आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पापांकुशा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. यह तिथि भगवान श्री हरि विष्णु और उनके पद्मनाभ स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित है. मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से जाने-अनजाने हुए पापों का प्रायश्चित होता है और व्यक्ति को मानसिक एवं शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. शास्त्रों में पापांकुशा एकादशी के व्रत को अश्वमेध और वाजपेय यज्ञों के समान पुण्यदायी बताया गया है. पूजन के दौरान शाम के समय मस्तक पर चंदन लगाकर पंचामृत, मौसमी फल और तुलसी दल अर्पित करने का विधान है. साथ ही, व्रत के नियमों के तहत सूर्यास्त के बाद केवल फलाहार करने, तामसिक भोजन व क्रोध से बचने तथा विष्णु सहस्त्रनाम या श्री सूक्त का पाठ करने की सलाह दी जाती है.