यम दीपावली
यम दीपावली
धनतेरस के दिन आपने अपनी नानी या दादी को रात में सबके सो जाने के बाद चुपचाप यम का दिया निकालते हुए जरूर देखा होगा. घर के बाकी लोगों को शायद पता भी नहीं चलता कि उन्होंने कब और कहां यह दीपक रखा. बचपन में आपने भी कभी सोचा होगा कि आखिर नानी-दादी ऐसा क्यों करती हैं? दरअसल, धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की एक पुरानी परंपरा है, जिसे यम दीपदान या यम दीपावली कहा जाता है.
यम दीपावली पर कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस के दिन प्रदोष काल में दीपक निकाला जाता है. आइए जानते हैं इस साल यम दीपावली कब है, दीपक निकालने का शुभ समय क्या रहेगा और इसे जलाने के पीछे क्या मान्यता है? यम दीपावली हर साल धनतेरस के दिन मनाई जाती है. साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है. इसी दिन शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाया जाएगा. इस परंपरा को यम दीपदान भी कहते हैं.
धनतेरस पर प्रदोष काल कब है?
यमराज के नाम का दीपक जलाने के लिए प्रदोष काल का समय शुभ माना जाता है. 6 नवंबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. इसी दौरान यम दीपदान किया जाता है. हालांकि कई परिवारों में यह काम घर के बाकी सदस्यों के सो जाने के बाद चुपचाप किया जाता है. यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्ग इस रस्म को बिना किसी को बताए निभाते आए हैं. आप अपनी परंपरा के हिसाब से भी दीप निकाल सकते हैं. यम का दीपक निकालने के लिए आटे का दीपक बनाएं. इसमें तेल डालकर रुई की बाती लगाएं और शाम या रात के समय इसे जलाएं. परंपरा के अनुसार, दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखना शुभ होता है. इसे रखते समय परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और उनकी सलामती की कामना करें.
क्यों जलाते हैं यमराज के नाम का दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. माना जाता है कि इस दिन दक्षिण दिशा में दीपदान करने से यमराज की कृपा मिलती है और परिवार के सदस्यों की उम्र लंबी होती है. इस परंपरा का संबंध परिवार की सुरक्षा और सभी की कुशलता की कामना से है. यही कारण है कि धनतेरस पर खरीदारी और पूजा-पाठ के साथ कई घरों में यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है.
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