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Surat Cyber Crime Fraud: 410 करोड़ की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के मास्टरमाइंड गिरफ्तार, जानें कैसे बनाते थे लोगों को बेवकूफ

सूरत साइबर क्राइम सेल ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर लोगों से ठगी करते थे. जांच में 96 बैंक खातों से जुड़े देश के विभिन्न राज्यों के 338 मामलों में 410 करोड़ रुपए के फ्रॉड का खुलासा हुआ है.

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गुजरात के सूरत में साइबर क्राइम सेल ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार कर ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह शेयर ट्रेडिंग में कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को फर्जी एप्लिकेशन के जरिए अपने जाल में फंसाता था. इस मामले में शिकायतकर्ता के साथ 23.38 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई थी. पुलिस की जांच में करीब 410 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

फर्जी एप्लिकेशन बनाकर दिलाया विश्वास
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और जांच के आधार पर सूरत के सिविल चार रास्ता के पास से अब्दुल रहमान और मोहसिन खान नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े हुए थे, जो कथित तौर पर विदेश से संचालित किया जा रहा था. साइबर ठग लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने और कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देते थे. इसके लिए आरोपियों की ओर से फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाता था. निवेशकों को ऐप पर मुनाफा होने का भरोसा दिलाकर उनसे लगातार रकम जमा करवाई जाती थी. जब पीड़ित को अपने निवेश की रकम वापस निकालने की जरूरत पड़ती, तब उसे परेशानी का सामना करना पड़ता था और इस तरह ठगी को अंजाम दिया जाता था. इसी तरीके से एक शिकायतकर्ता से 23.38 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई. ठगी का शिकार हुए व्यक्ति ने इस मामले की शिकायत सूरत साइबर क्राइम सेल में की थी. शिकायत मिलने के बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की.


पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी अब्दुल रहमान लिथुआनिया में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है. वह दुबई से संचालित होने वाले एक कथित चीनी साइबर ठगी गिरोह के लिए काम करता था. इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग लोगों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी की जाती थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, आरोपियों की भूमिका क्या थी और ठगी से प्राप्त रकम किन-किन खातों के जरिए आगे भेजी जाती थी. ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए आरोपी कथित तौर पर फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे. म्यूल बैंक खाते ऐसे खाते होते हैं, जिनका उपयोग अवैध रूप से प्राप्त धन को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने या उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है. आरोपियों के नेटवर्क में इन खातों के जरिए ठगी की रकम प्राप्त की जाती थी. इसके बाद रकम को USDT नामक क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेश भेजने की व्यवस्था की जाती थी. इस प्रक्रिया का उद्देश्य कथित तौर पर पैसों के लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों की निगरानी से बचना था.

कई मोबाइल फोन सहित कई बैंक खाते जब्त
सूरत साइबर क्राइम सेल ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री जब्त की है. इसमें 16 मोबाइल फोन, 47 डेबिट कार्ड, 96 बैंक खातों से संबंधित विवरण और साइबर ठगी व वित्तीय लेन-देन की जांच में उपयोगी अन्य सामग्री शामिल हैं. पुलिस इन मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन खातों में कितनी रकम का लेन-देन हुआ और देश-विदेश में फैले इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है. मामले की जांच के दौरान जब राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों की पड़ताल की गई, तो पता चला कि आरोपियों से जुड़े इस नेटवर्क के संबंध में देश के विभिन्न राज्यों में कुल 338 शिकायतें दर्ज हैं. यह खुलासा इस बात की ओर संकेत करता है कि ठगी का नेटवर्क केवल सूरत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं. हालांकि, इन 338 शिकायतों में से प्रत्येक मामले में आरोपियों की भूमिका और ठगी की रकम की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस
सूरत साइबर क्राइम सेल की इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस का ध्यान गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों के नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन और विदेश भेजी गई रकम के स्रोत का पता लगाने पर है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्मों और बैंक खातों को खोलने में किन लोगों की मदद ली गई थी और इस पूरे नेटवर्क में आरोपियों की वास्तविक भूमिका क्या थी. इस मामले में तकनीकी निगरानी और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंचा गया. अब जब्त किए गए मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और बैंक खातों की जानकारी के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. सूरत साइबर क्राइम सेल की यह कार्रवाई ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पुलिस की आगे की जांच से इस गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है.

धोखाधड़ी की राशि 410 करोड़ रुपए
इस पूरे मामले को लेकर सूरत पुलिस के एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. करण राज वाघेला ने कहा कि सूरत शहर साइबर क्राइम टीम को डीसीपी विशाखा जैन के मार्गदर्शन में बड़ी सफलता मिली है. इस कार्रवाई में देशभर में दर्ज करीब 340 साइबर क्राइम की शिकायतों की जांच की गई, जो एनसीसीआरपी पोर्टल पर दर्ज थीं. इनमें कुल साइबर धोखाधड़ी की राशि 410 करोड़ रुपये थी. 410 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी अलग-अलग शिकायतों के दो मुख्य मास्टरमाइंड को पकड़ने में साइबर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है.

एक पीड़ित ने सूरत शहर साइबर क्राइम ब्रांच में डीसीपी विशाखा जैन से मुलाकात की थी. पीड़ित का कहना था कि 'मंसूरी डिजिटल ट्रेडिंग' नाम की कंपनी ने उससे संपर्क किया था. कंपनी ने शेयर बाजार में अपने जरिए निवेश करने पर ज्यादा मुनाफा दिलाने का लालच दिया. इसके बाद पीड़ित के मोबाइल में 'एसपी अल्ट्रा' और 'एचएसएल/आईआईएसएल सेक' नाम के दो एप्लिकेशन डाउनलोड करवाए गए. धीरे-धीरे करके पीड़ित से 24 लाख रुपये का निवेश करवा लिया गया. जब पैसे वापस करने की बात आई, तो आरोपियों ने साफ इनकार कर दिया और उसके खाते से पैसे निकाल लिए. यह शिकायत मिलने के बाद भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई. डीसीपी विशाखा जैन के मार्गदर्शन में पूरी साइबर क्राइम टीम जांच में जुट गई. बैंक खातों के विवरण, मोबाइल नंबर और एप्लिकेशनों के तकनीकी विश्लेषण के बाद सूरत से ही दो आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल हुई.

जानें कैसे ठगते थे आरोपी पैसे-
पकड़े गए आरोपियों के नाम अब्दुल रहमान और मोहसिन खान हैं. इनमें अब्दुल रहमान मुख्य मास्टरमाइंड है. वह यूरोपीय देश लिथुआनिया में सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष का छात्र है और पिछले तीन महीनों से भारत आया हुआ था. वह पिछले एक साल से दुबई से संचालित हो रहे एक अंतरराष्ट्रीय चीनी गिरोह के संपर्क में था. लिथुआनिया में रहने के दौरान भी वह टेलीग्राम के माध्यम से सीधे उनके संपर्क में था. तीन महीने पहले भारत आकर उसने चीनी गिरोह के साथ मिलकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया. उसने अपने दोस्त मोहसिन खान, जो कैटरिंग में मजदूरी का काम करता है, के नाम पर 'मंसूरी डिजिटल ट्रेडिंग' नाम से फर्जी कंपनी बनाई. इसके आधार पर उस कंपनी के कई करंट अकाउंट और करीब 12 सेविंग्स अकाउंट खुलवाए गए. पूरे देश के अलग-अलग लोगों को मंसूरी डिजिटल ट्रेडिंग के जरिए निवेश का झांसा देकर, उनके मोबाइल में एप्लिकेशन डाउनलोड करवाकर पैसे ऐंठे जाते थे.

मंसूरी डिजिटल ट्रेडिंग के केवल एक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते की बात करें, तो 10 महीनों के अंदर उसमें लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है. अकेले इसी खाते के खिलाफ देशभर में 18 अलग-अलग शिकायतें दर्ज हैं. मुख्य आरोपी अब्दुल रहमान के एक ही मोबाइल से कुल 96 बैंक खातों के विवरण, 30 डेबिट कार्डों की जानकारी, 13 अलग-अलग बैंक ऐप, दो USDT वॉलेट, जिनमें 20 लाख रुपये का लेन-देन हुआ, और 11 ईमेल आईडी के लॉगिन मिले हैं. उसके मोबाइल से मिले 96 बैंक खातों के आधार पर देश के 20 अलग-अलग राज्यों में कुल 338 शिकायतें एनसीसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हैं, जिनमें कुल धोखाधड़ी की राशि करीब 410 करोड़ रुपये है. सूरत शहर साइबर क्राइम ब्रांच के लिए यह एक बड़ी सफलता है, जिससे देशभर में फैले शेयर बाजार और ट्रेडिंग के नाम पर होने वाले इस बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को नियंत्रित करने में कामयाबी मिली है.
 

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