13 से 15 मार्च तक को होगा कृषि मेले का आयोजन
13 से 15 मार्च तक को होगा कृषि मेले का आयोजन
समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में 13 से 15 मार्च तक तीन दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया जाएगा. विकसित कृषि–उन्नत भारत थीम पर आयोजित होने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों किसान, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे. मेले के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों, नए कृषि यंत्रों और उन्नत कृषि प्रणालियों की जानकारी दी जाएगी.
200 से अधिक स्टॉल में दिखेगी आधुनिक तकनीक
किसान मेले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी स्टॉल लगाए जाएंगे. इन स्टॉलों पर किसानों को ड्रोन से खेतों में छिड़काव, डिजिटल खेती, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि तकनीक, हाइड्रोपोनिक्स यानी मिट्टी रहित खेती और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी. साथ ही किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा.
कई राज्यों के किसान और वैज्ञानिक होंगे शामिल
मेले में बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों से किसान और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे. तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में तकनीकी सत्र और गोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा. इन सत्रों में कृषि विशेषज्ञ किसानों को नई खेती पद्धतियों, फसल उत्पादन बढ़ाने के उपाय और खेती की लागत कम करने के तरीके बताएंगे.
पशु और उद्यान प्रदर्शनी भी बनेगी आकर्षण
किसान मेले में पशु प्रदर्शनी और उद्यान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा. इसमें फल, फूल और सब्जियों के साथ-साथ उनसे बने विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसके अलावा किसानों और प्रतिभागियों के लिए कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी, जिससे मेले का आकर्षण और बढ़ेगा.
किसानों के लिए बड़ा मंच बनेगा मेला
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी एस पाण्डे ने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है. मेले में संरक्षित खेती, प्राकृतिक कृषि प्रणाली, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और आधुनिक कृषि यंत्रों का जीवंत प्रदर्शन भी किया जाएगा. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे आयोजन किसानों के लिए नई तकनीक सीखने और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का बड़ा मंच साबित होते हैं, जिससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है.
रिपोर्टर: जहांगिर आलम
ये भी पढ़ें: