
Train Trial Successful
Train Trial Successful
अंग्रेजों के शासनकाल में 1906 में बने हावड़ा-दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्री ट्रेन चलाए जाने का ट्रायल सफल हुआ. कोडरमा स्टेशन पर यह ट्रेन 1 बजकर 58 पर पहुंची और महज 17 से 18 सेकंड में पूरे प्लेटफार्म को ट्रेन क्रॉस कर गई. स्पीड ट्रेन के ट्रायल को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे.
लोगों को रखा गया प्लेटफॉर्म से दूर
लगातार पूछताछ कार्यालय के द्वारा लोगों को प्लेटफार्म संख्या पर रेलवे ट्रैक से दूर रहने की सलाह दी गई. इसके अलावा आरपीएफ के जवान भी लगातार लोगों को रेलवे ट्रैक से दूर प्लेटफार्म पर बैठने और ट्रेन गुजरने के दौरान स्थिर रहने की सलाह देते रहे. ट्रेन के आगमन और प्रस्थान को लेकर रेलकर्मी भी प्लेटफार्म पर मुस्तैद रहे.

ट्रेन को लेकर लोग रहे उत्साहित
इस स्पीड ट्रेन के ट्रायल को लेकर आम लोगों में भी खासा उत्साह देखा गया. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग प्लेटफार्म और फुट ओवर ब्रिज पर इस हाई स्पीड ट्रेन का ट्रायल देखने के लिए मौजूद रहे.
स्पीड ट्रेन ट्रायल का परिचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से लेकर धनबाद के प्रधानघंटा स्टेशन तक किया गया. इस दौरान जगह-जगह सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. वहीं स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने भी 120 साल पुराने रेलवे ट्रैक पर स्पीड ट्रेन के परिचालन को ऐतिहासिक बना दिया.
अब दिल्ली दूर नहीं
1906 में हावड़ा-दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन का निर्माण किया गया था और उस समय कोयला इंजन के जरिए ट्रेनों का परिचालन किया जाता था. हावड़ा-दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन पर इस हाई स्पीड ट्रेन के सफल ट्रायल के बाद हावड़ा से दिल्ली तक का सफर में फिलहाल तकरीबन 17-18 घंटे लगते है, लेकिन इस ट्रायल के बाद जब हाई स्पीड ट्रेन चलने लगेगी तो इस सफर में महज 12 से 13 घंटे ही लगेंगे. आम लोगों ने स्पीड ट्रेन के ट्रायल को ऐतिहासिक बताते हुए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इससे आम लोगों का सफर और भी सुहावना हो जाएगा.
- बिस्वाजीत कुमार की रिपोर्ट