Bashir Badr (Photo: Facebook/Dr. Bashir Badr)
Bashir Badr (Photo: Facebook/Dr. Bashir Badr)
उर्दू गजल के शहंशाह डॉ. बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. भोपाल में डॉ. बशीर बद्र का निधन हो गया. मशहूर शायर लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे थे. वो लोगों को पहचान भी नहीं पा रहे थे. काफी समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी. डॉ. बशीर बद्र की शायरियां काफी मशहूर हैं.
10 मशहूर शेर-
चलिए आपको मशहूर शायर बशीर बद्र की 10 बेहतरीन शेर के बारे में बताते हैं.
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिन्दा न हों
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा...'
शौहरत की बुलन्दी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पर बैठे हो, वो टूट भी सकती है
मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा
परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए...'
'सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है
बा-वजू होके भी छूते हुए डर लगता है...'
'महक रही है जमीं चांदनी के फूलों से
खुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है...'
उसे किसी की मुहब्बत का एतिबार नहीं
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है
मुहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
इतनी मिलती है मेरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझको मेरा महबूब समझते होंगे
AMU से पढ़ाई, फिर प्रोफेसर बने डॉ. बशीर-
डॉ. बशीर बद्र का जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था. उनका जन्म 15 फरवरी 1936 को हुआ था. हालांकि बाद में वो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जाकर बस गए. बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी. बाद में वो एएमयू में उर्दू के प्रोफेसर भी रहे. उन्होंने उर्दू गजल को नई पहचान दी. उनकी शायरी में प्रेम, तनहाई और इंसानी एहसास बेहद सरल भाषा में दिखाई देते थे.
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