Supreme Court Demonetisation Case Verdict
Supreme Court Demonetisation Case Verdict
Supreme Court verdict on demonetisation: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा है. पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने केंद्र के 2016 के नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है. आपको बता दें कि कोर्ट में अलग-अलग पहलुओं पर नोटबंदी को चुनौती देने वाली कुल 58 याचिकाएं दायर की गई थीं.
इन याचिकाओं पर 12 अक्टूबर 2022 से सुनवाई शुरू हुई थी. जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यन और बीवी नागरत्ना की संवैधानिक बेंच ने विंटर ब्रेक से पहले 7 दिसंबर, 2022 को ही अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था. लेकिन आज यह फैसला सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही माना है.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की ओर से जस्टिस गवई ने लिखे फैसले में 2016 की नोटबंदी वैध करार देते हुए केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी में कोई कमी नहीं मिली. कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से पहले केंद्र और RBI के बीच पर्याप्त परामर्श हुआ. सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने सभी 58 याचिकाएं खारिज कीं. जस्टिस नागरत्ना ने इस फैसले से असहमति जताई.
सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बड़ी बातें
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई दोष नहीं है. फाइल की गई याचिकाओं में 9 मुद्दों को उठाया गया था जैसे कि सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया गलत थी. सरकार ने RBI की प्रक्रिया का उल्लंघन किया. नोटबंदी को रद्द कर दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने छह अहम मुद्दों पर ध्यान देते हुए अपना फैसला सुनाया.
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच पर्याप्त सलाह-मशविरा हुआ था. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नोटबंदी की प्रक्रिया में किसी तरह की कोई खामी नहीं हुई, इसलिए इसे रद्द नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 8 नवम्बर 2016 की अधिसूचना को अनुचित नहीं कहा जा सकता है और न ही यह आनुपातिकता के सिद्धांत से प्रभावित थी. इस मामले में संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से अपना फैसला सुनाया.
इस फैसले से सिर्फ जस्टिस बी वी नागरत्ना ने असहमति जताई. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने नोटबंदी लागू किए जाने की प्रक्रिया को लेकर असहमति जताई. उनका कहना था कि केंद्र सरकार को सभी सीरीज के सभी नोटों को जरूरत पड़ने पर डिमॉनेटाइज करने का अधिकार है. हालांकि, आरबीआई की सिफारिशों पर की गई नोटबंदी की तुलना में केंद्र के इशारे पर नोटबंदी कहीं अधिक गंभीर मुद्दा है. जिसका अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर प्रभाव पड़ता है. अधिसूचना के बजाय कानून के माध्यम से केंद्र की अपार शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है.
जस्टिस नागरत्ना के फैसले के मुख्य बिंदु:
क्या हुआ था 8 नवंबर 2016 को?
नोटबंदी को लागू हुए कई साल बीत चुके हैं. लेकिन उस दिन की यादें आज भी लोगों के जहन में ताजा हैं और लोग गुहार लगाते रहते हैं कि यह फैसला गलत था. आपको बता दें साल 2016 में 8 नवंबर को रात 8 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 रुपए के नोटों को आधी रात से बंद करने का एलान कर दिया.
पीएम के इस एलान के बाद रातोंरात देश में नोटबंदी लागू की गई और इस कारण हर तरफ अफरातफरी मच गई थी. लोग कई घंटों और दिनों तक बैंकों की लाइनों में लगकर अपने पुराने नोटों को बदलने के लिए परेशान रहे. विपक्ष ने नोटबंदी के मसले पर सरकार की जमकर आलोचना की. विपक्षी दलों का मानना है कि नोटबंदी का छोटे बिजनेस सेक्टर्स पर गहरा असर पड़ा.
(संजय शर्मा के इनपुट के साथ)