ?
रिमोट वोटिंग के मामले में डीएमके, टीएमसी और कांग्रेस ने अपना विरोध जताया है. कांग्रेस ने प्रवासी मजदूरों के दूसरे राज्य में वोटिंग करने पर ऐतराज जताया है. पार्टी ने चुनावी प्रणाली में विश्वास बहाल करने की मांग की है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सहित कई दलों कहना है, वे इस मुद्दे की विस्तार से जांच करने के बाद कड़ा रुख अपनाएंगे. समाजवादी पार्टी का कहना है, पोल पैनल को पहले ईवीएम के दुरुपयोग के बारे में विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा.

फर्जी मतदान को बढ़ावा: डीएमके राज्यसभा सांसद पी विल्सन का कहना है, चुनाव आयोग के पास मौजूदा कानून में संशोधन किए बिना इस तरह का प्रोटोटाइप लागू करने का अधिकार नहीं है. नए तरीके से फर्जी मतदान होगा और निष्पक्ष वोटिंग की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा, अगर बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हम तमिलनाडु के मतदाताओं को वहां वोट करने की अनुमति देते हैं तो बिहार के क्षेत्रीय दल इसे कैसे सही ठहरा पाएंगे.

जबरदस्ती थोपा गया: तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने अपने ट्वीट में लिखा, वीवीपैट सिस्टम पारदर्शी साबित नहीं हो पाया. इसे जबरदस्ती थोपा गया और जिस उद्देश्य से लागू किया गया तो विफल हो गया. अब प्रवासियों को उनके वर्तमान स्थान से मतदान करने के लिए नया तरीका अपनाया जा रहा है. कोई भी तर्क इस बात का समर्थन नहीं कर सकता.