कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील केवल हिंदू ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लोगों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। समुद्र तल से 22,028 फीट ऊंचा कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इस पवित्र पर्वत की यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़, सिक्किम के नाथु ला दर्रा और नेपाल के रास्ते से की जाती है। कैलाश पर्वत अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है। माना जाता है कि इस पर्वत पर आज तक कोई इंसान नहीं चढ़ सका है। इसके पास दो मुख्य झीलें मौजूद हैं, मीठे पानी की मानसरोवर झील जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है, और खारे पानी की राक्षस ताल जहां जीवन नहीं पनपता। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार कैलाश का आकार एक पिरामिड जैसा है और यहां समय तेजी से बीतने, बाल और नाखून जल्दी बढ़ने जैसी अलौकिक घटनाओं का दावा किया जाता है। विभिन्न पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में इस पवित्र स्थल की महिमा और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, जिसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की उपासना करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. स्नान, ध्यान और दान का इस तिथि पर बहुत पुण्यदायी फल मिलता है. गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों को जल, फल, छाता या चप्पल दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. वट वृक्ष की परिक्रमा और पूजा कर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. संतान प्राप्ति के लिए इस दिन बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और तुलसी के पास विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. साथ ही, घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भगवान वराह की तस्वीर ईशान कोण में लगाने और आम के पत्तों का वंदनवार मुख्य द्वार पर बांधने के उपाय भी बताए गए हैं. सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाती है.
सनातन धर्म में मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष माना गया है. शास्त्रों में मोक्ष प्राप्ति के कई साधन बताए गए हैं, जिनमें से एक है 'सप्तपुरी' की यात्रा. ये सात पवित्र नगरियां हैं - अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारका. मान्यता है कि देवों से जुड़ी ये प्राचीन नगरियां साक्षात मोक्ष का द्वार हैं. अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है, तो मथुरा श्रीकृष्ण की लीलाओं का गवाह. हरिद्वार को हरि का प्रवेश द्वार माना जाता है, जबकि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी अविनाशी नगरी है. कांचीपुरम ब्रह्मा और शिव की उपासना का केंद्र है, उज्जैन में भगवान महाकाल विराजमान हैं, और द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था. सतयुग से लेकर कलियुग तक इन सातों नगरियों का नाता देवताओं से रहा है, इसलिए सनातन शास्त्र इन सभी को मोक्षदायिनी कहते हैं.
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना स्वीकार' में भगवान शनिदेव के न्याय और उनके प्रकोप से बचने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई है. शनिदेव को ब्रह्मांड का दंडाधिकारी और न्यायकर्ता माना जाता है, जो इंसानों को उनके कर्मों के आधार पर फल देते हैं. बुरे कर्म करने वालों को शनि की साढ़ेसाती, महादशा और ढैय्या के दौरान भारी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, ज्योतिष के जानकारों के अनुसार कुछ विशेष उपायों से शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है. पीपल के पेड़ के पास चींटियों को गुड़ और तिल खिलाना, तिल के तेल का दीपक जलाना और लोहे का छल्ला धारण करना बेहद लाभकारी माना गया है. इसके अलावा, शनिदेव की कृपा पाने के लिए 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' जैसे चमत्कारी मंत्रों का जाप और छाया दान करने की विधि भी बताई गई है. सही आचरण रखने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं.
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में मंत्रों के विज्ञान और उनके रहस्य पर विस्तार से चर्चा की गई है. प्राचीन काल से ही मंत्रों को बहुत शक्तिशाली माना जाता है. मंत्रों का जाप करते समय उत्पन्न होने वाली ध्वनि और तरंगों का व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव पड़ता है. मंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार से जपे जाते हैं- जोर से, जिह्वा हिलाकर और मानसिक रूप से. इनमें मानसिक जाप को सबसे उत्तम माना गया है. मंत्र जाप के लिए स्थान, समय और आसन एक ही होना चाहिए. इसकी शुरुआत पूर्णिमा या अमावस्या से करनी चाहिए. साथ ही, जाप के तुरंत बाद जल स्पर्श न करने जैसी सावधानियों का भी ध्यान रखना चाहिए. इसके अलावा रामचरितमानस की विभिन्न चौपाइयों का उपयोग रोजगार, विवाह, विद्या प्राप्ति और रोग निवारण के लिए अचूक मंत्रों के रूप में किया जा सकता है. सही विधि से मंत्र जाप करने पर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। 'गुड न्यूज़ टुडे' के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में बताया गया है कि इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास के मार्गदर्शन में महाबली भीम ने इस व्रत को किया था, जिसके बाद से इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहा जाने लगा। मान्यता है कि केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। इस खास दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। व्रत के दौरान फल, मिष्ठान, स्वच्छ जल का घड़ा, पंखा और सफेद शंख का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। अगले दिन सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि पर जल और अन्न का दान करके ही व्रत का पारण किया जाना चाहिए। पूर्ण श्रद्धा के साथ इस उपवास को करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Good News Today के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में सरगम पंत श्रीवास्तव ने गायत्री जयंती के अवसर पर मां गायत्री और उनके महामंत्र की महिमा के बारे में बताया। मां गायत्री को वेदों की जननी और पार्वती, सरस्वती व लक्ष्मी का संयुक्त अवतार माना जाता है। मान्यता है कि गायत्री मंत्र में 24 देवों की शक्ति समाहित है और इसके प्राकट्य की शुरुआत ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि रचना के समय हुई थी। इस महामंत्र के नियमित जाप से मन शांत होता है, तनाव दूर होता है और आत्मशक्ति में वृद्धि होती है। इस खास एपिसोड में बच्चों की शिक्षा, एकाग्रता और ज्ञान बढ़ाने के लिए गायत्री मंत्र के विशेष उपाय बताए गए हैं, जैसे रुद्राक्ष की माला से जाप और भोजपत्र का उपाय। इसके साथ ही घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए तांबे के लोटे और जल से जुड़ा अचूक प्रयोग भी साझा किया गया है। सही नियम और संयम से की गई गायत्री उपासना जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि लाती है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों कई भ्रामक वीडियो वायरल हो रहे हैं। पहले दावे में एक वीडियो शेयर कर कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में अवैध कब्जों पर बुलडोजर एक्शन हो रहा है। गुड न्यूज़ टुडे की फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में यह दावा झूठा साबित हुआ। असल में यह वीडियो बांग्लादेश के चटगांव का है, जहां एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का रैंप बनाने के लिए दुकानों को हटाया गया था। दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया गया कि ईरान ने एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। जांच में सामने आया कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि एआई की मदद से बनाया गया है। इसके अलावा बुलेटिन के आखिरी हिस्से में कुछ दिल छू लेने वाले वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं। इनमें एक बच्ची द्वारा महात्मा गांधी बने बच्चे को खाना खिलाना, गाय को पानी पिलाती बच्ची, नारियल के खोल से कलाकृतियां बनाता बुजुर्ग और बॉलीवुड गाने गाती विदेशी महिला शामिल हैं।
सनातन धर्म में 108 के अंक को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों में 108 मनकों की माला का ही उपयोग किया जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है और पृथ्वी से सूर्य की दूरी भी सूर्य के व्यास की 108 गुना है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं, जिनका गुणनफल 108 आता है। इसी तरह 27 नक्षत्रों के चार चरणों का गुणनफल भी 108 ही होता है। योग विज्ञान के मुताबिक, मानव शरीर में 108 मुख्य नाड़ियां होती हैं जो हृदय चक्र में मिलती हैं। इसके अलावा उपनिषदों की संख्या 108 है और भगवान शिव के तांडव में 108 मुद्राएं शामिल हैं। जैन और बौद्ध धर्म में भी 108 अंक का विशेष महत्व बताया गया है। समुद्र मंथन के दौरान भी 54 देवता और 54 राक्षस यानी कुल 108 लोग शामिल थे। यही कारण है कि 108 को ब्रह्मांड की ऊर्जा और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
21 जून को पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है. योग से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं. महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं. योगासनों में सूर्य नमस्कार को सबसे उत्तम माना गया है. सूर्य नमस्कार के 12 आसनों के नियमित अभ्यास से मोटापा दूर होता है, शरीर में लचीलापन आता है, पाचन तंत्र सुधरता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसे सुबह खाली पेट उगते सूर्य के सामने करना चाहिए. सूर्य नमस्कार करते समय 12 विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है. कमर या रीढ़ की हड्डी की समस्या वाले लोगों को इसे करने से बचना चाहिए. जो लोग शारीरिक रूप से सूर्य नमस्कार करने में असमर्थ हैं, वे सूर्य के सामने पद्मासन या सुखासन में बैठकर इसके मंत्रों का जाप कर सकते हैं. काले कपड़े पहनकर और अभ्यास के तुरंत पहले या बाद में पानी पीने से बचना चाहिए.
योग, ध्यान और साधना के जरिए आत्मा का परमात्मा से मिलन संभव माना जाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह श्वास, ध्यान और जीवन शैली का एक समग्र विज्ञान है। वैदिक काल से चली आ रही यह साधना मन को एकाग्र करती है और तनाव को दूर कर जीवन में संतुलन लाती है। महर्षि पतंजलि ने चित्त वृत्तियों के नियंत्रण को योग कहा है और इसके आठ अंग बताए हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इन आठों अंगों को मिलाकर अष्टांग योग कहा जाता है। योग सूत्र की रचना के कारण महर्षि पतंजलि को योग का पिता कहा जाता है। योग सूत्र को चार भागों में बांटा गया है, जिन्हें पाद कहते हैं- समाधि पाद, साधन पाद, विभूति पाद और कैवल्य पाद। अष्टांग योग के पालन से मनुष्य का तन स्वस्थ और मन शांत रहता है। इसके अभ्यास से इंद्रियों पर पूर्ण संयम प्राप्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति के शिखर पर पहुंचकर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।