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Mukhyamantri Kanya Sumangla Yojana: बरेली में बेटियों के सपनों को पंख दे रही है यह योजना, जन्म से स्नातक तक मिलती है 25,000 रुपये की आर्थिक मदद

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना बरेली के परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है. इसके तहत जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 6 चरणों में 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इस योजना से राधिका और दीपशिखा जैसी बेटियों की शिक्षा बिना रुकावट जारी है.

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मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

आर्थिक तंगी की वजह से कई बार माता-पिता के लिए बच्चों की स्कूल फीस भरना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने बरेली के कई परिवारों को राहत देने का काम किया है. योजना के तहत छात्राओं के खातों में राशि पहुंचने से कुछ परिवारों को उनकी फीस जमा करने में मदद मिली है. इससे माता-पिता का हौसला बढ़ा है और बेटियों के आगे पढ़ने के सपनों को भी नई उम्मीद मिली है.

बरेली में इस योजना का लाभ 46 हजार से अधिक परिवारों तक पहुंचने की जानकारी दी गई है. वहीं, जिले में अब तक 4,60,212 कन्याओं को योजना का लाभ मिलने का आंकड़ा सामने आया है. इस योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है.

जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में मिलती है सहायता
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी. इसका उद्देश्य बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए परिवारों को आर्थिक सहयोग देना है. योजना के तहत पात्र बालिकाओं को कुल 25,000 रुपए तक की सहायता राशि छह चरणों में दी जाती है.

जन्म के बाद- 5,000 रुपए
एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण के बाद- 2,000 रुपए
कक्षा एक में प्रवेश पर- 3,000 रुपए
कक्षा छह में प्रवेश पर- 3,000 रुपए
कक्षा नौ में प्रवेश पर- 5,000 रुपए
स्नातक या दो वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश पर- 7,000 रुपए

इस आर्थिक मदद से परिवारों को बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में सहयोग मिलता है. योजना का मकसद यह है कि आर्थिक परेशानी के कारण उनकी शिक्षा बाधित न हो.

शिक्षक बनना चाहती है बरेली की राधिका
बरेली में कक्षा नौ में पढ़ने वाली राधिका शिक्षक बनना चाहती है. वह आगे बीएड की पढ़ाई भी करना चाहती है. राधिका ने बताया कि उसके माता-पिता लगातार उसका साथ दे रहे हैं, लेकिन कभी-कभी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. राधिका के मुताबिक, कक्षा छह और कक्षा नौ में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की राशि मिलने से उसे राहत मिली है. फिलहाल उसने इस पैसे को अपने खाते में सुरक्षित रखा है, ताकि शिक्षक बनने की पढ़ाई शुरू करने पर इसका इस्तेमाल कर सके. उसके माता-पिता भी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं. वे बेटी की पढ़ाई और उसकी खुशियों के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.

फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती है दीपशिखा
बरेली के थाना प्रेमनगर क्षेत्र में कक्षा नौ में पढ़ने वाली दीपशिखा खंडेलवाल फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती है. हालांकि, महंगी फीस को देखते हुए उसे कभी-कभी चिंता होती है. दीपशिखा ने बताया कि उसके माता-पिता ने उसे समझाया है कि फीस का इंतजाम हो जाएगा और उसे अपने सपने पूरे करने पर ध्यान देना चाहिए. दीपशिखा के माता-पिता ने कक्षा छह और कक्षा नौ में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का फॉर्म भरवाया था. इसके बाद उसके खाते में राशि आई, जिससे परिवार को आर्थिक मदद मिली. योजना के पैसे से बच्चों की फीस जमा करने में भी सहायता मिली.

दीपशिखा ने यह भी बताया कि उसकी छोटी बहन को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. वह फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाना चाहती है. उसके पिता लगातार मेहनत कर रहे हैं और मां समेत परिवार के अन्य सदस्य भी उसे आगे बढ़ने के लिए सहयोग दे रहे हैं.

क्या बोलीं जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा?
जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से परिवारों को आर्थिक सहायता मिलती है. जब बच्चियों के खातों में राशि पहुंचती है, तो परिवारों को उम्मीद मिलती है. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बच्चियों के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के लिए कुल 25,000 रुपए तक की सहायता दी जाती है. टीकाकरण से लेकर कक्षा एक, कक्षा छह, कक्षा नौ और स्नातक में प्रवेश तक अलग-अलग चरणों में बच्चियों के खातों में निर्धारित राशि भेजी जाती है. इस सहायता का उद्देश्य बेटियों की शिक्षा को बिना रुकावट जारी रखने में मदद करना है, ताकि आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई बाधित न हो और वे अपने भविष्य के सपनों को पूरा कर सकें.
 

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