Shahjahanpur Juta maar holi
Shahjahanpur Juta maar holi
होली रंगों और मस्ती का त्योहार है, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में यह पर्व एक अनोखे अंदाज में मनाया जाता है. यहां की ‘जूते मार होली’ पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती है. इस परंपरा में एक व्यक्ति को ‘लाट साहब’ बनाकर भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है और फिर पूरे शहर में जुलूस निकालकर उसे जूते और झाड़ू से प्रतीकात्मक रूप से पीटा जाता है. यह परंपरा अंग्रेजों के खिलाफ लोगों के गुस्से की ऐतिहासिक अभिव्यक्ति मानी जाती है, जो आज भी पूरे उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था के साथ निभाई जाती है.
18 जुलूस, दो सबसे खास
शाहजहांपुर में होली के अवसर पर कुल 18 पारंपरिक जुलूस निकाले जाते हैं. इनमें दो जुलूस सबसे प्रमुख होते हैं- बड़े लाट साहब और छोटे लाट साहब का जुलूस. इन जुलूसों में एक व्यक्ति को अंग्रेज अधिकारी का प्रतीक बनाकर भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है. इसके बाद लोग उस पर जूते फेंकते हैं और झाड़ू से मारते हुए पूरे शहर में घुमाते हैं. इस दौरान भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं और माहौल पूरी तरह होली के जोश और हुड़दंग से भरा रहता है.
92 मस्जिदें और मजारें तिरपाल से ढकी जाती हैं
सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन विशेष तैयारी करता है. जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली 92 मस्जिदों और मजारों को होली से करीब 8 दिन पहले ही तिरपाल से ढक दिया जाता है, ताकि उन पर रंग न पड़े और किसी तरह का विवाद न हो. पहले कुछ बार रंग पड़ने से तनाव की स्थिति बनी थी, जिसके बाद यह व्यवस्था शुरू की गई. मस्जिदों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया जाता है.
ड्रोन और बॉडी कैमरे से निगरानी
इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी और पुलिसकर्मी बॉडी कैमरा लगाकर जुलूस के साथ चलेंगे, जिससे पूरी गतिविधि की लाइव रिकॉर्डिंग हो सके. साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मार्ग पर तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.
शांति के लिए पहले से होती है बैठक
पुलिस और प्रशासन हर थाना स्तर पर पीस मीटिंग आयोजित करते हैं. आपसी सहमति और सहयोग से ही मस्जिदों को ढकने और जुलूस के मार्ग तय करने की प्रक्रिया पूरी होती है. कोतवाली, सदर बाजार और रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाती है. दशकों पुरानी यह जूते मार होली सिर्फ अनोखी परंपरा ही नहीं, बल्कि इतिहास की याद और सामाजिक समन्वय का संदेश भी देती है. रंग, जोश और सख्त सुरक्षा के बीच शाहजहांपुर की यह होली हर साल लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बन जाती है.
रिपोर्टर: विनय पांडे
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