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वुड कार्विंग में रचा इतिहास, चार पीढ़ियों की मेहनत का मिला सबसे बड़ा इनाम, राष्ट्रपति ने सहारनपुर के दिलशाद को दिया शिल्प गुरु सम्मान

GNT से बातचीत में मोहम्मद दिलशाद ने कहा कि वह इस सम्मान के लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के बेहद आभारी हैं. उन्होंने बताया कि सरकारों ने उन्हें अपनी कला को देश के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दिया

Saharanpur wood carving Saharanpur wood carving

देश ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की विश्वविख्यात हस्तशिल्प कला को सम्मान दिया है. सहारनपुर के वरिष्ठ हस्तशिल्पी मोहम्मद दिलशाद को लकड़ी पर की गई बेहतरीन वुड कार्विंग के लिए शिल्प गुरु पुरस्कार-2024 से नवाजा गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया.

चौथी पीढ़ी के कारीगर हैं दिलशाद
दिलशाद के लिए यह पहला राष्ट्रीय सम्मान नहीं है. इससे पहले साल 1997 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. दिलशाद चौथी पीढ़ी के कारीगर हैं, जिनके परदादा, दादा और पिता भी लकड़ी पर नक्काशी की इसी परंपरा से जुड़े रहे. पिछले करीब 50 वर्षों से वह शीशम की लकड़ी को अपनी कला से नया जीवन दे रहे हैं.

Saharanpur wood carving

5 महीने में तैयार किया टेबल
इस बार उन्हें जिस सेंट्रल टेबल के लिए सम्मान मिला, उसे तैयार करने में चार से पांच महीने की मेहनत लगी. पहले लकड़ी का विशेष ट्रीटमेंट किया गया, फिर महीनों तक बेहद बारीक और जटिल नक्काशी की गई. टेबल के किनारों पर जालीदार डिजाइन है, जिसमें नीचे लैंप रखने पर अनोखा प्रकाश प्रभाव दिखाई देता है. दिलशाद बताते हैं कि उनके काम में दिमाग और हाथ दोनों साथ चलते हैं, बिना कागज पर स्केच बनाए सीधे लकड़ी पर डिजाइन उकेरा जाता है.

दिलशाद ने कहा कि राष्ट्रपति से सम्मान मिलना उनके लिए गर्व का क्षण है. यह केवल उनका नहीं, बल्कि सहारनपुर के हर उस कारीगर का सम्मान है जो वुड कार्विंग से जुड़ा है. इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दी है, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है.

Saharanpur wood carving

पद्मश्री पुरस्कार लेना चाहते हैं दिलशाद
खास बात यह है कि दिलशाद की कारीगरी की विरासत आगे भी मजबूती से चल रही है. उनके तीनों बेटे मोहम्मद उस्मान, रिहान और इरशाद भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं. दिलशाद का कहना है कि अब उनका अगला लक्ष्य पद्मश्री पुरस्कार हासिल करना है और वह सहारनपुर की वुड कार्विंग कला को विश्व पटल पर और ऊंचाई तक ले जाने के लिए लगातार मेहनत करते रहेंगे.

GNT से बातचीत में मोहम्मद दिलशाद ने कहा कि वह इस सम्मान के लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के बेहद आभारी हैं. उन्होंने बताया कि सरकारों ने उन्हें अपनी कला को देश के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दिया. दिलशाद के मुताबिक, उन्होंने अपनी मेहनत के अनुसार ही यह बड़ा सम्मान हासिल किया है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वह कई तरह की हस्तशिल्प कलाकृतियां बना चुके हैं, जिनके लिए उन्हें अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं. इस बार उन्होंने एक खास तरह की सेंटर टेबल तैयार की थी. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके किनारों पर जालीदार नक्काशी की गई है और अगर इसके नीचे लैंप रख दिया जाए, तो रोशनी के साथ इसका डिजाइन और भी खूबसूरत दिखाई देता है.