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Heat Dome: क्या होता है हीट डोम? जिसके गिरफ्त में है आधा भारत, कई राज्य गर्मी से उबल रहे भट्टी की तरह

What is a Heat Dome: देश के कई राज्यों में गर्मी प्रचंड रूप धारण कर चुकी है. तापमान बढ़ने के वैसे तो कई कारण है लेकिन एक कारण हीट डोम भी है. आइए जानते हैं आखिर क्या होता है हीट डोम, जिसके अंदर फंसी गर्म हवा को सूरज की किरणें और ज्यादा तपाती रहती हैं?

Heat Dome Heat Dome

आसमान से इस समय सूर्य देव आग बरसा रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर से लेकर यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश तक प्रचंड गर्मी कहर बरपा रही है. मई महीने में ही कई राज्यों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक कई राज्यों में अभी प्रचंड गर्मी और लू से राहत मिलने की संभावना नहीं है. आपको मालूम हो कि तापमान बढ़ने के वैसे तो कई कारण है लेकिन एक कारण हीट डोम (Heat Dome) भी है. आइए जानते हैं आखिर क्या होता है हीट डोम और यह कैसे तापमान को बढ़ाता है?

क्या है हीट डोम?
हीट डोम गुंबद जैसा दिखता है. यह एक ढक्कन की तरह काम करता है. आपको मालूम हो कि सामान्य दिनों में गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हो जाती है लेकिन हीट डोम के दौरान वायुमंडल में बना उच्च दबाव इस गर्म हवा को वापस नीचे की ओर धकेलता है. जब हवा ऊपर से नीचे की ओर दबती है तो वह कंप्रेस होकर और भी ज्यादा गर्म हो जाती है. हीट डोम के अंदर फंसी गर्म हवा को सूरज की किरणें और ज्यादा तपाती रहती हैं. हीट डोम ठंडी हवाओं को भी गर्म बना देता है. इससे भीषण गर्मी पड़ती है. तापमान लगातार बढ़ता है और रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलती है.

साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है हीट डोम को  
आपको मालूम हो कि समुद्र के ऊपर गर्म हवा का बनना और उच्च दबाव द्वारा उसे नीचे धकेलना हीट डोम की प्रक्रिया को और ज्यादा हिंसक बना देता है. हीट डोम को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है. हीट डोम में गर्मी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है. गर्मी बढ़ने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, किडनी फेलियर और हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं. हीट डोम के दौरान बच्चों और बुजुर्गों की विशेष ध्यान देने की जरूत होती है. हीट डोम के दौरान प्रंचड गर्मी पड़ती है. यह बादलों को भी बनने नहीं देता है, इससे फसलें सूखती है और जल सकंट बढ़ता है.

हीट डोम और हीटवेव में है अंतर 
आपको मालूम हो कि हीट डोम और हीटवेव एक नहीं है, इसमें अंतर होता है. हीटवेव कुछ दिनों की मौसमी घटना है, जो हवाओं के रुख के साथ बदल सकती है. उधर, हीट डोम एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता है और यह अपने अंदर लंबे समय तक गर्मी को कैद करके रखता है. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार उच्च दबाव वाली स्थितियां एक ही जगह स्थिर हो जाती हैं तो वह हीट डोम का रूप ले लेती हैं. 

हीट डोम कब से कब तक बनता है और यह कैसे होता है खत्म 
आपको मालूम हो कि हमारे देश में हीट डोम की सटीक गिनती सालाना नहीं होती क्योंकि यह मौसम विभाग की ओर से अलग से ट्रैक नहीं किया जाता. इसे हीट वेव्स के रूप में मॉनिटर किया जाता है. हमारे देश में मानसून आने से पहले यानी मार्च से जून के बीच हीट डोम बनने की प्रक्रिया पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है. अब सवाल यह है कि हीट डोम कैसे खत्म होता है, तो जवाब है उच्च दबाव का क्षेत्र कमजोर होने या हटने पर हीट डोम टूटता है. इससे हीट डोम के अंदर हवाएं चलने लगती हैं और गर्म हवा बाहर निकल जाती है. 

क्या होता है हीट डोम में?
1. सतह की गर्म हवा ऊपर जाती है.
2. ऊपरी उच्च दबाव क्षेत्र में उतरती हवा घड़ी की दिशा में घूमती है.
3. गर्म हवा को जमीन की तरफ धकेला जाता है.
4. जैसे ही हवा नीचे बैठती है, वह संपीडन से गर्म होती है.
5. मिट्टी और पौधे गर्म होते हैं. अपनी नमी खोते हैं.
6. मानसून की नमी व बादलों को पश्चिमी तट की ओर धकेल देते हैं.
7. उच्च दबाव वाली ऊपरी स्तर की हवाएं हीट डोम के चारों ओर बादलों को मोड़ देती हैं.
8. हीट डोम के दौरान आसमान पूरी तरह से साफ रहता है और यह सिस्टम बादलों को बनने ही नहीं देता.