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हरिद्वार से संभल तक कांवड़ लेकर पहुंचीं महिलाएं, बोलीं- जब लड़के कांवड़ ला सकते हैं तो हम क्यों नहीं

हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने वाली शिवभक्त युवती वेतना ने बताया कि वह पिछले कई सालों से कांवड़ यात्रा कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पहले ज्यादातर लड़के ही कांवड़ लेकर आते थे. उन्हें देखकर उनके मन में भी भगवान शिव की भक्ति के लिए कांवड़ यात्रा करने की इच्छा हुई.

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Kanwar Yatra Kanwar Yatra

सावन महीने में कावड़ यात्रा के अलग-अलग रंग देखने के लिए मिल रहे हैं. कावड़ यात्रा के भक्ति भरे माहौल के बीच महिलाओं में भी कावड़ यात्रा के प्रति बड़ी रुचि देखने के लिए मिल रही है. जहां कई दिन की पैदल यात्रा तय करके शिवालयों तक पहुंचने वाले शिव भक्त कावड़ियों में महिलाएं और लड़कियां भी भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर होकर हरिद्वार और बृजघाट गंगा घाटों से कावड़ लेकर संभल के शिवालयों पर जलाभिषेक के लिए पहुंची हैं. कई दिन की पैदल यात्रा के बावजूद भी महिलाएं भगवान शिव की कावड़ यात्रा को भोलेनाथ का आशीर्वाद मानती हैं.

महिलाएं भी कांवड़ यात्रा में बढ़-चढ़कर ले रहीं हिस्सा
कुछ साल पहले तक कांवड़ यात्रा में मुख्य रूप से बुजुर्ग और युवा पुरुष ही नजर आते थे, लेकिन अब महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं हैं. संभल में बड़ी संख्या में महिलाएं हरिद्वार और बृजघाट से कांवड़ लेकर पहुंच रही हैं. इन कांवड़ियों का कहना है कि भगवान शिव के प्रति आस्था उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलने की ताकत देती है. महिलाओं का कहना है कि कांवड़ यात्रा सुनने में भले ही मुश्किल लगती हो, लेकिन एक बार कांवड़ उठाने के बाद रास्ता अपने आप आसान लगता है. भोलेनाथ का नाम लेते हुए कब कई दिनों की यात्रा पूरी हो जाती है, इसका पता ही नहीं चलता.

'जब लड़के कांवड़ ला सकते हैं तो हम क्यों नहीं'
कांवड़ लेकर पहुंची युवतियों का कहना है कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. जब लड़के भगवान शिव की कांवड़ यात्रा कर सकते हैं तो लड़कियां भी यह यात्रा कर सकती हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने कांवड़ उठाने का फैसला किया. महिला कांवड़ियों ने बताया कि पहले की तुलना में अब यात्रा के दौरान उन्हें ज्यादा सुरक्षित माहौल महसूस होता है. रास्ते में सुरक्षा के इंतजाम भी नजर आते हैं और उन्हें किसी तरह की बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.

कई सालों से कांवड़ ला रही हैं युवतियां
हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने वाली शिवभक्त युवती वेतना ने बताया कि वह पिछले कई सालों से कांवड़ यात्रा कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पहले ज्यादातर लड़के ही कांवड़ लेकर आते थे. उन्हें देखकर उनके मन में भी भगवान शिव की भक्ति के लिए कांवड़ यात्रा करने की इच्छा हुई. इसके बाद उन्होंने भी कांवड़ उठानी शुरू कर दी. उनका कहना है कि भक्ति करने का अधिकार सभी को है. भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था ने उन्हें इस यात्रा से जोड़ा और अब वह हर साल कांवड़ लेकर आती हैं.

'भोलेनाथ का नाम लेते हुए रास्ता आसान हो जाता है'
महिला कांवड़ियों का कहना है कि यात्रा के दौरान वे लगातार भगवान शिव का नाम और जयकारे लगाती हुई आगे बढ़ती हैं. उनका मानना है कि भोलेनाथ को याद करते हुए पैदल चलने पर थकान और मुश्किलों का अहसास कम हो जाता है. एक महिला कांवड़िए ने कहा कि उन्हें यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती. उनका मानना है कि लड़कियों को भी कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेना चाहिए, क्योंकि महिलाएं किसी भी काम में पीछे नहीं हैं.

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