Varanasi News
Varanasi News
कभी-कभी खूबसूरती भी मुसीबत बन जाती है. ऐसा ही कुछ हाल वाराणसी की गलियों का भी है. दुनिया भर से लोग न केवल इन गलियों में घूमने, बल्कि इसको एक्सप्लोर करने और इनमें मौजूद खानपान का भी लुत्फ लेने आते है. ज्यादातर वे इन गलियों में खो जाते हैं. ऐसे में मौजूदा समय में मौजूद मोबाइल एप भी काम नहीं आते है. इसी समस्या को दूर करने के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ एक प्राइवेट कंपनी ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पैदल यात्री नेविगेशन प्लेटफॉर्म है, जो पर्यटकों को छिपी हुई गलियों को खोजने, भीड़भाड़ से बचने और सुरक्षित यात्रा का अनुभव करने में मदद करता है.
गलियों में नहीं भटकेंगे मुसाफिर-
वाराणसी पर्यटन या भी दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए खुशी की खबर है कि अब वे वाराणसी की गलियों में नहीं भटकेंगे, क्योंकि वाराणसी स्मार्ट सिटी के सहयोग से एक निजी कंपनी ने AI आधारित पैदल यात्री नेविगेशन प्लेटफॉर्म 'बेहतर वे' मोबाइल
ऐप तैयार किया है.
8 भाषाओं में तैयार किया गया है ऐप-
कुल 8 भाषाओं में तैयार ये ऐप खासकर बनारस की गलियों के मुताबिक डिजाइन की गई है और पैदल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए गलियों को खासकर दर्शाया गया है. उस गंतव्य तक पहुंचने के दौरान रास्ते में आने वाले प्रमुख स्थानों, खानपान, वस्त्रों और महत्व के बारे में भी ऐप जानकारी उपलब्ध कराता है.
कहां भीड़ हैं, कहां खाली, ये भी बताएगा ऐप-
और तो और किन रास्तों में भीड़ है या फिर भीड़ नहीं है, इसका भी पता बेहतर ऐप से लगाया जा सकता है. खास बातचीत में कंपनी के CEO अभिजीत विश्वास ने बताया कि मौजूदा वक्त के मोबाइल ऐप सिर्फ एक ही रास्ता बताते है. लेकिन बेहतर ऐप कई रास्तों से आपको आपके गंतव्य तक पहुंचाएगा. गंतव्य तक पहुंचने के लिए आप ऑडियो नोट का भी सहारा ले सकते हैं. रास्ते में आने वाली तमाम खास जगहों के बारे में भी उनका AI इनेबल्ड ऐप बताता है. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय के एप पैदल यात्रियों के लिए बना ही नहीं है, लेकिन उनका एप पैदल यात्रियों के मुताबिक ही है. उन्होंने आगे बताया कि वे वाराणसी स्मार्ट सिटी के कैमरों की मदद से भी लोगों को भीड़ को लेकर अलर्ट करते रहते हैय उन्होंने आगे बताया कि वे आगे इस ऐप को उज्जैन और नासिक में भी लांच करने वाले है.
टोयोटा मोबेलिटी फाउंडेशन ऐप का विकास-
इस बेहतर ऐप के बारे में वाराणसी नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि कई बार गूगल ऐप फेल हो जाता है, क्योंकि काशी गलियों का शहर है. इसके अलावा सड़क से भीड़ को हम गलियों तक ले जा सकें. इसके लिए टोयोटा मोबेलिटी फाउंडेशन की मदद से इस एप को विकसित किया गया है. इस ऐप को हम काशी दर्शन सेवा और स्मार्ट काशी ऐप से भी जोड़ेंगे. ये ऐप भीड़ को भी दर्शाता रहता है, ताकि लोगों को इसका फायदा मिल सके और ये मल्टी लैंग्वेज में है.
ये भी पढ़ें: