वंदे भारत को मिलेगी नई रफ्तार
वंदे भारत को मिलेगी नई रफ्तार
देश में जल्द ही ट्रेनों की रफ्तार और तेज देखने को मिल सकती है. कपूरथाला रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) द्वारा निर्मित पहली वंदे भारत ट्रेनसेट का स्पीड ट्रायल कोटा रेलवे मंडल के कोटा-चौमहला-कोटा रेलखंड पर सफलतापूर्वक किया गया. इस दौरान वंदे भारत ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की. यह ट्रायल भारतीय रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के परीक्षण निदेशालय के निदेशक परीक्षण धीरेन्द्र कुलश्रेष्ठ की देखरेख में पूरा किया गया. ट्रायल को रेलवे की तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुसार अंजाम दिया गया.
पहले 160 किमी की रफ्तार पर हुआ था ट्रायल
कोटा रेलवे मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि इससे पहले इसी ट्रेनसेट का 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी सफल परीक्षण किया जा चुका है. अब परीक्षण कार्यक्रम को बढ़ाकर 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक किया गया है. इसे स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
अत्याधुनिक तकनीक से लैस है ट्रेन
अधिकारियों के अनुसार यह वंदे भारत ट्रेनसेट अत्याधुनिक ट्रेन कंट्रोल और प्रोपल्शन प्रणाली से सुसज्जित है. यह तकनीक एल्सटॉम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई गई है. हाई स्पीड पर भी ट्रेन सुरक्षित और संतुलित तरीके से चले, इसके लिए कई तकनीकी परीक्षण किए गए. इस स्पीड ट्रायल के दौरान ट्रैक्शन परफॉर्मेंस का मूल्यांकन किया गया. इसके साथ ही ब्रेक प्रणाली की जांच और सिस्टम इंटीग्रेशन परीक्षण भी किए गए. इन सभी परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ट्रेन अधिक रफ्तार पर भी सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से संचालन कर सके.
चालक दल और तकनीकी टीम ने निभाई अहम भूमिका
वंदे भारत ट्रेन के ट्रायल के दौरान चालक दल में लोको पायलट मनोज कुमार मीणा, सहायक लोको पायलट छीतर सिंह, मुख्य लोको निरीक्षक नेतराम मीणा और यातायात निरीक्षक सुशील जेठवानी शामिल रहे. इसके अलावा कोटा मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे के परिचालन स्टाफ के साथ एल्सटॉम और वेबटेक की तकनीकी टीमों ने भी परीक्षण में सक्रिय सहयोग दिया.
(रिपोर्ट- हिमांशु शर्मा)
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