बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला
बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला
देश की बच्चा गोद लेने वाली माताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सुनाया है. अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा. पहले यह सुविधा केवल तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही उपलब्ध थी. कोर्ट ने इस भेदभावपूर्ण प्रावधान को खत्म करते हुए मातृत्व अधिकारों का दायरा व्यापक कर दिया है. चलिए आपको बताते हैं पूरी खबर क्या है.
जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मातृत्व लाभ केवल जैविक माताओं तक सीमित नहीं रह सकता. बच्चा गोद लेने वाली माताओं को भी समान रूप से यह अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण दोनों ही स्थितियों में समान रूप से आवश्यक है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल प्रसव से जुड़ी शारीरिक जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव और उसके बेहतर विकास को सुनिश्चित करना भी है. ऐसे में बच्चा गोद लेने वाली माताओं को इस अधिकार से वंचित करना अनुचित और भेदभावपूर्ण था.
कानूनी प्रावधान पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 60(4) में मौजूद उस प्रावधान को निरस्त कर दिया, जिसमें केवल तीन महीने तक की आयु के बच्चे को गोद लेने पर ही 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने की बात कही गई थी. कोर्ट ने माना कि यह प्रावधान अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन करता है और बड़ी उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली महिलाओं के साथ अन्याय करता है. वहीं अब अपने फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने पर विचार करने को कहा है. अदालत ने कहा कि बच्चे के पालन-पोषण में पिता की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए इस दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए.
रिपोर्टर: संजय शर्मा
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