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प्रार्थना हो स्वीकार

आषाढ़ अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के उपाय, जानें हलहारिणी अमावस्या का महत्व और चंद्र देव की पूजा

13 जुलाई 2026

आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, 13 जुलाई की शाम से अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है, जो 14 जुलाई तक रहेगी। इस तिथि को हलहारिणी अमावस्या और दर्श अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किसान कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और बुवाई की शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, दान, तर्पण और पिंड दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, काले तिल का दान करने और भगवान शिव की पूजा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्व बताया गया है। कुंडली में कमजोर चंद्रमा को बलवान करने के लिए सोमवार का उपवास रखने, चांदी धारण करने और शिव जी को जल अर्पित करने जैसे उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को अपनाने से जीवन में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।

घर में मंदिर की सही दिशा, मूर्तियों के नियम और वास्तु उपाय जो चमका सकते हैं आपका भाग्य

12 जुलाई 2026

घर में एक छोटा सा मंदिर स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, पूजा घर हमेशा ईशान कोण यानी पूर्व-उत्तर दिशा में होना चाहिए। मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां नौ अंगुल से बड़ी और खोखली नहीं होनी चाहिए। पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और वहां सुबह-शाम शुद्ध घी का दीपक जलाना आवश्यक है। घर के मंदिर को जागृत करने के लिए नियमित रूप से एक ही समय पर पूजा और मंत्र जाप करना चाहिए। मंदिर को कभी भी शयनकक्ष, सीढ़ियों के नीचे या शौचालय के पास नहीं बनाना चाहिए। इसके अलावा, पूजा घर में खंडित मूर्तियां, पूर्वजों के चित्र या शनि देव की मूर्ति रखने से बचना चाहिए। सही दिशा और नियमों का पालन करते हुए घर में मंदिर की स्थापना करने से आर्थिक समृद्धि आती है और परिवार में आपसी तालमेल बना रहता है।

हनुमान जी के 12 चमत्कारी नाम, जाप के फायदे और चित्रकूट की हनुमान धारा का रहस्य

11 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में शगुफ्ता साहिल देव ने हनुमान जी के बारह चमत्कारी नामों की महिमा बताई है. कलयुग में संकट मोचन हनुमान की उपासना सबसे उत्तम फल देती है. उनके बारह दिव्य नाम- हनुमान, अंजनी सुत, वायुपुत्र, महाबली, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उद्धि क्रमण, सीता शोक विनाशन, लक्ष्मण प्राण दाता और दशग्रीव दर्पदा हैं. इन नामों का प्रातः, दोपहर या रात में जाप करने से आयु, धन और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. पीले कागज पर लाल रंग से इन नामों को लिखकर मुख्य द्वार पर लगाने या भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर लॉकेट में पहनने से व्यक्ति की रक्षा होती है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित हनुमान धारा का भी वर्णन किया गया है. पौराणिक कथा के अनुसार, लंका दहन के बाद हनुमान जी की पूंछ की जलन शांत करने के लिए भगवान राम ने अपने बाण से यह शीतल जलधारा प्रकट की थी. यहां पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

शनि और राहु को शांत करने के लिए नीले रंग का महाउपाय, जानें धन और रोजगार प्राप्ति के अचूक तरीके

10 जुलाई 2026

शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए नीले रंग का विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नीला रंग न केवल मानसिक तनाव को दूर करता है, बल्कि यह शनि और राहु से जुड़ी समस्याओं के समाधान में भी बेहद कारगर माना जाता है. इस रंग का सही प्रयोग जीवन में धन, रोजगार और सुख-शांति ला सकता है. हालांकि, जल और अग्नि प्रधान कुंडलियों के अनुसार नीले रंग के इस्तेमाल में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए. नीले रंग के साथ सफेद, पीला या लाल रंग मिलाने से इसके सकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं. इसके अलावा, शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, शनि चालीसा का पाठ करने और निर्धनों को दान देने जैसे उपायों से आर्थिक और व्यावसायिक बाधाएं दूर की जा सकती हैं. नीले रंग की शुभता सनातन धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों में भी गहराई से जुड़ी हुई है.

योगिनी एकादशी पर ऐसे करें श्री हरि की पूजा, दीपक के महाप्रयोग से दूर होगी नौकरी और रोगों की बाधा

09 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर सरगम पंत श्रीवास्तव ने योगिनी एकादशी के महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताया है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आती है। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की उपासना से जीवन के सभी पापों और शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इसका महत्व बताते हुए हेम माली की कथा सुनाई थी, जिसे योगिनी एकादशी के प्रभाव से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी। इस खास दिन निर्धनों को दान, पीपल के पेड़ की पूजा और घर के मुख्य द्वार व तुलसी के पास घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, नौकरी और रोजगार की बाधाएं दूर करने के लिए भगवान शिव को श्वेत चंदन और हनुमान अष्टक का पाठ करने जैसे महाप्रयोग भी बताए गए हैं।

प्रार्थना करने का सही तरीका, इसके नियम और जीवन में होने वाले चमत्कारी फायदे

08 जुलाई 2026

ईश्वर की आराधना सच्चे मन से की जाए तो प्रार्थना का संपूर्ण फल मिल सकता है. प्रार्थना के प्रभाव से आत्मा सीधे परमात्मा से जुड़ जाती है. प्रार्थना में बड़ी शक्ति होती है, लेकिन यह तभी स्वीकार होती है जब इसे करने का तरीका सही हो. सही जगह और सही स्थिति में प्रार्थना करने से इसका निश्चित लाभ मिलता है. कभी-कभी प्रार्थनाएं नाकाम हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण दूषित भाव, दूसरों का बुरा चाहना या आहार-व्यवहार पर नियंत्रण न होना है. एकांत स्थान पर, रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर, शुद्ध वातावरण में अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करनी चाहिए. मध्य रात्रि में की गई प्रार्थना जल्दी स्वीकार होती है. प्रार्थना से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है. हालांकि, प्रार्थना का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति कर्म करना छोड़ दे, बल्कि कर्म की प्रेरणा प्रार्थना से ही मिलती है.

पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने का रहस्य और अकूत खजाने का सच

07 जुलाई 2026

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को भारत का सबसे धनी मंदिर माना जाता है। इस मंदिर का संचालन आज भी त्रावणकोर शाही परिवार के एक प्रशासनिक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के पांच तहखानों को खोला गया था, जिनमें से करीब एक लाख करोड़ रुपए की अकूत धन-संपदा प्राप्त हुई थी। हालांकि, मंदिर का छठा तहखाना आज भी एक रहस्य बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, इस तहखाने की रक्षा नाग देवता करते हैं और इसे विशेष नाग मंत्रों से बंद किया गया है। लोगों का मानना है कि इस दरवाजे को खोलने से भयंकर प्राकृतिक आपदा या प्रलय आ सकती है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं, जिसे 1208 पवित्र शालिग्राम पत्थरों से बनाया गया है। 1750 में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने अपना संपूर्ण राज्य भगवान पद्मनाभस्वामी को समर्पित कर दिया था, जिसे त्रिपड़ी दानम कहा जाता है।

हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक और धार्मिक रहस्य

06 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में हिंदू धर्म की सदियों पुरानी परंपराओं के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा की गई है। सनातन धर्म में व्रत रखने, बड़ों के चरण स्पर्श करने, माथे पर तिलक लगाने और सूर्य को जल चढ़ाने जैसी कई मान्यताएं हैं। व्रत रखने से जहां शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं और पाचन तंत्र ठीक रहता है, वहीं हाथ जोड़कर नमस्ते करने से उंगलियों पर पड़ने वाला दबाव एक्यूप्रेशर का काम करता है, जिसका सीधा असर आंख, कान और दिमाग पर पड़ता है। इसके अलावा, माथे पर तिलक लगाने से आज्ञा चक्र नियंत्रित होता है और एकाग्रता बढ़ती है। उगते सूर्य को जल चढ़ाने से आंखों की रोशनी तेज होती है और शरीर को विटामिन डी मिलता है। तुलसी के पौधे की पूजा भी वातावरण को शुद्ध करती है और इम्युनिटी बढ़ाती है। ये सभी सनातनी परंपराएं मानव कल्याण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम करती हैं।

महादेव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की कथा, शिव और शक्ति के बिना सृष्टि का निर्माण क्यों है अधूरा?

05 जुलाई 2026

सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना गया है. शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप में शिव और शक्ति दोनों समाहित हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन और गति के लिए आवश्यक हैं. इस वीडियो में जानिए कि महादेव ने अर्धनारीश्वर रूप क्यों धारण किया था. पौराणिक कथा के अनुसार, भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की पूजा करते थे और माता पार्वती की उपेक्षा करते थे. उनकी इस भूल को सुधारने और सृष्टि के सृजन का संदेश देने के लिए शिव ने माता पार्वती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर रूप लिया था. इसके अलावा, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब जीवों की वृद्धि के लिए भगवान शिव ने इसी स्वरूप में प्रकट होकर उन्हें स्त्री और पुरुष के मिलन से प्रजनन की प्रेरणा दी थी. अर्धनारीश्वर स्वरूप की उपासना करने से दांपत्य जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.

महिलाओं के लिए हनुमान पूजा के क्या हैं नियम और कैसे करें बजरंगबली की उपासना?

04 जुलाई 2026

हिंदू धर्म में संकट मोचन हनुमान की उपासना का विशेष महत्व है. कलयुग में भगवान हनुमान को सबसे सिद्ध और शीघ्र फल देने वाला देवता माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, बाल ब्रह्मचारी होने के कारण हनुमान जी की पूजा में महिलाओं के लिए कुछ विशेष नियम और वर्जनाएं हैं. महिलाएं दीप जला सकती हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान अष्टक का पाठ कर सकती हैं. साथ ही वे बजरंगबली को भोग भी अर्पित कर सकती हैं. लेकिन, महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति का स्पर्श करने की मनाही होती है क्योंकि वह सभी स्त्रियों को माता के समान मानते हैं. इसके अलावा मंगलवार के दिन विशेष उपाय करके भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं. धन प्राप्ति के लिए लाल पुष्प अर्पित करना और विद्या के लिए विशिष्ट मंत्रों का जाप करना लाभकारी बताया गया है. नियमों का सही पालन करने से बल, बुद्धि और विद्या का वरदान मिलता है.

धर्म, ज्योतिष और मनोविज्ञान में क्या है सपनों का रहस्य और आपके जीवन पर इसका गहरा प्रभाव

03 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में सपनों की दुनिया और उनके रहस्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है. धर्म ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों और स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने हमारे भविष्य की घटनाओं का संकेत देते हैं. रामायण में माता सीता और त्रिजटा के सपने हों या महाभारत में कुंती और गांधारी के अशुभ स्वप्न, ये सभी भविष्य में होने वाली घटनाओं का प्रतिबिंब साबित हुए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रात के अलग-अलग प्रहर में देखे गए सपनों का फल अलग समय में मिलता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना केवल दस दिन में सच हो सकता है. सपने में मृत्यु देखने का अर्थ संकट टलना माना गया है. वहीं विज्ञान और मनोविज्ञान, जैसे सिगमंड फ्रायड और कार्ल जुंग के सिद्धांतों के अनुसार, सपने हमारी दबी हुई इच्छाओं, अवचेतन मन और दिनभर की घटनाओं का परिणाम होते हैं. हालांकि, धर्म और ज्योतिष सपनों को ईश्वरीय संकेत और भविष्य का सूचक मानते हैं.