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प्रार्थना हो स्वीकार

जया पार्वती और कोकिला व्रत की महिमा, जानें सुयोग्य वर एवं अखंड सौभाग्य की पूजा विधि

27 जुलाई 2026

आषाढ़ मास में मनाया जाने वाला जया पार्वती व्रत और कोकिला व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. जया पार्वती का व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से प्रारंभ होकर सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है, जिसे मुख्यतः पश्चिमी भारत और गुजरात में पांच दिनों तक उत्सव की तरह मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य एवं सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं. इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पार्थिव पूजा, रुद्री पाठ तथा ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप का विशेष महत्व है. वहीं आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखे जाने वाले कोकिला व्रत में माता पार्वती के सती स्वरूप और कोयल रूप की उपासना की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार माता सती ने भगवान शिव के विरह में कोयल बनकर तपस्या की थी. इन दोनों व्रतों का विधि-विधान पूर्वक पालन करने से कुंडली के ग्रह दोष समाप्त होते हैं और सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं.

रवि प्रदोष व्रत: महादेव और सूर्य देव की पूजा विधि, महाउपाय व शुभ मुहूर्त

26 जुलाई 2026

वैदिक मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत की तिथि महादेव और सूर्य देव की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत मंगलकारी मानी जाती है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाले इस व्रत में भगवान शिव और सूर्य नारायण की आराधना का विशेष विधान है. मान्यता है कि इस दिन संध्या काल यानी प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती का पूजन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और सूर्य देव को अर्घ्य देने से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरोगी जीवन का वरदान मिलता है. इसके अलावा, रवि प्रदोष के दिन विशेष महाउपाय करने से सरकारी नौकरी और रोजगार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, पितृ दोष का निवारण होता है तथा कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है. कार्यक्रम में व्रत के नियम, सावधानियां और 26 जुलाई के शुभ मुहूर्त के बारे में भी विस्तार से बताया गया है.

चातुर्मास की शुरुआत: मांगलिक कार्यों पर विराम, जानें 4 महीनों का महत्व और मनोकामना पूर्ति के उपाय

25 जुलाई 2026

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है, जिससे चार महीनों के लिए विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृहप्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी. धर्म ग्रंथों के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में क्षीर सागर में विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं. चातुर्मास के अंतर्गत सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक ये चार पवित्र महीने आते हैं. सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना की जाती है, जबकि भाद्रपद में श्री कृष्ण, अश्विन में मां दुर्गा और कार्तिक महीने में पुनः भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. ज्योतिष के अनुसार इस दौरान जप, तप, ध्यान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाओं की सिद्धि होती है. चातुर्मास में सात्विक आहार अपनाने, एक समय भोजन करने तथा खान-पान में सावधानी रखने का विधान बताया गया है.

देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि की योगनिद्रा, चतुर्मास में शिव पूजा और समृद्धि के महाउपाय

24 जुलाई 2026

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसके साथ ही चतुर्मास का शुभारंभ होता है. इन चार महीनों के दौरान विवाह, मुंडन और गृहप्रवेश जैसे सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है और सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं. मान्यता है कि दैत्यराज बलि के दान से प्रसन्न होकर श्रीहरि ने उन्हें पाताल लोक में वास करने का वचन दिया था, जिसके चलते वे चार माह पाताल में शयन करते हैं. देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन, तुलसी दल अर्पण, दीपदान और 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शाम को घर के मुख्य द्वार, पूजा घर, रसोई और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और समृद्धि का वास होता है. इस पवित्र काल में संयम, सात्विकता और साधना का विशेष महत्व होता है.

बुरी आदतें, नशा और गुस्सा छुड़ाएंगे ये जादुई रत्न, जानिए मोती पहनने के फायदे और नुकसान

23 जुलाई 2026

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की खराब स्थिति के कारण इंसान में गुस्सा, आलस और नशे जैसी बुरी आदतें पनपने लगती हैं. इन आदतों से छुटकारा पाने के लिए कुछ खास रत्नों का प्रयोग बेहद असरदार साबित हो सकता है. शनि और राहु के कारण होने वाली नशे की लत को जमुनिया, गोमेद या मैलाकाइट धारण करके दूर किया जा सकता है. वहीं, गुस्से और खराब वाणी को शांत करने के लिए सुनहरा या मोती पहनना लाभदायक होता है. आलस्य दूर करने के लिए गार्नेट या नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा, चंद्रमा का रत्न मोती मन को शांत करता है और तनाव दूर करता है. हालांकि, मोती हर किसी को सूट नहीं करता. यदि कुंडली में चंद्रमा पीड़ित हो, तो मोती पहनने से अवसाद या नुकसान भी हो सकता है. इसलिए मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वालों के लिए ही इसे शुभ माना गया है. किसी भी रत्न को धारण करने से पहले ज्योतिष की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

गुप्त नवरात्रि में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूरी होगी हर मनोकामना

22 जुलाई 2026

गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर माता दुर्गा की विशेष उपासना का बहुत महत्व है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल प्राप्त होता है. यह स्तोत्र जीवन की सभी बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा और रोगों को दूर करने में सहायक है. इसके साथ ही देवी कवच का पाठ करने से अकाल मृत्यु, दुर्घटनाओं और तंत्र-मंत्र के प्रभाव से बचा जा सकता है. दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो साधक को सौभाग्य और आरोग्यता प्रदान करते हैं. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले उत्कीलन मंत्र का जाप करना आवश्यक माना गया है. पाठ के दौरान लाल वस्त्र धारण करना, लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना उत्तम फलदायी होता है. गुप्त नवरात्रि में विधि-विधान से की गई देवी की यह साधना साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है.

मेहंदीपुर बालाजी:प्रसाद, पीछे न मुड़ने और तालों की परंपरा की पड़ताल

21 जुलाई 2026

कार्यक्रम ‘प्रार्थना हो स्वीकार’ में राजस्थान के दौसा स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और प्रचलित धारणाओं की पड़ताल की गई। प्रस्तुति में बताया गया कि कई श्रद्धालु दर्शन के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखते और मंदिर का प्रसाद घर नहीं ले जाते। मंदिर परिसर में लगाए गए तालों को परेशानियां वहीं छोड़ने का प्रतीक माना जाता है, जबकि दीवारों पर हथेलियों के निशान संकट से मुक्ति की धारणा से जोड़े जाते हैं। बालाजी के साथ भैरव बाबा और प्रेतराज सरकार के दर्शन की परंपरा का भी उल्लेख किया गया। कुछ श्रद्धालुओं और जानकारों ने प्रसाद न ले जाने तथा पीछे न देखने जैसी बातों को भ्रांति बताया। कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए डॉक्टर या मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और देवस्थल के दर्शन को चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

अग्नि के अचूक उपाय और पचेटी माता मंदिर का रहस्य, जहां मिलता है मन्नत का पट्टा

20 जुलाई 2026

सनातन धर्म में अग्नि को पंच महाभूतों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। यह देवताओं और मनुष्यों के बीच संपर्क का मुख्य माध्यम मानी जाती है। विज्ञान के अनुसार भी पृथ्वी के ठंडे होने पर ही जीवन की शुरुआत हुई थी। अग्नि का प्रयोग हवन, दीप और चूल्हे के रूप में किया जाता है। इसके सही प्रयोग से जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं, लेकिन इसका अपमान करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में स्थित पचेटी माता का मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भक्त विवाह, नौकरी, संतान और जमीन से पानी निकालने जैसी मनोकामनाओं के लिए आते हैं। मंदिर में माता की मूर्ति पर नारियल का टुकड़ा (चटक) लगाया जाता है। अगर वह टुकड़ा नीचे गिर जाता है, तो इसे माता का 'पट्टा' या आशीर्वाद माना जाता है, जिसका अर्थ है कि भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होगी।

व्रत और उपवास में क्या है अंतर? जानिए इसके आध्यात्मिक, वैज्ञानिक फायदे और एकादशी का महत्व

19 जुलाई 2026

सनातन संस्कृति में ईश्वर की उपासना के लिए व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। व्रत एक संकल्प है, जिसमें तन और मन की शुद्धि के साथ नियमों का पालन किया जाता है, जबकि उपवास मुख्य रूप से आहार से संबंधित है जिसमें निराहार रहना शामिल होता है. व्रत रखने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से भी कई फायदे होते हैं. इससे शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. शास्त्रों में एकादशी को सर्वश्रेष्ठ व्रत माना गया है. इसके अलावा प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के उपवास भी विशेष फलदायी होते हैं. व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल और फलाहारी. स्वस्थ व्यक्ति निर्जल व्रत रख सकते हैं, जबकि अन्य लोगों को जलीय या फलाहारी उपवास रखना चाहिए. व्रत के दौरान सात्विक भोजन, फल, साबूदाना और दूध का सेवन किया जा सकता है. हालांकि, शारीरिक रूप से कमजोर या डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

हनुमान जी की पूजा से मिलेगी नौकरी में तरक्की, दूर होगी धन की कमी और बजरंग बाण से मिटेंगे सारे कष्ट

18 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में महाबली हनुमान की महिमा और उनकी पूजा से जुड़े अचूक उपायों के बारे में बताया गया है. मान्यता है कि बजरंगबली की आराधना से जीवन की हर बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है. घर में कलह और अशांति दूर करने के लिए मंगलवार को पीपल के पत्ते पर 'हनुमते नमः' लिखकर हनुमान जी के चरणों में अर्पित करने की सलाह दी गई है. नौकरी और कारोबार में तरक्की के लिए लाल कपड़े में सिंदूर और चमेली का तेल भेंट करने से लाभ मिलता है. धन लाभ के लिए मंगलवार को घर में राम दरबार स्थापित कर पीपल के 11 पत्तों पर राम-राम लिखकर जल में प्रवाहित करने का उपाय बताया गया है. इसके अलावा, शत्रुओं और बुरी नजर से बचाव के लिए राम रक्षा स्तोत्र और बजरंग बाण का पाठ बेहद कारगर माना जाता है. हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से आरोग्य, सौंदर्य और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है.

कुंडली में कमजोर शुक्र के लक्षण, दांपत्य जीवन पर प्रभाव और मजबूत करने के अचूक ज्योतिषीय उपाय

17 जुलाई 2026

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुंदरता, ऐश्वर्य, वैभव और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है. गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में शुक्र ग्रह के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है. ज्योतिषियों के अनुसार, यदि कुंडली में शुक्र मजबूत हो तो व्यक्ति को धन, धान्य, सम्मान और सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है. ऐसे लोग मीडिया, फिल्म या कला के क्षेत्र में नाम कमाते हैं. वहीं, शुक्र के कमजोर होने पर दांपत्य जीवन में कलह, आर्थिक कष्ट, त्वचा रोग और मधुमेह जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. अंगूठे में दर्द होना भी कमजोर शुक्र की निशानी है. शुक्र को बलवान बनाने के लिए शुक्रवार को शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करना चाहिए. इसके अलावा 'ओम नमः शिवाय' या 'ओम शुं शुक्राय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी होता है. मां लक्ष्मी की आराधना, महिलाओं का सम्मान, गौ सेवा और सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल या चांदी का दान करने से भी शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं.