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प्रार्थना हो स्वीकार

शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप, भृंगी ऋषि की कथा और शिवलिंग की महिमा, जानें महादेव के रहस्य

25 मई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना स्वीकार' में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की महिमा और उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में बताया गया है। शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बिना संसार की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम में भृंगी ऋषि की कथा का वर्णन किया गया है, जो केवल भगवान शिव की परिक्रमा करना चाहते थे और माता पार्वती की उपेक्षा करते थे। इस पर माता पार्वती ने उन्हें श्राप दिया था, जिसके बाद महादेव ने अर्धनारीश्वर रूप धारण कर भृंगी ऋषि को शिव और शक्ति की एकता का संदेश दिया। इसके अलावा, सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी की उलझन को दूर करने के लिए भी शिव ने अर्धनारीश्वर रूप में दर्शन दिए थे। कार्यक्रम में शिवलिंग के वास्तविक अर्थ को भी स्पष्ट किया गया है, जो प्रकृति और पुरुष के सम्मिलित स्वरूप का प्रतीक है। शिव की उपासना से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गंगा दशहरा: भगीरथ की तपस्या, स्नान-दान का महत्व और घर पर पूजा की विधि

24 मई 2026

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार गंगा दशहरा 25 मई को है। मान्यता है कि इसी दिन भगीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए मां गंगा को धरती पर लेकर आए थे। राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने और दान देने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन 10 दीपक जलाने और 10 ब्राह्मणों को दान देने का विशेष महत्व है। यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या तुलसी के पत्ते मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान करते समय तीन बार गंगा का नाम लेने से गंगा स्नान के समान ही पुण्य मिलता है। इसके बाद सूर्य देवता को जल अर्पित कर मां गंगा के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

हनुमान जी का पराक्रम: लंका दहन, संजीवनी बूटी और महाभारत में योगदान

23 मई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर सरगम पंत श्रीवास्तव ने हनुमान जी की बुद्धि, बल और श्री राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति पर चर्चा की. रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि कैसे जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया. लंका दहन का मुख्य उद्देश्य रावण को प्रभु राम की शक्ति का परिचय देना था. लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर रातों-रात संजीवनी बूटी लाना उनके अकल्पनीय पराक्रम को दर्शाता है. मेघनाद के ब्रह्मास्त्र का सम्मान करते हुए हनुमान जी का बंधना उनकी सूझबूझ का प्रमाण था. कार्यक्रम में बताया गया कि हनुमान जी ने नागपाश से राम-लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए गरुड़ जी को बुलाया और महाभारत युद्ध में अर्जुन के रथ की रक्षा की. माता सीता द्वारा दी गई मोतियों की माला को तोड़कर हनुमान जी ने सिद्ध किया कि उनके हृदय में केवल सियाराम का वास है.

शादी में हो रही है देरी? कुंडली के ये 4 योग हो सकते हैं कारण, जानें अचूक ज्योतिषीय उपाय

22 मई 2026

गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में बताया गया है कि लड़कियों की शादी में विलंब का कारण कमजोर बृहस्पति हो सकता है, जबकि लड़कों के विवाह में देरी कमजोर शुक्र के कारण होती है. कुंडली में मुख्य रूप से चार योग विवाह में बाधा डालते हैं- शनि-चंद्र का विष योग, सप्तम भाव में बृहस्पति, शुक्र-चंद्र की युति और शुक्र की अशुभ स्थिति। इसके अलावा मांगलिक दोष और सप्तम भाव पर राहु-केतु का प्रभाव भी दांपत्य जीवन में अड़चन पैदा करता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय बताए गए हैं। गौरी-शंकर की उपासना, 16 सोमवार का व्रत, भगवान शिव का जलाभिषेक और देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने से विवाह के योग बनते हैं। साथ ही, ज्योतिषीय सलाह से पीला पुखराज या ओपल धारण करने से भी विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं।

गुरुवार व्रत के अचूक उपाय, देवगुरु बृहस्पति की कृपा से मिलेगा धन और सुख

21 मई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' के इस एपिसोड में बृहस्पतिवार व्रत के महत्व और देवगुरु बृहस्पति की उपासना के अचूक उपायों के बारे में बताया गया है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, गुरुवार का व्रत करने से श्री हरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कुंडली के गुरु दोष दूर होते हैं। जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है या दांपत्य जीवन में परेशानियां हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी है। इसके अलावा, संतान प्राप्ति और कर्ज मुक्ति के लिए भी गुरुवार के दिन विशेष उपाय किए जा सकते हैं। प्रातःकाल स्नान के बाद सूर्य को हल्दी मिलाकर जल अर्पित करना, केले के पौधे की पूजा करना और 'ॐ ब्रिम बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है। साथ ही पीले वस्त्र धारण करने और पीली वस्तुओं के दान से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मोती पहनने के क्या हैं फायदे और नुकसान, जानिए किन राशियों के लिए है शुभ

20 मई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में आज ज्योतिष शास्त्र के दो महत्वपूर्ण रत्नों- मोती और पन्ना के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। मोती को चंद्रमा का प्रमुख रत्न माना जाता है, जो मन की शांति, स्थिरता और भावनाओं को संतुलित करने में मदद करता है। इसे धारण करने से तनाव दूर होता है और माता का सुख प्राप्त होता है। हालांकि, वृष, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ लग्न वालों को इसे पहनने से बचना चाहिए। वहीं, पन्ना बुध ग्रह का रत्न है, जो बुद्धि, वाणी और एकाग्रता को बढ़ाता है। कमजोर बुध वाले व्यक्तियों को त्वचा और धन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें पन्ना धारण करके दूर किया जा सकता है। मेष, कर्क और वृश्चिक लग्न वालों को पन्ना नहीं पहनना चाहिए। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है, अन्यथा इसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं।

पंचमुखी, दक्षिण मुखी और बाल हनुमान: जानें बजरंगबली के किस स्वरूप की पूजा से पूरी होगी हर मनोकामना

19 मई 2026

हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है। मान्यता है कि बजरंगबली के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करने से जीवन की अलग-अलग परेशानियां दूर होती हैं और विशेष वरदान प्राप्त होते हैं। पंचमुखी हनुमान की उपासना से शत्रुओं पर विजय मिलती है और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। वहीं, दक्षिण मुखी हनुमान की पूजा से मृत्यु भय, चिंता और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। उत्तर मुखी हनुमान ऐश्वर्य और लंबी आयु प्रदान करते हैं, जबकि पूर्व मुखी स्वरूप साहस और ज्ञान देता है। विद्यार्थियों के लिए बाल हनुमान की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है, जिससे बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, पर्वत उठाए हनुमान जी की पूजा से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं और सेवक स्वरूप की उपासना से बच्चों में अच्छे संस्कार आते हैं। हनुमान जी की अभय मुद्रा और सूर्यमुखी स्वरूप की आराधना से मान-सम्मान, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धापूर्वक बजरंगबली की 40 दिन पूजा करने से हर काम में विजय और अद्भुत शक्ति का एहसास होता है।

शिव महापुराण के अचूक उपाय, पंचाक्षरी मंत्र का महत्व और महादेव को प्रसन्न करने वाले खास फूल

18 मई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में शिव महापुराण की महिमा और भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले अचूक उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया है। शिव महापुराण में 24 हजार श्लोक हैं, जो सात संहिताओं में बंटे हुए हैं। इसके पाठ से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम में बताया गया है कि शिव महापुराण सुनने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक भोजन और शुद्धता जैसे नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके साथ ही महादेव को प्रसन्न करने के लिए कई सरल उपाय बताए गए हैं। भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन, तिल से पापों का नाश, जौ से सुख और गेहूं चढ़ाने से संतान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, पंचाक्षरी मंत्र 'ओम नमः शिवाय' के जाप का विशेष महत्व बताया गया है। शिव पूजा में अलग-अलग फूलों का भी महत्व है, जैसे चमेली से वाहन सुख, जूही से अन्न और धतूरे के फूल से सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है।

शिक्षा में सफलता, सूर्य देव के अचूक मंत्र और आदित्य हृदय स्तोत्र के लाभ

17 मई 2026

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, सूर्य देव शिक्षा और ज्ञान के स्वाभाविक स्वामी हैं। कुंडली में सूर्य के कमजोर होने से शिक्षा प्राप्त करने में कई समस्याएं आती हैं। शिक्षा और करियर में सफलता पाने के लिए सूर्य की उपासना बेहद कारगर मानी गई है। विद्यार्थियों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और सूर्य नमस्कार करना चाहिए। इसके साथ ही सूर्य के बीज मंत्रों और इक्कीस नामों का जाप करने से स्मरण शक्ति में सुधार होता है। रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर नई ऊर्जा का संचार होता है। यह स्तोत्र मुकदमों में विजय, उत्तम स्वास्थ्य और शत्रुओं पर जीत दिलाने में भी लाभकारी है। जो लोग प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें शीघ्र सफलता के लिए सूर्य देव की नियमित उपासना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

शनिदेव की कृपा पाने के अचूक उपाय, पीपल-शमी की पूजा और दान से दूर होंगे सारे कष्ट

16 मई 2026

'प्रार्थना हो स्वीकार' के इस एपिसोड में शनिदेव की कृपा पाने और उनके प्रकोप से बचने के अचूक उपायों पर चर्चा की गई है। शनिदेव को कर्म फलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीपल और शमी के वृक्षों का शनिदेव से गहरा संबंध है। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और परिक्रमा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, शमी के पौधे की पूजा करने और शिवलिंग पर शमी के पत्ते अर्पित करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। हनुमान जी को राम नाम लिखे पीपल के पत्तों की माला चढ़ाने से भी शनि की पीड़ा शांत होती है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया है कि शनि को प्रसन्न करने के लिए गरीब और निर्बल वर्ग को दान करना चाहिए, लेकिन वृष, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वालों को शनि की वस्तुओं का दान करने से बचना चाहिए।

शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग, साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति के अचूक उपाय

15 मई 2026

ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनिवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। मान्यता है कि शनि जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया और शनि दोष के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, काले वस्त्र, तिल और लोहे का दान करना लाभकारी होता है। इस दिन 'ओम शं शनिश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी और श्रीकृष्ण की उपासना भी विशेष फलदायी मानी गई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव का जन्म सूर्य और छाया से हुआ था। पूजा करते समय शनिदेव की आंखों में सीधा नहीं देखना चाहिए। रोजगार और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए निर्धनों को भोजन कराना और दान करना उत्तम उपाय बताया गया है।