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प्रार्थना हो स्वीकार

सोमवती अमावस्या के अचूक उपाय और सूर्य के मिथुन गोचर का राशियों पर असर

15 जून 2026

सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर भगवान शिव, चंद्रदेव और पितरों की आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पीपल के वृक्ष की पूजा और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन पितृ दोष और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जा सकते हैं, जैसे काले तिल से तर्पण करना और पान के पत्ते पर धान व हल्दी रखकर तुलसी के पास रखना। इसके साथ ही 15 जून को सूर्यदेव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मिथुन राशि में बुध के पहले से मौजूद होने के कारण बुधादित्य और भद्र योग का निर्माण हो रहा है। सूर्य के इस गोचर से मेष, मिथुन, कन्या, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वालों को विशेष लाभ होगा, जबकि वृषभ, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों को सावधान रहने की आवश्यकता है। इस गोचर के प्रभाव से प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उथल-पुथल की भी संभावना है।

पेड़-पौधों से संवरेगी आपकी किस्मत, जानिए किस ग्रह दोष को दूर करने के लिए कौन सा पौधा लगाएं

14 जून 2026

हमारे आसपास मौजूद पेड़-पौधे न सिर्फ पर्यावरण के लिए जरूरी हैं, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इनका सीधा संबंध हमारे ग्रह-नक्षत्रों और भाग्य से भी होता है। गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' के इस एपिसोड में बताया गया है कि कैसे सही पौधे लगाने से कुंडली के ग्रह दोष दूर किए जा सकते हैं। हर ग्रह का किसी न किसी पौधे से संबंध होता है। उदाहरण के लिए, सूर्य को मजबूत करने के लिए मदार, चंद्रमा के लिए चंदन या बेला, मंगल के लिए आंवला, बुध के लिए दूब, बृहस्पति के लिए केले का पौधा, शुक्र के लिए हरसिंगार और शनि देव की कृपा पाने के लिए शमी का पौधा लगाना चाहिए। इसके अलावा, महादेव को प्रिय बेल का पौधा और भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी का पौधा घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। हालांकि, पीपल का पौधा घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए। इन पौधों को सही दिशा, नक्षत्र और विधि-विधान के साथ लगाने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं.

शादी में हो रही है देरी? जानें विवाह में रुकावट डालने वाले 4 ज्योतिषीय योग और उनके अचूक उपाय

13 जून 2026

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह में देरी या रुकावट के पीछे कई ग्रहों की स्थिति और ज्योतिषीय योग जिम्मेदार होते हैं. कुंडली में कमजोर बृहस्पति और शुक्र के कारण विवाह में विलंब होता है. मुख्य रूप से चार ऐसे योग हैं जो शादी में बाधा डालते हैं. पहला कारण शनि और चंद्र का विष योग है, जिससे विवाह में देरी और अकेलापन आता है. इसका उपाय शिवजी की उपासना है. दूसरा कारण सप्तम भाव में बृहस्पति का होना है, जो महिलाओं की कुंडली में तालमेल की समस्या पैदा करता है. इसके लिए शिवजी की गुरु रूप में पूजा करनी चाहिए. तीसरा योग शुक्र और चंद्र की युति है, जिससे वैवाहिक सुख में कमी आती है. इसके समाधान के लिए श्री हरि और माता लक्ष्मी की उपासना के साथ पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है. चौथा कारण शुक्र की अशुभ स्थिति है, जिसके लिए माता लक्ष्मी की पूजा और ओपल धारण करना लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा मांगलिक दोष भी विवाह में बड़ी रुकावट पैदा करता है.

शुक्र प्रदोष पर शिव पूजा से दूर होगी विवाह की बाधा

12 जून 2026

शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं। शुक्र प्रदोष का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना गया है जिनके विवाह में देरी हो रही है या वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ रही हैं। इस दिन प्रदोष काल में महादेव का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करना चाहिए। पूजा में सफेद वस्त्र और सफेद पुष्पों का उपयोग शुभ माना जाता है, जबकि लाल रंग की वस्तुओं का प्रयोग वर्जित है। ज्योतिष के अनुसार, उम्र के हिसाब से शिव और पार्वती को पीले या गुलाबी फूल अर्पित करने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, शुक्र प्रदोष के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से कुंडली में शुक्र ग्रह बलवान होता है, जिससे धन, धान्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

श्रीकृष्ण के 12 कल्याणकारी मंत्र, दूर होंगी जीवन की बाधाएं, मिलेगी सुख-समृद्धि और सफलता

11 जून 2026

भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने और जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने के लिए उनके 12 कल्याणकारी मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, श्रीकृष्ण के अलग-अलग मंत्रों का प्रभाव भी अलग होता है. मूल मंत्र 'कृं कृष्णाय नमः' के जाप से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. वहीं, 17 अक्षरों वाले महामंत्र से दरिद्रता का नाश होता है और परिपूर्णता मिलती है. इसके अलावा, 7 अक्षरों वाला 'गोवल्लभाय स्वाहा' मंत्र संपूर्ण सिद्धियां प्रदान करता है, जबकि 8 अक्षरों वाला मंत्र अभिलाषाएं पूर्ण करता है. 10 और 12 अक्षरों वाले मंत्रों से जीवन में सुख-समृद्धि और भगवान की शरण मिलती है. 22, 23, 28 और 29 अक्षरों वाले मंत्र धन, वैभव और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग खोलते हैं. 32 और 33 अक्षरों वाले महामंत्रों के जाप और दशांश हवन से विद्या, बुद्धि और समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इन मंत्रों का सही विधि से जाप करने पर भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं.

अधिक मास की परमा एकादशी पर करें ये महाप्रयोग, दूर होगी दरिद्रता और बनेंगे धन प्राप्ति के योग

10 जून 2026

ज्येष्ठ के अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष महत्व है. यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है और इसे हरिवल्लभा के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री लक्ष्मी नारायण की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की दरिद्रता दूर होती है और धन प्राप्ति के योग बनते हैं. इस व्रत का पालन पांच दिनों तक किया जाता है. पूजा में भगवान विष्णु को पीले पुष्प, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है. आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए इस दिन तुलसी के पास घी का दीपक जलाने, माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने और 11 कौड़ियों को तिजोरी में रखने जैसे महाप्रयोग बेहद फलदायी होते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सुमेधा और पवित्रा नामक ब्राह्मण दंपत्ति ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपनी घोर दरिद्रता से मुक्ति पाई थी. इस दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है.

बजरंग बाण के अचूक उपाय: हनुमान जी की कृपा से दूर होंगे मंगल और शनि दोष, मिलेगी हर संकट से मुक्ति

09 जून 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में बजरंग बाण की महिमा और शक्तियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। बजरंग बाण को कलयुग के सबसे जागृत देवता भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का अचूक उपाय माना जाता है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति को मंगल दोष, शनि दोष, नजर दोष और शत्रुओं की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही यह विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। बजरंग बाण में भगवान श्री राम की सौगंध दी गई है, इसलिए यह पाठ हर कार्य को सिद्ध करता है। हालांकि, जानकारों का सुझाव है कि इसका पाठ केवल अत्यंत आवश्यक और विकट परिस्थितियों में ही हनुमान मंदिर में करना चाहिए। हनुमान जी की पूजा से पहले हमेशा श्री राम के नाम का जाप करना अनिवार्य है, क्योंकि हनुमान जी सीधे अपनी पूजा स्वीकार नहीं करते हैं।

Prarthna Ho Sweekar: शनि की टेढ़ी नजर से बिगड़ सकती है सेहत; जानें किन रोगों का बढ़ जाता है खतरा?

08 जून 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में शनि देव के प्रभाव और उनसे जुड़ी बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। कुंडली में शनि की कमजोर स्थिति इंसान को कई गंभीर शारीरिक कष्ट दे सकती है। कमजोर शनि के कारण हड्डियों में कमजोरी, स्नायु तंत्र की समस्याएं, हाथ-पैर कांपना, सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस और पक्षाघात जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, शनि का अशुभ प्रभाव लंबी बीमारियों और दुर्घटनाओं का भी कारण बन सकता है। इन शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए ज्योतिष में कई महाउपाय बताए गए हैं। इनमें शनि मंत्रों का जाप, शनिवार को सरसों के तेल का दान, हनुमान जी की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और लोहे का छल्ला धारण करना शामिल है। अच्छे कर्म, सात्विक आहार और बड़ों का सम्मान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं, जिससे व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, धन और करियर में सफलता प्राप्त होती है।

पूजा में संकल्प और परिक्रमा का क्या है महत्व? जानें सही विधि और नियम

07 जून 2026

सनातन धर्म में किसी भी पूजा या अनुष्ठान से पहले संकल्प लेने का विशेष महत्व है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, बिना संकल्प के की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। संकल्प के दौरान व्यक्ति अपना नाम, गोत्र, स्थान और मनोकामना का उच्चारण करता है, जिससे पूजा का उद्देश्य स्पष्ट होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य और संकल्प में सबसे पहले उनका ध्यान किया जाता है। इसके साथ ही पूजा के कुछ विशेष नियम भी होते हैं। दीपक, शिवलिंग, शालिग्राम और शंख जैसी पवित्र वस्तुओं को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। पूजा के बाद देवी-देवताओं की परिक्रमा या प्रदक्षिणा करने का भी विधान है। परिक्रमा हमेशा दाहिने हाथ की ओर से शुरू करनी चाहिए। हर देवी-देवता की परिक्रमा की संख्या अलग-अलग होती है, जैसे सूर्य देव की सात, श्री गणेश और भगवान विष्णु की चार, हनुमान जी की तीन और शिवजी की आधी परिक्रमा की जाती है। दान का संकल्प लेने के बाद उसे समय पर पूरा करना चाहिए।

भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना के नियम, अर्घ्य देने की विधि और गया के प्राचीन सूर्य मंदिर का रहस्य

05 जून 2026

अधिक मास में पड़ने वाली भानु सप्तमी का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्यदेव की उपासना करने से करियर में सफलता मिलती है और शारीरिक व मानसिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है. भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए. जल अर्पित करते समय सूर्य मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके साथ ही इस दिन तांबे के बर्तन, गेहूं, गुड़ और शुद्ध घी का दान करने से विशेष पुण्य मिलता है. सूर्य की उपासना से नेत्र विकार और त्वचा संबंधी रोगों से भी छुटकारा मिलता है. इसके अलावा, बिहार के गया जिले में फाल्गुन नदी के किनारे एक अत्यंत प्राचीन सूर्य मंदिर स्थित है. मान्यता है कि यहां शालिग्राम पत्थर से बनी सात फीट ऊंची प्रतिमा में भगवान सूर्य अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. इस मंदिर में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आरोग्य का वरदान मिलता है.

श्री हरि को नारायण क्यों कहा जाता है? जानें शेषनाग पर शयन और गुरुवार पूजा का रहस्य

04 जून 2026

धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है. पुराणों में उनके दो रूप बताए गए हैं, जिनमें से एक में वे क्षीर सागर में काल स्वरूप शेषनाग पर शांत भाव से विराजमान हैं. जल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पैरों से हुई है और जल को 'नर' भी कहा जाता है. जल में निवास करने के कारण ही उनका नाम 'नारायण' पड़ा. वहीं, 'हरि' का अर्थ है पापों और कष्टों को हरने वाला, इसलिए सच्चे मन से स्मरण करने पर श्री हरि सभी दुखों को दूर करते हैं. गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है. इस दिन स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर, पीले फूलों से उनकी पूजा करनी चाहिए. श्री हरि के सामने घी का दीपक जलाकर 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ओम नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.