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प्रार्थना हो स्वीकार

वामन जयंती पर ऐसे करें श्रीहरि की पूजा, जानिए पूजन विधि और महत्व

22 सितंबर 2026

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र के रूप में वामन अवतार लिया था. यह श्री हरि का पांचवां अवतार माना जाता है, जिसका उद्देश्य देवताओं के संकट को दूर करना और राजा बलि के अहंकार को समाप्त करना था. कथा के अनुसार, भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगकर संपूर्ण ब्रह्मांड और स्वर्ग लोक को नाप लिया था तथा तीसरा पग राजा बलि के मस्तक पर रखकर उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया. इस पावन तिथि पर भगवान वामन की प्रतिमा स्थापित कर पंचोपचार अथवा षोडशोपचार विधि से पूजन और व्रत करने का विधान है. मान्यता है कि इस दिन श्री हरि के मंत्रों के जप, कथा श्रवण और सफेद वस्तुओं के दान से अहंकार और पापों से मुक्ति मिलती है तथा खोई हुई प्रतिष्ठा और सुख-समृद्धि की पुनः प्राप्ति होती है.

भाद्रपद में परिवर्तिनी एकादशी पर योग निद्रा में करवट बदलते हैं भगवान विष्णु, ऐसे करें पूजा

21 सितंबर 2026

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी या वामन एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान शेष शैया पर शयन कर रहे भगवान विष्णु इस पावन तिथि पर योग निद्रा में पार्श्व यानी करवट बदलते हैं. इस दिन श्रीहरि के वामन स्वरूप, माता लक्ष्मी और गणेश उत्सव के चलते भगवान गणेश की उपासना का विशेष विधान है. इस तिथि पर व्रत रखने से जाने-अनजाने हुए पापों का नाश होता है और साधक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं, जबकि गणेश जी को मोदक और दुर्वा चढ़ाई जाती है. संतान और आर्थिक बाधाओं के निवारण के लिए भी इस दिन विशेष ज्योतिषीय उपाय और मंत्र जप किए जाते हैं. इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र, जूते या छाते का दान करने का बड़ा महात्म्य बताया गया है.

अष्टविनायक के आठ स्वरूपों की महिमा, जानिए किस रूप की उपासना से दूर होंगे जीवन के कौन से कष्ट

20 सितंबर 2026

सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता माना गया है. पौराणिक मान्यताओं और मुद्गल पुराण के अनुसार भगवान गणपति के आठ प्रमुख अवतार विभिन्न असुरों के संहार और भक्तों के कष्ट निवारण के लिए हुए. इनमें वक्रतुंड स्वरूप शत्रु बाधा को शांत करता है, जबकि एकदंत रूप की उपासना से स्मरण शक्ति और कार्यों की रुकावटें दूर होती हैं. महोदर स्वरूप ज्ञान और विद्या की प्राप्ति कराता है, वहीं गजानन स्वरूप मानसिक शांति और सात्विक विचारों का संचार करता है. धन की प्राप्ति और रुका हुआ धन वापस पाने के लिए लंबोदर स्वरूप की पूजा फलदायी मानी गई है. इसके अलावा अचानक आने वाली पारिवारिक मुसीबतों में विकट स्वरूप, घर में अन्न-धन की समृद्धि के लिए विघ्नराज और असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के लिए धूम्रवर्ण स्वरूप की उपासना तथा विशेष मंत्र जाप करने का विधान है.

बांके बिहारी मंदिर: निधिवन से प्राकट्य की कथा और गर्भगृह में बार-बार पर्दा लगाने का रहस्य

19 सितंबर 2026

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में विराजमान स्वयंभू विग्रह का प्राकट्य स्वामी हरिदास की अनन्य भक्ति और संगीत साधना से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार 16वीं शताब्दी में निधिवन में राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी बांके बिहारी के एक ही विग्रह में समाहित होकर प्रकट हुई थी. मंदिर में स्थापित इस त्रिभंगी प्रतिमा से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं प्रचलित हैं. यहां भगवान के सम्मोहन और भक्त के प्रति उनके आकर्षण के कारण हर दो मिनट में गर्भगृह का पर्दा लगाया जाता है. इसके अलावा, साल में सिर्फ एक बार शरद पूर्णिमा के दिन बिहारी जी बांसुरी धारण करते हैं और केवल अक्षय तृतीया पर उनके चरण दर्शन होते हैं. बाल स्वरूप और रात्रि में रास रचाने की मान्यता के कारण मंदिर में मंगला आरती नहीं कराई जाती है.

राधा अष्टमी पर श्री कृष्ण संग राधा रानी की पूजा का महत्व और संपूर्ण विधि

18 सितंबर 2026

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले राधा अष्टमी पर्व की धार्मिक मान्यता और पूजा विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना श्री कृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और मध्याह्न काल में श्री कृष्ण के साथ राधा जी की संयुक्त पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और वैवाहिक सौहार्द प्राप्त होता है. कार्यक्रम में राधा रानी के प्राकट्य से जुड़ी पौराणिक कथाओं, पंचोपचार पूजन विधि और 'राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र' के नियमित पाठ के आध्यात्मिक लाभों को रेखांकित किया गया है, जिसे भगवान शिव द्वारा वर्णित अत्यंत फलदायी स्तुति माना गया है.

श्री गणेश यंत्र की स्थापना से घर में आएगी सुख-समृद्धि, जानिए पूजा के सही नियम और मंत्र

17 सितंबर 2026

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री गणेश यंत्र को शुभ और विघ्ननाशक माना जाता है. घर या कार्यस्थल पर इसकी स्थापना से रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति की मान्यता है. जानिए श्री गणेश यंत्र को किस दिशा में स्थापित करना चाहिए, पूजा में किन चीजों का प्रयोग करें और कौन-से मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जानें यंत्र से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं.

सिद्धि विनायक स्वरूप की महिमा: जानें बप्पा की पूजा विधि, मंत्र और मन्नत पूरी करने का महत्व | Siddhi Vinayak | Ganesh Chaturthi

16 सितंबर 2026

गणेश उत्सव के पावन अवसर पर जानिए भगवान गणेश के मंगलकारी स्वरूप सिद्धि विनायक की महिमा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप में गणपति की सूंड दाईं ओर मुड़ी होती है और इसे सिद्धपीठ व मन्नत पूरी करने वाले विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है. जानिए सिद्धि विनायक की पूजा विधि, 21 दूर्वा अर्पित करने का महत्व और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ समेत विशेष मंत्रों के बारे में. मुंबई के प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और कथा की जानकारी भी पाएंगे.

गणेश जी की पूजा से दूर होंगे संकट, केतु दोष और वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

15 सितंबर 2026

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और बुद्धि प्रदाता माना जाता है, जिनकी उपासना से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विजय का वरदान मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्य सिद्धि के लिए गणपति को मोदक और दुर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी होता है. शत्रुओं पर विजय के लिए दुर्वा गणेश स्वरूप की पूजा लाभकारी बताई गई है. इसके साथ ही गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ और 'ॐ गं गणपतये नमः' का नियमित जाप हर बाधा का निवारण करता है. केतु ग्रह के नियंत्रक भगवान गणेश होने के कारण उनकी साधना से केतु से जुड़े कष्ट शांत होते हैं. घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में पंचमुखी गणेश जी की स्थापना और नियमित दीपक जलाने की सलाह दी जाती है. पूजन के दौरान पीले वस्त्र धारण करने और गणेश जी को तुलसी दल अर्पित न करने के नियमों का पालन आवश्यक माना गया है.

श्री गणेश के हर अंग में छिपा है कल्याण, जानिए क्या है इनके दिव्य स्वरूप का रहस्य

14 सितंबर 2026

गणेशोत्सव के पावन अवसर पर भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप और उनके विभिन्न अंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है. शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति का बड़ा मस्तक कुशाग्र बुद्धि और नेतृत्व क्षमता का द्योतक है, जबकि उनकी छोटी आंखें हर कार्य को सूक्ष्मता से देखने और परखने की सीख देती हैं. भगवान के बड़े कान सुनने की महत्ता और सूप की तरह सही निर्णय लेने का संदेश देते हैं. गणपति का एकदंत रूप जीवन में हर वस्तु के सदुपयोग और दृढ़ निश्चय को दर्शाता है, जिससे उन्होंने महाभारत ग्रंथ की रचना की. इसके साथ ही भगवान का बड़ा उदर यानी लंबोदर स्वरूप हर अच्छी-बुरी बात को पचाने और खुशहाली का प्रतीक है. वहीं, गणपति की सक्रिय सूंड़ कर्म पर नियंत्रण और सजगता का संदेश देती है. मूषक वाहन चंचल मन और इच्छाओं पर संयम का प्रतीक माना गया है. भगवान गणेश की चार भुजाएं और शस्त्र मनुष्य को सांसारिक बंधनों, मोह और बुराइयों से मुक्ति की प्रेरणा देते हैं.

गणेश उत्सव पर गणपति पूजन विधि, पत्तों के अर्पण के नियम और मनोकामना पूर्ति के महाउपाय

13 सितंबर 2026

गणेश उत्सव के पावन अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और विशेष ज्योतिषीय उपायों की संपूर्ण जानकारी दी गई है. कार्यक्रम में बताया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले दस दिवसीय गणेश महोत्सव में गणपति की पूजा कैसे विधि-विधान से करनी चाहिए. भगवान गणेश को मोदक, दूर्वा, पीले वस्त्र और सिंदूर अर्पित करने का विशेष महत्व है. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के पत्तों को विशेष मंत्रों के साथ अर्पित कर संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य, कार्य बाधा निवारण, आर्थिक लाभ और शनि दोष शांति के उपाय बताए गए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पौराणिक कारणों से गणेश पूजन में तुलसी दल वर्जित है. विवाह में देरी, नौकरी में अड़चन और नया मकान बनाने की कामना के लिए भी विशेष मंत्र जप और पूजन विधान साझा किए गए हैं.

हरतालिका तीज: अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख के लिए जानें पूजा विधि व उपाय

12 सितंबर 2026

हरतालिका तीज का पावन पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है. यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा करती हैं. कार्यक्रम में हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है. इसके अलावा विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और दांपत्य जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय और महामंत्र का जाप करने की विधि भी बताई गई है.