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प्रार्थना हो स्वीकार

चातुर्मास का महीना क्यों है आपके लिए खास, भगवान कैसे सुनेंगे आपकी मनोकामना जानिए

06 जुलाई 2022

चातुर्मास की शुरुआत 10 जुलाई से हो जाएगी. इस दिन से सारे शुभ काम बंद हो जाएंगे क्योंकि देवशयनी एकादशी से श्रीहरि योनिद्रा में चले जाएंगे. लेकिन चातुर्मास के इन 4 महीनों में आपकी कई मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. आज के इस एपिसोड में हम जानेंग चातुर्मास की महिमा और जानते हैं क्यों इतना खास है चातुर्मास. देवशयनी एकादशी से श्रीहरि योग निद्रा में लीन हो जाते हैं.देवशयनी एकादशी से देव उठनी एकादशी तक भगवान श्री हरि चार महीने विश्राम करते हैं. इसलिए इन 4 महीनों में कोई भी शुभ काम नहीं होंते हैं. देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक होता है चातुर्मास. क्या आप जानते हैं कि ये 4 महीने बेहद खास हैं. ज्योतिषी मानते हैं कि चातुर्मास में भले ही शुभ कामों की मनाही हो लेकिन पूजा उपासना और कुछ खास प्रयोंगों से काम बनाए जा सकते हैं. तो चलिए सबसे पहले आपको बताते हैं क्यों खास है चातुर्मास.

दीपक जलाने का क्या है शास्त्रीय विधान, पूजा में दीपक का क्या है महत्व, जानिए

05 जुलाई 2022

हिन्दू धर्म में पूजा के समय दीपक जलाने का अपना अलग ही महत्व है. पूजा के समय दीपक जलाने के पीछे यह मन्‍याता है कि इसे शुभ माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि बिना दीपक जलाए पूजा अधूरी मानी जाती है. साथ ही, ऐसा भी माना जाता घर में दीपक जलाने से वास्तु दोष दूर होता है. वैसे दीपक जलाने को सकारात्‍मक रूप में भी देखा जाता है, इसे अपने जीवन से अंधकार हटाकर प्रकाश फैलाने के तौर पर देखा जाता है. प्रकाश ज्ञान का प्रतीक होता है. मिट्टी का एक दीया और इसमें एक रूई की बाती और गाय की घी यही स्वरूप होता है आस्था के शास्त्रीय दीपक का जिसमें सबकुछ प्राकृतिक होता है.

जुलाई में पांच ग्रह करेंगे राशि में परिवर्तन, आपकी राशि पर क्या पड़ेगा इसका असर, जानिए

04 जुलाई 2022

जुलाई में कई बड़े ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन होगा. बता दें कि 2 जुलाई को ग्रहों के राजकुमार बुध मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे जबकि 12 जुलाई को शनि वक्री अवस्था में आएंगे. जुलाई के इस महीने में पूरे पांच ग्रह अपनी राशि में परिवर्तन करने वाले हैं. वहीं इसका आपकी राशि पर क्या पड़ेगा असर, जानते हैं आज के इस एपिसोड में.

इस धाम में शिव और शक्ति साथ में हैं विराजमान, भक्तों की हर मुराद हो जाती है पूरी

02 जुलाई 2022

ये अकेला ऐसा धाम हैं जहां शिव और शक्ति साथ में विराजमान हैं. इस धाम में भगवान शंकर का श्रृंगार देखने के लिए देश के कोने कोने से भक्त पहुंचते हैं. शिव के इस धाम में मां दुर्गा की शक्ति की झलक मिलती है. इस धाम में आने वाले हर किसी भक्त की मुराद शंकर भगवान पूरी करते हैं. इस धाम का इतिहास भा काफी पुराना है. भगवान शिव के इस दरबार में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं दिखता. कंतेशवर महादेव में शिव अपने भक्तों को बड़े ही अनोखे रूप में दर्शन देते हैं.

जानिए सुंदरकांड पाठ की महिमा, जिससे दूर हो जाती है सभी तरह की विपदा

01 जुलाई 2022

प्रभु श्रीराम और श्री हनुमान की कृपा एक साथ पाने का सबसे सरल और सटीक उपाय है सुंदरकांड का पाठ. श्रीरामचरितमानस के इस अध्याय की महिमा अपरंपार है. रोग,दोष हो या ग्रह क्लेश मंगल दोष हो या फिर कर्ज से मुक्ति का आपको चाहिए समाधान विपदा कैसी भी हो सुंदरकांड के पाठ से सब कुछ संभव हो जाती है. आज हम आपको सुंदरकांड की महिमा बताएंगे. देखिए प्रार्थना हो स्वीकार.

1 जुलाई से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, जानिए इसकी परंपराएं

30 जून 2022

1 जुलाई यानी आषाढ शुक्ल पक्ष की द्वीतीया तिथि पर पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है. रथ यात्रा का इतिहास तो अति प्राचीन माना गया है. रथ यात्रा का ये उत्सव केवल यात्रा का उत्सव भर नहीं होता, बल्कि 9 दिनों तक चलने वाली यात्रा में सैकड़ों परंपराएं निभाई जाती हैं. जैसे रथ यात्रा से पहले देव बीमार क्यों पड़ जाते हैं. भगवान जगन्नाथ की मासी गुंडची कौन हैं. रथ यात्रा से मां लक्ष्मी का संबंध क्या है.और तो और क्रोध में मंदिर लौटने से पहले मां लक्ष्मी भगवान का रथ तोड़ क्यों देती हैं. आज इन सभी परंपराओं से आपको रूबरू करवाएंगे. देखिए प्रार्थना हो स्वीकार.

इन व्रतों को करने से होंगे संकट और बाधाएं कोसों दूर, जानें गुप्त नवरात्रि की महिमा

29 जून 2022

साल में 4 बार नवरात्रि (Navratri 2022) का त्योहार आता है, गुप्त नवरात्र आषाढ़ मास में पड़ते हैं. इस साल आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि (Gupta Navratri 2022) 30 जून दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रही है. जो 8 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान मां भगवती की कृपा पाने से सारी मनोकामना पूरी हो जाती हैं. संकट और बाधाएं उनसे कोसों दूर हो जाते हैं. इस साल गुप्त नवरात्रि बेहद ही शुभ संयोग में शुरू हो रहे हैं. सामान्य नवरात्र में सात्विक और गुप्त दोनों ही पूजाओं का विधान है. जबकि गुप्त नवरात्र में मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए मुख्य रूप से विशेष साधना की जाती हैं. गुप्त नवरात्र का ज्यादा प्रचार नहीं होता है. इसमें अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है. माना जाता है कि गुप्त नवरात्र में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी मनोरथ उतना ही जल्दी परिपूर्ण और सिद्ध होती हैं.

जानिए बाबा अमरनाथ की गुफा को लेकर क्या है शास्त्रीय मान्यता

28 जून 2022

आषाढ़ पूर्णिमा से ही बाबा अमरनाथ की यात्रा शुरु हो जाती है. इस बीच भक्तों का जम्मू पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. यहां बेस कैंप में भक्तों का रजिस्ट्रेशन चल रहा है. यात्रा के लिए सभी सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर लिए गए हैं. मान्यता है कि बाबा अमरनाथ का दर्शन पूजन करने से वाराणसी के काशीविश्व नाथ बाबा के पूजन से सौ गुना ज्यादा पुण्य लाभ होता है.

मंगल ग्रह का राशि परिवर्तन से किस पर क्या पड़ेगा प्रभाव, जानिए

27 जून 2022

ज्योतिष इस पूरे ब्रह्माण्ड को 360 डिग्री में बांटता है. इसी में 27 नक्षत्र, 9 ग्रह और 12 राशियां अपना सफर तय करते हैं. जिनकी उर्जा से इंसान का जीवन प्रभावित होता है. इस बार मंगल ग्रह ने अपनी राशि बदल ली है. जिसके चलते लोगों की जिंदगी पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा. आइये जानते है कि मंगल ग्रह का राशि परिवर्तन से किस पर क्या प्रभाव पड़ेगा. देखिए प्रार्थना हो स्वीकार.

हर मांगलिक कार्य से पहले इसलिए होती है नारियल की पूजा, जानिए

25 जून 2022

त्योहार कोई भी नारियल का महत्व होता है. कोई मनोकामना हो तो भी हम नारियल ही चढ़ाते हैं. गृह प्रवेश हो या फिर नयी गाड़ी नारियल हर किसी में मायने रखता है. नारियल शुभता का प्रतीक माना जाता है. घर में सौभाग्य लाता है नारियल. इसे श्रीफल भी कहा जाता है. फलों में इसे सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता हो. नारियल में त्रिदेवों का वास माना गया है. इसके पूजन से इनका वरदान मिलता है. इसे देवी देवताओं का प्रिय भोग माना जाता है. नारियल से प्रसाद की पूर्ति होती है. इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है.

इस शिव मंदिर की तर्ज पर बना है संसद, जानिए क्या है पौराणिक कहानी

24 जून 2022

मध्य प्रदेश में शिव का एक धाम ऐसा भी है जहां की मान्यता है कि यहां भगवान शंकर अकेले नहीं बल्कि मां पार्वती की 64 सखियों या कहे सहचरियों के साथ विराजते हैं. 900 साल पुराने इस मंदिर को कच्छप वंश के राजा ने बनवाया था. जिससे प्रेरित होकर लुटियंन ने भारतीय संसद का गोलाकार नक्शा बनाया था. केंद्रीय मंदिर में भगवान शंकर का शिवलिंग विराजमान है. साथ ही मां पार्वती का भी शिवलिंग विराजमान है. जिसे आध्यात्मिक साधना के जानकार शिव और साधक का स्वरूप मानते हैं. केंद्रीय मंदिर में स्थापित मंदिर में भगवान शंकर के शिवलिंग को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है.