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प्रार्थना हो स्वीकार

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें श्री सूक्त का पाठ, जानिए सही विधि

03 नवंबर 2026

हिंदू धर्मग्रंथों में मां लक्ष्मी की कृपा और धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए श्री सूक्तम के पाठ को बेहद फलदायी और चमत्कारी बताया गया है। ऋग्वेद से लिए गए इस सूक्त में महात्म्य सहित कुल 16 ऋचाएं हैं, जिन्हें षोडशोपचार पूजन के समान माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कुंडली में दरिद्र योग हो, व्यापार या नौकरी में रुकावट आ रही हो अथवा शुक्र ग्रह की दशा अनुकूल न हो, तो श्री सूक्त का नियमित पाठ कष्टों को दूर करता है। इस पाठ के लिए शुक्रवार या पूर्णिमा का दिन विशेष माना गया है। पाठ करते समय शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है। सफेद अथवा गुलाबी वस्त्र धारण कर, लाल या गुलाबी आसन पर बैठकर पाठ करने की सलाह दी जाती है। पाठ के दौरान मां लक्ष्मी के साथ श्री हरि की आराधना भी अनिवार्य मानी गई है। यदि संपूर्ण पाठ संभव न हो, तो स्फटिक की माला से मंत्र का 108 बार जाप करने से भी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मां लक्ष्मी की कृपा और धन प्राप्ति के 5 चमत्कारी उपाय, दूर होगी आर्थिक तंगी

02 नवंबर 2026

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-संपन्नता की देवी माना गया है. जीवन में धन की कमी और आर्थिक संकट को दूर करने के लिए मां लक्ष्मी की विधिवत उपासना का विशेष महत्व बताया गया है. देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूजा में शंख, गुलाब का पुष्प व इत्र, स्फटिक की माला, भगवान श्री हरि विष्णु की संयुक्त उपासना और शाम के समय गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाने जैसे चमत्कारी उपाय बताए गए हैं. मान्यता है कि पूजा स्थल पर शंख रखने और बजाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है. वहीं शुक्रवार को मां लक्ष्मी को गुलाब अर्पित करने और खीर का भोग लगाने से दरिद्रता का नाश होता है. विधि-विधान से इन उपायों को करने पर परिवार में सुख, आरोग्य और ऐश्वर्य का वास होता है.

राम नाम की महिमा: जानिए विवाह, संतान और करियर बाधाओं के अचूक महाप्रयोग

01 नवंबर 2026

धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विधान के अनुसार कलियुग में प्रभु श्री राम का नाम संकटमोचन और मोक्षदायी माना गया है. जीवन की विभिन्न बाधाओं के निवारण के लिए राम नाम के विशेष रूपों और मंत्रों के जप का विधान बताया गया है. यदि विवाह में बाधाएं आ रही हों, तो माता सीता के ध्यान के साथ भगवान राम के 'रमापति' नाम का जप लाभकारी माना जाता है. संतान संबंधी समस्याओं और बाधाओं के निवारण हेतु श्री राम के बाल रूप की आराधना और 'कौशल नंदन' नाम का नियमित जाप करने की सलाह दी गई है. विद्यार्थियों की शिक्षा और एकाग्रता में सुधार के लिए 'रघुनाथ' शब्द का स्मरण उत्तम माना गया है. इसके अलावा नौकरी या व्यापार में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए 'अवधेश' नाम का जाप करने से शीघ्र सफलता मिलने की मान्यता है. हनुमान जी की कृपा और समस्त मानसिक संतापों से मुक्ति के लिए राम नाम को अत्यंत प्रभावशाली उपाय बताया गया है.

अहोई अष्टमी पर करें मां पार्वती की पूजा, संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का मिलेगा वरदान

31 अक्टूबर 2026

अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और मंगल कामना के लिए रखा जाता है. कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व में माता पार्वती के स्वरूप अहोई माता की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन निर्जला उपवास रखकर दीवार पर अहोई माता की आकृति बनाकर पूजन करने, चांदी की माला धारण करने और तारों को अर्घ्य देने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं. कार्यक्रम में संतान की शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं. इसके अलावा, जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, उनके लिए दूध-भात का भोग लगाने और चांदी के मोतियों की माला अर्पित करने का विधान बताया गया है. पूरे विधि-विधान और शुद्ध आचरण से यह व्रत रखने पर संतान को दीर्घायु और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना के नियम, रवि पुष्य योग के संयोग और गया का शालिग्राम सूर्य मंदिर

30 अक्टूबर 2026

भानु सप्तमी पर सूर्य देव की विशेष साधना और अर्घ्य के विधान का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया गया है. पंचांग के अनुसार जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. इस पावन अवसर पर रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और साध्य योग जैसे दुर्लभ संयोग बनते हैं. मान्यता है कि इस दिन तांबे के लोटे या थाल में जल, रोली, अक्षत और तिल अर्पित कर सूर्य देव की आराधना करने से शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर होते हैं, करियर में सफलता मिलती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है. कार्यक्रम में कमजोर नेत्र ज्योति, माइग्रेन और चर्म रोगों से मुक्ति के लिए गुड़, तांबे का सिक्का और लाल वस्त्र के दान का उपाय बताया गया है. इसके साथ ही बिहार के गया जिले में फल्गु नदी तट पर स्थित ब्राह्मणी घाट के अद्वितीय सूर्य मंदिर की महिमा भी बताई गई है, जहां भगवान सूर्य अपनी पत्नी क्षया देवी, पुत्र शनि व यम और सारथी अरुण के साथ सात फीट ऊंची शालिग्राम शिला की आदमकद प्रतिमा के रूप में विराजमान हैं.

करवा चौथ पर कब करें पूजा? जानिए शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन का सही तरीका

29 अक्टूबर 2026

करवा चौथ के पावन पर्व पर सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश, माता गौरी और चंद्र देव की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है. इस दिन शाम के समय पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:53 से 06:56 तक रहेगा, जिसके बाद चंद्रोदय होने पर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है. मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन से जुड़े अपयश दोष को दूर करने के लिए भगवान गणेश की उपासना कर चंद्रमा को नीची निगाह से अर्घ्य देना चाहिए या छलनी से देखना चाहिए. इस दिन सुहागिनों को काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचना चाहिए और लाल अथवा गुलाबी वस्त्र धारण कर सोलह शृंगार करना चाहिए.

शिव-पार्वती का विवाह स्थल, जहां आज भी सात फेरे लेते हैं नवदंपति

28 अक्टूबर 2026

इस विशेष कार्यक्रम में वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य प्रदान करने वाले प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों की महिमा बताई गई है. उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह स्थल माना जाता है, जहाँ पवित्र अखंड धूनी को साक्षी मानकर आज भी नवदंपति सात फेरे लेते हैं. वहीं केरल के त्रिशूर स्थित गुरुवायूर मंदिर को 'भूलोक बैकुंठम' कहा जाता है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के सम्मुख सादगीपूर्ण विवाह करने से दांपत्य जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है. इसके अलावा राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश मंदिर की मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य या विवाह का पहला निमंत्रण पत्र यहाँ भेजा जाता है. मान्यता के अनुसार इन पवित्र स्थलों पर दर्शन और पूजन करने से विवाह में आने वाली अड़चनें समाप्त होती हैं तथा परिवार में खुशहाली बनी रहती है.

शालिग्राम पूजन के नियम, मुक्तिनाथ धाम का रहस्य और श्री हरि के चमत्कारी मंत्र

27 अक्टूबर 2026

भगवान विष्णु के जीवंत स्वरूप शालिग्राम की उपासना, पूजन विधि और नियमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है. नेपाल की गंडकी नदी से प्राप्त होने वाले शालिग्राम स्वयं सिद्ध विग्रह माने जाते हैं. धर्मग्रंथों के अनुसार जिस घर में नियमित शालिग्राम का पूजन होता है, वहां दरिद्रता और वास्तु दोष दूर रहते हैं तथा सुख-समृद्धि का वास होता है. शालिग्राम की पूजा में तुलसी दल, पंचामृत स्नान और चंदन अर्पण अनिवार्य माना गया है. घर में केवल एक ही शालिग्राम शिला रखने और आचार-विचार की शुद्धता का पालन करने की हिदायत दी गई है. साथ ही नेपाल के मुस्तांग जिले में स्थित मुक्तिनाथ धाम के महत्व और श्री हरि के चमत्कारी मंत्रों के जाप की महिमा बताई गई है.

कार्तिक महीने में इन नियमों का करें पालन, जानिए क्या खाएं और किन चीजों से बचें

26 अक्टूबर 2026

कार्तिक मास को हिंदू धर्म में अत्यधिक पुण्यदायी और कल्याणकारी महीना माना जाता है। इस पावन माह में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत उपासना से धन संबंधित समस्याओं का समाधान होता है। शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास की समाप्ति के बाद इसी माह में श्री हरि अपनी योग निद्रा का त्याग करते हैं। कार्तिक में पवित्र नदियों में स्नान, दीप दान और तुलसी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में भगवान शालिग्राम और माता तुलसी के पूजन से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दौरान खान-पान में स्निग्ध चीजें लेने और दाल व खट्टी चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

वृंदावन का निधिवन, रात में रुकने पर पाबंदी और रंग महल के चमत्कार का रहस्य

25 अक्टूबर 2026

वृंदावन स्थित निधिवन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और रहस्यों पर आधारित इस विशेष रिपोर्ट में सूर्यास्त के बाद के नियमों का विवरण प्रस्तुत किया गया है. मान्यता के अनुसार शाम सात बजे के बाद निधिवन में श्रद्धालुओं और जीव-जंतुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित हो जाता है. जनश्रुति है कि रात के समय भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी यहां आकर गोपियों के साथ महारास रचाते हैं. निधिवन में मौजूद तुलसी के वृक्ष जोड़ों में हैं, जिन्हें गोप-गोपियों का स्वरूप माना जाता है. रंग महल में शाम को रखी जाने वाली सेज, पान, दातून और जल सुबह प्रयुक्त अवस्था में मिलने का दावा किया जाता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि स्थानीय लोग रात में अपनी खिड़कियां भी निधिवन की ओर नहीं खोलते हैं और नियमों की अवहेलना करने वालों को मानसिक या शारीरिक क्षति पहुंचने की चेतावनी दी जाती है.

शरद पूर्णिमा पर अमृत वर्षा, मां लक्ष्मी की पूजा और खीर के चमत्कारी उपाय

24 अक्टूबर 2026

आश्विन मास की शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है और इसकी किरणों से अमृत वर्षा की मान्यता है. इस पावन तिथि पर मां लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं. शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है, जो कई बीमारियों से राहत दिलाता है. साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के महारास और गोपीश्वर महादेव की पावन कथा का इस तिथि से गहरा नाता है. ज्योतिषीय उपायों के अनुसार, इस रात महालक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाकर कनकधारा या लक्ष्मी मंत्रों का जाप करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है. चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है और आरोग्य व मानसिक शांति का वरदान मिलता है.