Sharda Sinha 5 Evergreen Chhath songs
Sharda Sinha 5 Evergreen Chhath songs
सोचिए, आप अपने पूरे परिवार के साथ बैठे हैं और अचानक कानों में एक धुन सुनाई देती है... 'कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए.' इस एक गीत के बजते ही मन में छठ महापर्व की तस्वीर उभरने लगती है. घर में होती तैयारियां, प्रसाद की खुशबू, सूप में सजे फल और घाट की रौनक, सब कुछ आंखों के सामने आने लगता है. अब जरा सोचिए, छठ के चार दिनों में जब शारदा सिन्हा के गीत गूंजते होंगे, तो माहौल कितना अलौकिक हो जाता होगा.
आज कई बिहारी और बॉलीवुड के दिग्गज गायक छठ के गीत गा चुके हैं, लेकिन बिहार में छठ और शारदा सिन्हा की आवाज का रिश्ता आज भी खास है. उनके गीतों में सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि लोकपरंपरा, परिवार की यादें और छठी मैया के प्रति लोगों की आस्था भी सुनाई देती है. यही वजह है कि साल बदलते हैं, पीढ़ियां बदलती हैं, लेकिन उनके गाने छठ के आते ही फिर से हर घर और घाट पर सुनाई देते हैं. आइए, जानते हैं उनके ऐसे ही पांच सदाबहार छठ गीतों के बारे में.
1. कांच ही बांस के बहंगिया
शारदा सिन्हा के सबसे चर्चित छठ गीतों में इसका नाम जरूर आता है. इस गीत में छठ की तैयारियों और पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की झलक मिलती है. बांस की बहंगी और उसमें रखे पूजा के सामान का जिक्र सुनते ही छठ की पुरानी तस्वीरें याद आने लगती हैं. इसकी धुन में ऐसी मिठास है कि गीत शुरू होते ही घर का माहौल छठमय हो जाता है.
2. केलवा के पात पर
'केलवा के पात पर उगेलन सुरुजमल झांके झुके' छठ के उन गीतों में से है, जिन्हें सुनकर सूर्य उपासना का भाव मन में उतरने लगता है. केले के पत्ते और उगते सूर्य का दृश्य इस गीत को छठ की परंपरा से जोड़ता है. इसकी सादगी ही इसकी खूबसूरती है. घाट पर अर्घ्य की तैयारी हो या घर में पूजा का माहौल, यह गीत पर्व की यादों को और गहरा कर देता है.
3. पहिले-पहिले छठी मैया
यह गीत उन लोगों के लिए है, जिनके वहां पहली बार छठ का व्रत रखा जाता हैं. अब कई दूसरे राज्य के लोग भी इस लौक आस्था से जुड़ रहे हैं. पहली बार व्रत करने की उत्सुकता, मन में छठी मैया के प्रति श्रद्धा और पूजा को लेकर भावुकता, इन सबका एहसास इस गीत में मिलता है. शारदा सिन्हा की आवाज इसे और आत्मीय बना देती है. इसे सुनकर लगता है जैसे कोई अपने मन की बात छठी मैया तक पहुंचा रहा हो.
4. हो दीनानाथ
छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य देव की उपासना की जाती है. 'हो दीनानाथ' इसी आस्था को सुरों में पिरोया गया है. गीत सुनते समय अर्घ्य देने का दृश्य और सूर्य देव के सामने हाथ जोड़कर खड़े व्रतियों की तस्वीर मन में बनने लगती है. इसकी भावपूर्ण प्रस्तुति छठ के भक्तिमय माहौल को और गहरा कर देती है.
5. पटना के घाट पर
इस गीत में छठ के दौरान पटना के घाटों की रौनक और वहां उमड़ने वाली आस्था का जिक्र देखने को मिलता है. घाट पर पहुंचते व्रती, पूजा की तैयारियां और चारों ओर गूंजते छठ गीत, इसकी धुन सुनकर इन सबकी याद ताजा हो जाती है. जो इसे सुनता है बस सुनता ही रह जाता है.
शारदा सिन्हा के गीतों में बसता है पूरा बिहार. उनके गाने की खूबसूरती यही है कि उन्हें सुनने के लिए छठ का इंतजार नहीं करना पड़ता. मन उदास हो या खुश, बस उनके द्वारा गाए हुए गाने लगाकर सुनते जाओ. किसी को इनमें अपना बचपन याद आता है, तो किसी को परिवार के साथ घाट जाने की पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. शायद यही वजह है कि उनके गीत समय के साथ और जवान होते चले जा रहे हैं. आज भी उनकी आवाज सुनते ही लगता है कि छठ महापर्व का आगाज हो चुका है और उनके गीत उनकी तरह ही सदाबहार रहेंगे.
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