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प्रार्थना हो स्वीकार

सावन शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, चार पहर पूजा विधि और मनोकामना पूर्ति के महाउपाय

10 अगस्त 2026

सावन महीने में सावन शिवरात्रि, सोम प्रदोष और सावन सोमवार के अद्भुत संयोग के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार सावन की शिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन तथा चार पहर की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है. इसमें प्रथम पहर में दूध, द्वितीय पहर में दही, तृतीय पहर में घी और चतुर्थ पहर में शहद अर्पित करने का विधान है. जलाभिषेक के लिए शुभ मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और निशिता काल का विशेष समय बताया गया है. इसके अलावा जीवन की विभिन्न समस्याओं जैसे धन प्राप्ति, संतान प्राप्ति, शीघ्र विवाह, स्वास्थ्य लाभ, शनि ढैया तथा रोजगार संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष उपाय और रुद्राभिषेक के नियम साझा किए गए हैं.

भगवान शिव के रुद्राभिषेक का महत्व, शिव वास की शुभ तिथियां और पूजन के विशेष नियम

09 अगस्त 2026

शास्त्रों में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने से कुंडली के सभी ग्रह दोष, दरिद्रता, बीमारियां और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं. शास्त्रों के अनुसार, रुद्राभिषेक का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शिवजी के निवास स्थान यानी 'शिव वास' का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है. शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की शुभ तिथियों पर शिवजी का निवास मंगलकारी माना जाता है, जब रुद्राभिषेक करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसके विपरीत, श्मशान या अनिष्टकारी तिथियों में सकाम रुद्राभिषेक करने से बचना चाहिए. हालांकि निष्काम भक्ति, महाशिवरात्रि, सावन और प्रदोष के अवसर पर बिना शिव वास देखे भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है. रुद्राभिषेक के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुख करके चांदी, पीतल या कांसे के बर्तन से धीरे-धीरे जल चढ़ाना शुभ माना जाता है. साथ ही अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, शहद, घी और भस्म से अभिषेक करने का विधान है.

सावन की कामिका एकादशी पर शिव-विष्णु की संयुक्त कृपा, जानिए व्रत विधान और उपाय

08 अगस्त 2026

सावन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, लेकिन कामिका एकादशी का व्रत करने से साधक को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है. इस बार कामिका एकादशी पर रविवार का दिन होने से सूर्य उपासना के साथ-साथ हर्षण योग, द्विपुष्कर योग, शिववास योग और महालक्ष्मी राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन व्रत, दान, स्नान और ध्यान करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. यदि कोई साधक उपवास न कर सके तो सात्विक आहार, विष्णु मंत्रों का जप और तुलसी पूजन करके भी पुण्य प्राप्त कर सकता है. पूजा में पीले पुष्प, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करने का विधान है.

सावन में धन-समृद्धि पाने के उपाय, शिव-लक्ष्मी पूजा से दूर होगी पैसों की तंगी और मिटेगा कर्ज

07 अगस्त 2026

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का सबसे उत्तम समय माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान किए गए दान, जप और पूजा-पाठ से जीवन में धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. गुड न्यूज़ टुडे के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में सावन के महीने में धन की तंगी दूर करने, कर्ज से मुक्ति पाने और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के कई अचूक ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं. सावन में शिवलिंग पर पंचामृत, जल और बेलपत्र चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन के शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा, खीर का भोग और मंत्र जाप करने से आर्थिक समस्याएं समाप्त होती हैं. इसके अलावा, काले तिल मिले जल से भगवान शिव का अभिषेक करने और ऋण मुक्तेश्वराय नमः मंत्र के जाप से कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है. दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा का विधान है.

सावन में घर पर शिवलिंग स्थापना के नियम, पूजन विधि और मनोकामना पूर्ति के महाउपाय

06 अगस्त 2026

प्रार्थना हो स्वीकार कार्यक्रम में शिवलिंग की पूजा, स्थापना के नियम और मनोकामना पूर्ति के विशेष उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया है. धर्म ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग की आराधना से शिव और शक्ति दोनों के पूजन का फल प्राप्त होता है. सावन के महीने में घर पर नर्मदाेश्वर या छह इंच तक का शिवलिंग स्थापित करना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. शिवलिंग की वेदी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए. पूजा के दौरान शिवलिंग पर सीधे वस्तु न चढ़ाकर बेलपत्र या पुष्प रखकर अर्पित करना चाहिए. शिवजी को हल्दी, केतकी का फूल, सेमल, जूही और कदंब अर्पित करने से बचना चाहिए. विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जल, दूध, दही, घी, शहद या गन्ने के रस से अभिषेक करने का विधान है. पूजन के समय 'ॐ नमः शंभवाय च' अथवा 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है.

सावन में मां मंगला गौरी पूजन का महत्व, विवाह बाधा दूर करने के उपाय और गौरी शंकर मंदिर

04 अगस्त 2026

सावन माह के मंगलवार को मां मंगला गौरी की उपासना का विशेष विधान है। धर्मग्रंथों के अनुसार सावन में शिव के साथ शक्ति की आराधना से जीवन के विघ्न दूर होते हैं। शास्त्रों में माना गया है कि मां मंगला गौरी का व्रत और पूजन करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। यदि कुंडली में मांगलिक दोष हो या वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ रही हों, तो मां मंगला गौरी के समक्ष चौमुखी दीपक जलाकर विशेष मंत्रों का जाप और पूजन किया जाता है। इसके अलावा दिल्ली के चांदनी चौक स्थित 800 साल पुराने ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर का भी विशेष महत्व है, जहां स्वयंभू शिवलिंग और अर्धनारीश्वर रूप विराजमान हैं। सावन के मंगलवार को मां मंगला गौरी की विधिवत पूजा और उपाय करके भक्त मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं।

सावन का पहला सोमवार आज, जानिए पूजन विधि, सोमवारी व्रत का महत्व और शिव कृपा पाने के महाउपाय

03 अगस्त 2026

सावन महीने के पहले सोमवार पर देशभर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. ज्योतिर्लिंगों और मंदिरों में देवादिदेव महादेव का जलाभिषेक किया जा रहा है. स्कंद पुराण के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव का ही स्वरूप माना गया है और यह चंद्र ग्रह से संबंधित है. सावन के सोमवार का व्रत विवाह, संतान सुख, सेहत और मानसिक शांति के लिए विशेष कल्याणकारी माना जाता है. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शीघ्र विवाह के लिए बेलपत्र पर चंदन से राम लिखकर अर्पित करने तथा संतान प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर घी और दूध से अभिषेक करने का विधान बताया गया है. शिव पूजा में हल्दी, केवड़ा, शंख से जल और तुलसी वर्जित हैं.

खजुराहो का बढ़ता शिवलिंग, मरकत मणि का रहस्य और दूधेश्वर धाम से जुड़ी पौराणिक कथाएं

02 अगस्त 2026

खजुराहो स्थित मतंगेश्वर महादेव मंदिर अपने कई रहस्यों और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. दावा किया जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग हर साल तिल के समान बढ़ता है और यह जमीन के नौ फीट ऊपर तथा नौ फीट नीचे स्थित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा युधिष्ठिर को दी गई मरकत मणि मतंग ऋषि के पास पहुंची और इसे शिवलिंग के नीचे स्थापित किया गया. यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल खजुराहो के इस मंदिर में पूजन और जलाभिषेक से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यहां भगवान कार्तिकेय को प्रथम भोग लगाने और माता पार्वती के चरण दबाकर आशीर्वाद लेने की विशेष परंपरा है. इसके साथ ही, गाजियाबाद के पौराणिक दूधेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास भी महत्वपूर्ण है. माना जाता है कि यह स्थान रावण के पिता विश्रवा की तपोस्थली रहा है और यहीं रावण ने महादेव को अपना पहला शीश अर्पित किया था.

हिमाचल के काटगढ़ में दो हिस्सों में बंटा शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर होता है मिलन, जबलपुर में दूल्हा-दुल्हन रूप में विराजते हैं शिव-पार्वती

01 अगस्त 2026

गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित काटगढ़ महादेव मंदिर और मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित चौसठ योगिनी मंदिर की अद्भुत पौराणिक मान्यताओं को दर्शाया गया है. काटगढ़ महादेव मंदिर में शिवलिंग दो भागों में विभाजित है, जिन्हें शिव और माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि जन्माष्टमी से महाशिवरात्रि तक ग्रह-नक्षत्रों की चाल और मौसम के बदलाव से यह शिवलिंग आपस में मिलता है और महाशिवरात्रि के दिन जुड़ जाता है. इस धाम का संबंध त्रेता युग में राजा भरत से लेकर सिकंदर और महाराजा रणजीत सिंह तक से जोड़ा जाता है. इसके अलावा जबलपुर के गोलगी मठ (चौसठ योगिनी मंदिर) में भगवान शिव और माता पार्वती नंदी पर सवार होकर दूल्हा-दुल्हन के साकार रूप में विराजते हैं, जहां नवविवाहित जोड़े अखंड सौभाग्य का वरदान मांगने आते हैं.

सावन के संपत् शनिवार पर शिव-शनि की संयुक्त कृपा, दूर होंगे शनि दोष और मिलेगी समृद्धि

31 जुलाई 2026

सावन मास के शनिवार को संपत् शनिवार कहा जाता है. मान्यता के अनुसार, सावन के शनिवार को भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त पूजा-उपासना करने से अपार धन, समृद्धि और संपन्नता की प्राप्ति होती है. शनिदेव भगवान शिव को अपना आराध्य और गुरु मानते हैं, इसलिए सावन में शिव पूजन करने से शनि संबंधी कष्टों और साढ़ेसाती या ढैय्या के दुष्प्रभावों से शीघ्र मुक्ति मिलती है. इस दिन शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, शिवलिंग पर जल, नीला फूल या शमी पत्र अर्पित करने, और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र अथवा जूते दान देने से करियर तथा रोजगार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. सावन शनिवार के महाउपायों से आरोग्य और ऐश्वर्य का वरदान मिलता है.

सावन मास का हुआ शुभारंभ, जानिए शिव-विष्णु पूजा का महत्व और मनोकामना पूर्ति के महाउपाय

30 जुलाई 2026

सावन के पवित्र महीने का शुभारंभ हो चुका है. इस अवसर पर भगवान शिव की विशेष उपासना का महत्व बताया गया है. इस बार सावन मास का आरंभ गुरुवार से हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ संयोग माना जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की एक साथ विशेष कृपा प्राप्त होती है. कार्यक्रम में सावन मास की महिमा, जलाभिषेक का विधान, विवाह की बाधा दूर करने के उपाय, धन लाभ, कर्ज मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के महाउपाय बताए गए हैं. इसके अलावा, कुंडली में गुरु, राहु और केतु के दोषों को शांत करने के लिए विशेष पूजन विधियों की जानकारी भी दी गई है. सावन के दौरान सात्विक आहार ग्रहण करने और शिव मंत्रों के जाप का विशेष महत्व रेखांकित किया गया है.