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Super El Nino: क्या है सुपर अल-नीनो... इंडिया में बारिश पर असर, पड़ेगी भयानक गर्मी... जानें भारत में कब आएगा मॉनसून?

भारत सहित कई देशो में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. दुनियाभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है. मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल सुपर अल-नीनो की चेतावनी जारी की है. आइए जानते हैं आखिर क्या है सुपर अल-नीनो, इसका भारत के मौसम पर क्या पड़ेगा असर और भारत में कब आएगा मॉनसून? सुपर अल-नीनो के कारण किसी देश में भारी सूखा पड़ता है तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आती है.

Super El Nino Super El Nino

भारत सहित कई देशो में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. दुनियाभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है. भारत में कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है. उधर, मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल सुपर अल-नीनो की चेतावनी जारी की है. आइए जानते हैं आखिर क्या है सुपर अल-नीनो, इसका भारत के मौसम पर क्या पड़ेगा असर और भारत में कब आएगा मॉनसून? सुपर अल-नीनो के कारण किसी देश में भारी सूखा पड़ता है तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आती है. सुपर अल नीनो के कारण भारत में मॉनसून की बारिश सामान्य से काफी कम हो सकती है. 

क्या है अल नीनो?
आपको मालूम हो कि अल नीनो एक नेचुरल क्लाइमेट पैटर्न है. अल नीनो हर 2 से 7 साल के बीच घटित होता है. यह मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने से जुड़ा है. अल नीनो का मतलब होता है छोटा बच्चा. इसका नाम दक्षिण अमेरिकी मछुआरों ने 1600 के दशक में रखा था.

सामान्य परिस्थितियों में समंदर में हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं, यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया की ओर. ये हवाएं गर्म पानी को भी एशिया की ओर ले जाती हैं लेकिन जब अल नीनो आता है, तो ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी वापस अमेरिका की तरफ लौट आता है. अल नीनो के इस चक्र के दौरान प्रशांत महासागर में जमा होने वाला गर्म पानी फैल जाता है और पृथ्वी के औसत सतही तापमान को बढ़ा देता है. यह गर्मी अंत में वायुमंडल में निकल जाती है, जिससे हमारे पृथ्वी का तापमान महीनों तक बढ़ जाता है. आपको मालूम ला नीना में समंदर का पानी ठंडा हो जाता है लेकिन अल नीनो में यह असामान्य रूप से गर्म होने लगता है. 

क्या है सुपर अल-नीनो
मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान जब सामान्य से 0.5 डिग्री बढ़ता है तो उसे अल नीनो कहते हैं लेकिन जब यह तापमान 2°C (3.6°F) या उससे ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे सुपर अल नीनो कहा जाता है. हालांकि वैज्ञानिक स्वयं इस शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं. सुपर अल नीनो का मौसम पर बुरा प्रभाव पड़ता है. यह बारिश के पैटर्न को बदल देता है. सुपर अल नीनो की घटना हर कुछ सालों में दोहराई जाती है और एशिया से लेकर अमेरिका तक के मौसम को बदल कर रख देती है. भारत में मॉनसून के कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है.

वैज्ञानिक साइंटिस्ट्स इसे ओशनिक नीनो इंडेक्स के जरिए ट्रैक करते हैं. मौजूदा हालात से पता चलता है कि ट्रोपिकल पेसेफिक इलाके में समुद्र की सतह का तापमान इस सदी में किसी भी अन्य समय की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. ताजा डेटा इशारा कर रहा है कि इस बार तापमान में बढ़ोतरी 3 डिग्री सेल्सियस तक जा सकती है. यदि ऐसा हुआ तो यह अब तक की सबसे बड़ी क्लाइमेट डिजास्टर साबित हो सकती है. सुपर अल नीनो पूरी दुनिया के मौसम को दो हिस्सों में बांट देता है. कहीं भारी सूखा तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आती है. इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भयानक सूखा पड़ता है. जहां एक तरफ सूखा होता है तो वहीं वहीं पेरू, इक्वाडोर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश और विनाशकारी बाढ़ आती है. 

सुपर अल-नीनो का भारत के मौसम पर क्या पड़ेगा प्रभाव
वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली सुपर अल-नीनो आकार ले रहा है, जो 1877 के बाद की सबसे विनाशकारी मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है. इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि अल-नीनो भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को भी प्रभावित करने वाला है. मौसम एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस साल सुपर अल-नीनो के प्रभाव से अगस्त और सितंबर के महीनों में बारिश काफी कम हो जाएगी, जिससे देश के कई हिस्से सूखे की चपेट में आ सकते हैं.

सबसे ज्यादा मार देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों पर पड़ने वाली है. यहां भीषण गर्मी पड़ेगी. सूखे की स्थिति की वजह से फसलों को नुकसान होगा. आपको मालूम हो कि हमारे देश के 60% किसान अपनी खरीफ की फसल के लिए पूरी तरह से मॉनसूनी बारिश पर निर्भर हैं. कम बारिश होने से कृषि क्षेत्र को भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है.  भारत में जून से सितंबर के बीच औसतन 870 एमएम बारिश होती है लेकिन आईएमडी के अनुसार साल 2026 में सुपर अल-नीनो के कारण यह घट सकती है. 

भारत में कब आएगा मॉनसून
आपको मालूम हो कि मॉनसून आने के पहले देश के अधिकांश हिस्सों में प्री मॉनसून बारिश की शुरुआत हो गई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल तय समय से पहले मॉनसून आने की संभावना व्यक्त की थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. मौसम विभाग ने कहा था कि आमतौर पर 1 जून को केरल आने वाला मॉनसून इस बार 26 मई तक केरल आ सकता है. हालांकि ऐसा नहीं हुआ है. अब 1 जून तक केरल में मॉनसून आने की संभावना है.

मॉनसून कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में  5 जून तक दस्तक दे सकता है. महाराष्ट्र और तेलंगाना में मॉनसून 10 जून तक और मध्य प्रदेश में 15 जून तक पहुंच सकता है. छत्तीसगढ़ में मॉनसून 15 जून तक और गुजरात में 20 से 25 जून के बीच मॉनसून दस्तक देगा. यूपी में सबसे पहले 20 जून तक मॉनसून आ सकता है. उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में 25 जून तक मॉनसून दस्तक दे सकता है. बिहार में 15 जून तक मॉनसून आ सकता है. राजस्थान में मॉनसून 30 जून और पांच जुलाई तक पहुंच सकता है. जम्मू कश्मीर में 25 जून तक मॉनसून की बारिश हो सकती है. पंजाब और उत्तराखंड में 30 जून तक मॉनसून के पहुंचने की उम्मीद है. दिल्ली में 25 जून तक मॉनसून आने की संभावना है.