Rainfall in the plains is decreasing due to the northward shift of the monsoon trough
Rainfall in the plains is decreasing due to the northward shift of the monsoon trough
इस साल भले ही मॉनसून ने दस्तक देरी से दिया था लेकिन जुलाई माह के शुरुआत में कई राज्यों में जोरदार बारिश हुई थी. दिल्ली-एनसीआर लेकर यूपी-बिहार तक में मूसलाधार बारिश हुई थी लेकिन लेकिन अब दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी बिहार और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मॉनसून अचानक कमजोर पड़ गया है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. मौसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो बारिश नहीं होने की मुख्य वजह ब्रेक मॉनसून (Break Monsoon) की स्थिति और मॉनसून ट्रफ (Monsoon Trough) का उत्तर की ओर खिसकना है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या होता है मॉनसून ट्रफ और यह भारत में बारिश के लिए कैसे होती है जिम्मेदार?
क्या है मॉनसून ट्रफ
मॉनसून रेखा को ही मॉनसून ट्रफ कहा जाता है. मॉनसून ट्रफ वातावरण में कम दबाव की एक लंबी पट्टी होती है, जो हमारे देश में बारिश लाने वाली नम हवाओं के लिए एक हाईवे की तरह काम करती है. आपको मालूम हो कि मौसम विभाग दो तरह के ट्रफ पर नजर रखता है, जो भारतीय मौसम को प्रभावित करते हैं, एक मॉनसून ट्रफ और दूसरा ऑफशोर ट्रफ. मॉनसून ट्रफ जब किसी क्षेत्र के ऊपर सक्रिय रहती है तो वहां बादल बनते हैं और अच्छी बारिश होती है.
मॉनसून रेखा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं को अपनी ओर खींचती है. यह लाइन स्थिर नहीं रहती बल्कि मॉनसून के मौसम में उत्तर और दक्षिण की ओर घूमती रहती है. इसके उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकने से ही हमारे देश में मॉनसूनी बारिश की गतिविधि तय होती है. मॉनसून रेखा एक चुंबक की तरह काम करती है. दोनों तरफ से (समुद्र की ओर से) आने वाली मॉनसूनी हवाएं इसी रेखा के पास आकर मिलती हैं और ऊपर उठकर बादलों का निर्माण करती हैं. मॉनसून रेखा जब उत्तर या हिमालय की ओर खिसक जाती है तो मैदानी इलाकों में बारिश कम हो जाती है. हिमालय के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होती है. मॉनसून रेखा जब दक्षिण की ओर या मध्य भारत की ओर आती है तो पूरे देश में खूब बारिश होती है. मौसम विभाग मॉनसून के आगमन और इसके उतार-चढ़ाव को समझने के लिए इसी मॉनसून रेखा की स्थिति पर नजर रखता है.
क्या होता है मॉनसून ब्रेक
मॉनसून ब्रेक का मतलब है कि कुछ दिनों के लिए मॉनसूनी बारिश का कमजोर पड़ जाना. आपको मालूम हो कि हर साल मॉनसून के समय एक समय ऐसा आता है जब बारिश अचानक कम हो जाती है. यह मौसम का एक सामान्य हिस्सा है. इसे ही ब्रेक इन मॉनसून कहा जाता है. मॉनसून ब्रेक दौरान बादल पूरी तरह आसमान से गायब नहीं होते बल्कि उनका रुख बदल जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि देश के कुछ हिस्सों में बारिश कम हो जाती है, जबकि दूसरे इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होने लगती है. मॉनसून ब्रेक का मतलब मॉनसून जाता नहीं है, इसकी सिर्फ कुछ दिनों के लिए सक्रियता कम हो जाती है. आपको मालूम हो कि मॉनसून ब्रेक का मुख्य कारण मॉनसून ट्रफ होता है. इसी के चलते बारिश नहीं होती है.
मॉनसून के लंबे ब्रेक पर क्या अलनीनो का असर
मॉनसून में ब्रेक आना मौसम की एक सामान्य घटना है. ब्रेक मॉनसून की स्थिति आमतौर पर जुलाई और अगस्त के दौरान एक या दो बार होती है. मॉनसून ब्रेक आमतौर पर 4 से 6 दिनों तक रहता है. इस बार 11 से 12 दिनों के असामान्य रूप से लंबा ब्रेक दिख रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हम इसे अलनीनो के असर से जोड़कर देख सकते हैं, जो अब हावी होने लगा है.
कब होगी दिल्ली-यूपी में बारिश
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक मॉनसून ट्रफ फिलहाल उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र और हिमालय की तलहटी की ओर खिसक गई है. इसी के चलते यूपी के कई जिलों और दिल्ली-एनसीआर में बारिश लगभग थम गई है. मौसम विज्ञान विभाग और निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के मुताबिक मॉनसून ट्रफ धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ेगा और सूखे इलाकों में फिर से बारिश शुरू होगी. दिल्ली से लेकर यूपी तक में फिर बारिश तब होगी जब 20 जुलाई के बाद मॉनसून ट्रफ की यह धुरी दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करेगी. इसके बाद दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिर से बारिश शुरू होगी.