झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है. चुनाव आयोग ने सीएम सोरेन की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राज्यपाल रमेश बैस को भेजी है. बीजेपी ने सोरेन पर खुद को एक खनन पट्टा जारी करके चुनावी कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. बीजेपी ने हेमंत सोरेन को विधायक के तौर पर सदस्यता रद्द रकने की मांग की थी. राज्यपाल ने इस मामले को चुनाव आयोग को भेजा था. अब चुनाव आयोग ने अपनी राय बंद लिफाफे में राज्यपाल को भेज दी है.
क्या है 'लाभ का पद'-
लाभ का पद का मतलब उस पद से होता है जिस पर रहते हुए कोई शख्स सरकार की ओर से किसी भी तरह की सुविधा लेने का अधिकारी हो. अगर कोई व्यक्ति इस पद का लाभ उठा रहा है तो वो सदन का सदस्य नहीं रह सकता है.
विधानसभा में 'लाभ का पद'-
विधायकों के लिए संविधान में लाभ के पद का जिक्र किया है. जिसपर रहते हुए कोई व्यक्ति विधानसभा का सदस्य नहीं हर सकता है. संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ए) में इसका जिक्र है. इसके मुताबिक अगर कोई विधायक किसी लाभ के पद पर पाया जाता है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है.
अगर राज्य सरकार कोई कानून बनाकर किसी पद को 'लाभ के पद' के दायरे से बाहर रखती है. तो विधायकों की सदस्यता अयोग्य नहीं ठहराई जा सकती है.
संसद में 'लाभ का पद'-
संविधान में राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों के लिए भी लाभ के पद का जिक्र है. संविधान के अनुष्छेद 102 (1)(ए) में लाभ के पद के बारे में बताया गया. जिसके मुताबिक संसद के किसी सदन का सदस्य होने के लिए जरूरी है कि वह किसी भी तरह के पद पर ना हो. इसमें कहा गया है कि सांसद या विधायक ऐसे किसी भी पद पर नहीं हो सकता, जहां अलग से सैलरी, अलाउंस या दूसरे फायदे मिलते हों. हालांकि संविधान में लाभ के पद की व्याख्या नहीं की गई है.
अगर संसद में किसी सदस्य के लाभ के पद का मामले सामने आता है तो उसमें राष्ट्रपति का फैसला अंतिम होगा. अनुष्छेद 103 के मुताबिक इस संबंध में राष्ट्रपति चुनाव आयोग से सलाह ले सकते हैं.
लाभ के पद को लेकर बनाया गया कानून-
16 मई 2006 को यूपीए सरकार ने लोकसभा में लाभ के पद की व्याख्या के लिए एक बिल पास किया था. इसके बाद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद समेत 45 पदों को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखा गया था. हालांकि अब तक लाभ के पद की परिभाषा स्पष्ट नहीं है.
सोनिया से लेकर जया तक की जा चुकी है सदस्यता-
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और जया बच्चन को लाभ के पद की वजह से सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था. साल 2006 में यूपीए सरकार में सोनिया गांधी के 'लाभ का पद' का मामला सामने आया था. उस वक्त सोनिया गांधी रायबरेली से सांसद थीं. इसके साथ ही वो मनमोहन सिंह की सरकार में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष भी थीं. लाभ का पद होने की वजह से सोनिया गांधी को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि सोनिया गांधी दोबारा रायबरेली से चुनकर संसद पहुंची थीं.
साल 2006 में ही राज्यसभा सांसद जया बच्चन को भी सदस्यता 'लाभ के पद' की वजह से चली गई थी. दरअसल उस वक्त जया बच्चन उत्तर प्रदेश फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष भी थीं. इसके बाद उनकी सदस्यता चली गई थी.
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