गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना स्वीकार' में एंकर सुनीता राय शर्मा बृहस्पति ग्रह को शांत और मजबूत करने के तीन विशेष उपायों के बारे में बता रही हैं। ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख, ज्ञान, विवाह और सौभाग्य का कारक माना गया है। कार्यक्रम में बताया गया कि हल्दी, केसर और केले का पौधा बृहस्पति के प्रतीक हैं। हल्दी का प्रयोग न केवल नकारात्मकता दूर करता है, बल्कि अविवाहितों के विवाह की बाधाएं भी समाप्त करता है। वहीं केसर का तिलक लगाने और इसका सेवन करने से बुद्धि और वाणी की शक्ति बढ़ती है। भगवान विष्णु का स्वरूप माने जाने वाले केले के पौधे की पूजा करने से आर्थिक संपन्नता और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यदि आपकी कुंडली में गुरु कमजोर है, तो गुरुवार को चने की दाल, गुड़ और हल्दी के इन विशेष प्रयोगों से आप अपनी किस्मत बदल सकते हैं।
गुड न्यूज़ टुडे (GNT) के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में रुद्राक्ष के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न रुद्राक्ष को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना गया है। यह शनि देव के प्रकोप, साढ़ेसाती और ढैया जैसी समस्याओं को दूर करने में अत्यंत लाभकारी है। कार्यक्रम में बताया गया कि मेष राशि के लिए 11 मुखी, वृषभ राशि के लिए 10 मुखी और कर्क राशि के लिए एक मुखी रुद्राक्ष पहनना अनुकूल होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रुद्राक्ष को सोना, चांदी या तांबे के साथ लाल अथवा पीले धागे में धारण करना चाहिए। इसे पूर्णिमा, अमावस्या या सोमवार के दिन पहनना शुभ माना गया है। इसके अलावा, रुद्राक्ष धारण करने के विशेष नियम भी बताए गए हैं, जैसे सोते समय इसे उतार देना चाहिए और विवाहित महिलाओं को इसे पहनने से बचना चाहिए। साथ ही, सूर्योपासना के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ का महत्व भी समझाया गया है।
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर गीतिका पंत वैशाख माह (माधव मास) की महिमा पर चर्चा कर रही हैं। भारतीय पंचांग के इस दूसरे महीने में भगवान विष्णु, परशुराम और देवी की उपासना का विशेष विधान है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस माह में सूर्य मेष राशि में उच्च के होते हैं, जिससे जल दान और गंगा स्नान का पुण्य अक्षय हो जाता है। कार्यक्रम में अक्षय तृतीया, मोहिनी एकादशी और सीता नवमी जैसे प्रमुख पर्वों के महत्व को रेखांकित किया गया है। साथ ही, वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में भीषण गर्मी से ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के लिए 108 दिनों तक चलने वाली 'फूल बंगला' परंपरा का भी वर्णन किया गया है। विशेषज्ञों ने वैशाख में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र के जाप और बेल के सेवन की सलाह दी है।
गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर गीतिका पंत हनुमान जी की अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की महिमा पर प्रकाश डाल रही हैं। मान्यता है कि माता सीता ने हनुमान जी को ये अलौकिक शक्तियां और दिव्य धन प्रदान किए थे। कार्यक्रम में अनिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी आठ सिद्धियों के अर्थ और उनके प्रभाव को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही, कुबेर और हनुमान जी के पास मौजूद नौ निधियों जैसे पद्म, महापद्म, नील और मुकुंद के महत्व पर भी चर्चा की गई है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, कलयुग में भी उत्तम चरित्र और मंगल व बृहस्पति ग्रहों की अनुकूल स्थिति से इन शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। बुलेटिन में स्वास्थ्य, शिक्षा और धन प्राप्ति के लिए हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों की उपासना के विशेष उपाय भी बताए गए हैं।
गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर सरगम पंत श्रीवास्तव हनुमान जन्मोत्सव की महिमा और पूजन विधियों पर चर्चा कर रही हैं। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। कार्यक्रम में बताया गया कि हनुमान जी अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं और कलयुग में साक्षात विराजमान देव हैं। ज्योतिषी के अनुसार, इस दिन चमेली के तेल का दीपक जलाना, सुंदरकांड का पाठ करना और हनुमान जी को चोला व जनेऊ अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। आर्थिक लाभ के लिए 41 दिनों तक 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जाप और चमेली के तेल का दीपक जलाने की सलाह दी गई है। मंगल दोष से मुक्ति के लिए हनुमान जी को चोला और जनेऊ अर्पित करने का महत्व बताया गया है। छात्रों के लिए बजरंग बाण का पाठ और परीक्षा के दिन हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी है। लेख में स्पष्ट किया गया है कि हनुमान जी की पूजा सात्विक रहकर और श्री राम की आराधना के साथ ही करनी चाहिए।
हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में बजरंगबली की विशालकाय प्रतिमाओं का अनावरण होने जा रहा है. मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित जानराय टोरिया मंदिर में देश की पहली और सबसे विशाल 51 फीट ऊंची अष्टधातु की हनुमान प्रतिमा स्थापित की जा रही है. 171 क्विंटल अष्टधातु से निर्मित इस प्रतिमा का अनावरण 23 अप्रैल 2024 को होगा. वहीं, राजस्थान के राजसमंद (नाथद्वारा) में गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊंची 'श्रीजी के हनुमान जी' प्रतिमा का लोकार्पण किया गया है, जिसे प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने तैयार किया है. गुजरात के खेड़ा स्थित केसरा बालाजी मंदिर में 'मिनी अयोध्या' की झांकी सजाई गई है, जहां देश के 11 प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के स्वरूप एक साथ देखे जा सकते हैं. इस बुलेटिन में देशभर में मौजूद हनुमान जी की अन्य विशाल प्रतिमाओं जैसे आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम (176 फीट) और शिमला के जाखू हिल्स (108 फीट) का भी विवरण दिया गया है.
गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में एंकर गुंजन दीक्षित हनुमान जन्मोत्सव की तैयारी और महत्व पर चर्चा कर रही हैं। चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व पर बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। कार्यक्रम में बताया गया कि इस बार विजय योग और अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी होगा। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए चोला चढ़ाने की शास्त्रीय विधि साझा की गई है, जिसमें सिंदूर और चमेली के तेल के लेप का महत्व बताया गया है। साथ ही, झांसी के उस अद्भुत मंदिर के दर्शन कराए गए हैं जहाँ हनुमान जी 'सखी' यानी स्त्री रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि यहाँ नारियल बांधने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, हनुमान जी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग श्री राम नाम का निरंतर जाप और सुंदरकांड का पाठ है।
गुड न्यूज़ टुडे के विशेष शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में त्रिदेवियों – मां लक्ष्मी, मां काली और मां सरस्वती की उपासना विधि और महिमा का वर्णन किया गया। मां लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं जिनका बीज मंत्र 'ओम श्रीं' है। उनकी पूजा शाम के समय देसी घी का दीपक जलाकर, सफेद वस्त्र और सफेद पेड़ा चढ़ाकर करनी चाहिए। मां काली शक्ति की देवी हैं जो भक्तों को भय से मुक्ति दिलाती हैं। उनका बीज मंत्र 'ओम क्रीं कालकायै नमः' है और पूजा में लाल वस्त्र, लाल फूल और उड़द की मिठाई चढ़ानी चाहिए। मां सरस्वती विद्या और ज्ञान की देवी हैं जिनका बीज मंत्र 'ओम श्रीं सरस्वती नमः' है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल और मालपुए या खीर का भोग लगाना चाहिए। तीनों देवियों की विधिवत उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार कामदा एकादशी व्रत के प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या का दोष एवं जाने-अनजाने में किए गए सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। व्रत में वासुदेव कृष्ण की उपासना का विधान है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान को पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। पाप नाश, धन प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं। कामदा एकादशी से बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगले की परंपरा शुरू होती है जो हरियाली अमावस्या तक चलती है। यह परंपरा स्वामी हरिदास ने लगभग 600 साल पहले शुरू की थी।
गुड न्यूज टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में भगवान राम की चार चमत्कारिक स्तुतियों की महिमा बताई गई। पहली स्तुति 'श्री रामचंद्र कृपालु भजुमन हरण भव भय दारुणम्' से संस्कार शुद्ध होते हैं और परिवार का कल्याण होता है। दूसरी स्तुति 'राम रक्षा स्तोत्र' से अकाल मृत्यु टल जाती है और स्वास्थ्य की रक्षा होती है। तीसरी स्तुति 'जय राम रमा रमन शमन' से समाज में मान सम्मान, राज्यपद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। चौथी स्तुति 'आदित्य हृदय स्तोत्र' से युद्ध, विवाद और मुकदमों में सफलता मिलती है। कार्यक्रम में बताया गया कि राम नाम का जाप कलियुग में सबसे प्रभावशाली उपाय है। प्रत्येक स्तुति के पाठ का सही समय और विधि भी समझाई गई। गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं से भगवान राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का वर्णन किया गया।
चैत्र रामनवमी के अवसर पर ज्योतिषाचार्यों में तिथि को लेकर अलग-अलग मत हैं। प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च दिन बृहस्पतिवार को दोपहर 2 बजे के बाद से हो रहा है जो 27 मार्च दिन शुक्रवार को दोपहर 12:02 तक व्याप्त रहेगा। कर्क लग्न दोपहर 12:45 से 2:50 के मध्य प्राप्त हो रहा है। पंडित त्रिपाठी के अनुसार, रामनवमी का जन्मोत्सव 26 मार्च को 12:45 से 2:50 के बीच कर्क लग्न में मनाना चाहिए। इस दिन नवरात्र का अंतिम दिन भी है जब मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की विधिवत उपासना से संपूर्ण नवरात्रि का फल मिल सकता है। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि इस दिन मध्याह्न काल में भगवान राम की पूजा अर्चना करनी चाहिए और मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करना चाहिए।