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प्रार्थना हो स्वीकार

अग्नि के अचूक उपाय और पचेटी माता मंदिर का रहस्य, जहां मिलता है मन्नत का पट्टा

20 जुलाई 2026

सनातन धर्म में अग्नि को पंच महाभूतों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। यह देवताओं और मनुष्यों के बीच संपर्क का मुख्य माध्यम मानी जाती है। विज्ञान के अनुसार भी पृथ्वी के ठंडे होने पर ही जीवन की शुरुआत हुई थी। अग्नि का प्रयोग हवन, दीप और चूल्हे के रूप में किया जाता है। इसके सही प्रयोग से जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं, लेकिन इसका अपमान करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में स्थित पचेटी माता का मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भक्त विवाह, नौकरी, संतान और जमीन से पानी निकालने जैसी मनोकामनाओं के लिए आते हैं। मंदिर में माता की मूर्ति पर नारियल का टुकड़ा (चटक) लगाया जाता है। अगर वह टुकड़ा नीचे गिर जाता है, तो इसे माता का 'पट्टा' या आशीर्वाद माना जाता है, जिसका अर्थ है कि भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होगी।

व्रत और उपवास में क्या है अंतर? जानिए इसके आध्यात्मिक, वैज्ञानिक फायदे और एकादशी का महत्व

19 जुलाई 2026

सनातन संस्कृति में ईश्वर की उपासना के लिए व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। व्रत एक संकल्प है, जिसमें तन और मन की शुद्धि के साथ नियमों का पालन किया जाता है, जबकि उपवास मुख्य रूप से आहार से संबंधित है जिसमें निराहार रहना शामिल होता है. व्रत रखने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से भी कई फायदे होते हैं. इससे शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. शास्त्रों में एकादशी को सर्वश्रेष्ठ व्रत माना गया है. इसके अलावा प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के उपवास भी विशेष फलदायी होते हैं. व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल और फलाहारी. स्वस्थ व्यक्ति निर्जल व्रत रख सकते हैं, जबकि अन्य लोगों को जलीय या फलाहारी उपवास रखना चाहिए. व्रत के दौरान सात्विक भोजन, फल, साबूदाना और दूध का सेवन किया जा सकता है. हालांकि, शारीरिक रूप से कमजोर या डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

हनुमान जी की पूजा से मिलेगी नौकरी में तरक्की, दूर होगी धन की कमी और बजरंग बाण से मिटेंगे सारे कष्ट

18 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में महाबली हनुमान की महिमा और उनकी पूजा से जुड़े अचूक उपायों के बारे में बताया गया है. मान्यता है कि बजरंगबली की आराधना से जीवन की हर बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है. घर में कलह और अशांति दूर करने के लिए मंगलवार को पीपल के पत्ते पर 'हनुमते नमः' लिखकर हनुमान जी के चरणों में अर्पित करने की सलाह दी गई है. नौकरी और कारोबार में तरक्की के लिए लाल कपड़े में सिंदूर और चमेली का तेल भेंट करने से लाभ मिलता है. धन लाभ के लिए मंगलवार को घर में राम दरबार स्थापित कर पीपल के 11 पत्तों पर राम-राम लिखकर जल में प्रवाहित करने का उपाय बताया गया है. इसके अलावा, शत्रुओं और बुरी नजर से बचाव के लिए राम रक्षा स्तोत्र और बजरंग बाण का पाठ बेहद कारगर माना जाता है. हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से आरोग्य, सौंदर्य और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है.

कुंडली में कमजोर शुक्र के लक्षण, दांपत्य जीवन पर प्रभाव और मजबूत करने के अचूक ज्योतिषीय उपाय

17 जुलाई 2026

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुंदरता, ऐश्वर्य, वैभव और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है. गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में शुक्र ग्रह के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है. ज्योतिषियों के अनुसार, यदि कुंडली में शुक्र मजबूत हो तो व्यक्ति को धन, धान्य, सम्मान और सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है. ऐसे लोग मीडिया, फिल्म या कला के क्षेत्र में नाम कमाते हैं. वहीं, शुक्र के कमजोर होने पर दांपत्य जीवन में कलह, आर्थिक कष्ट, त्वचा रोग और मधुमेह जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. अंगूठे में दर्द होना भी कमजोर शुक्र की निशानी है. शुक्र को बलवान बनाने के लिए शुक्रवार को शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करना चाहिए. इसके अलावा 'ओम नमः शिवाय' या 'ओम शुं शुक्राय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी होता है. मां लक्ष्मी की आराधना, महिलाओं का सम्मान, गौ सेवा और सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल या चांदी का दान करने से भी शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं.

कर्क संक्रांति पर सूर्य देव का राशि परिवर्तन, शुरू होगा दक्षिणायन, जानें राशियों पर असर और महाउपाय

16 जुलाई 2026

सूर्य देव जल्द ही चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश करने वाले हैं, जिसे कर्क संक्रांति कहा जाता है. इसी दिन से सूर्य देव अपनी दक्षिणायन यात्रा भी आरंभ करते हैं, जो देवताओं की रात्रि का प्रतीक मानी जाती है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालेगा. इस दौरान जल से जुड़ी आपदाएं, भूकंप और विश्व में युद्ध जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. हालांकि, सूर्य देव की उपासना और कुछ विशेष उपायों से इन बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है. कर्क संक्रांति के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना, 'ओम आदित्याय नमः' और गायत्री मंत्र का जप करना बेहद फलदायी माना गया है. विशेष कामनाओं के लिए जल में नीला रंग, लाल चंदन या हल्दी मिलाकर अर्घ्य देने से शिक्षा, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में लाभ मिलता है. इसके अलावा, जरूरतमंदों को चावल, दूध, सफेद वस्त्र और जल का दान करने से जीवन में सुख, ऐश्वर्य और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है.

जगन्नाथ रथयात्रा: 14 दिन का एकांतवास, जड़ी-बूटियों से उपचार और पुरी मंदिर के अद्भुत चमत्कार

15 जुलाई 2026

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन होता है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाली इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा के स्नान के बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं, जिसके कारण वे 14 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस दौरान जड़ी-बूटियों और काढ़े से उनका उपचार किया जाता है। स्वस्थ होने के बाद रथयात्रा निकाली जाती है। तीनों देवों के रथ नीम की लकड़ी से बिना किसी कील के बनाए जाते हैं। रथयात्रा में हेरा पंचमी, सुना वेश, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्री विजय जैसी कई महत्वपूर्ण रस्में निभाई जाती हैं। पुरी के मंदिर से जुड़े कई चमत्कार भी हैं, जैसे मंदिर के शिखर का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। जो भक्त पुरी नहीं जा सकते, वे घर पर ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिकृति स्थापित कर सात्विक भोग लगाकर पूजा कर सकते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: 10 महाविद्याओं की पूजा से पूरी होगी मनोकामना, जानें विवाह और नौकरी के अचूक उपाय

14 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की महिमा और विधान के बारे में बताया गया है। सामान्य नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की तांत्रिक और गोपनीय साधना की जाती है। पंचांग के अनुसार, यह गुप्त नवरात्रि 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे शुरू होकर 23 जुलाई को पारण के साथ समाप्त होगी। इस बार 15 जुलाई को पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति से 12 साल बाद गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए देवी को पीले फूलों की माला अर्पित कर कात्यायनी मंत्र का जाप करना चाहिए। संतान प्राप्ति के लिए पान का पत्ता चढ़ाकर विशेष मंत्र पढ़ें। वहीं, नौकरी और रोजगार की समस्या दूर करने के लिए बताशे पर लौंग रखकर देवी को अर्पित करने का विधान है। इस दौरान सात्विक आहार और ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

आषाढ़ अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के उपाय, जानें हलहारिणी अमावस्या का महत्व और चंद्र देव की पूजा

13 जुलाई 2026

आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, 13 जुलाई की शाम से अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है, जो 14 जुलाई तक रहेगी। इस तिथि को हलहारिणी अमावस्या और दर्श अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किसान कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और बुवाई की शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, दान, तर्पण और पिंड दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, काले तिल का दान करने और भगवान शिव की पूजा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्व बताया गया है। कुंडली में कमजोर चंद्रमा को बलवान करने के लिए सोमवार का उपवास रखने, चांदी धारण करने और शिव जी को जल अर्पित करने जैसे उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को अपनाने से जीवन में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।

घर में मंदिर की सही दिशा, मूर्तियों के नियम और वास्तु उपाय जो चमका सकते हैं आपका भाग्य

12 जुलाई 2026

घर में एक छोटा सा मंदिर स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, पूजा घर हमेशा ईशान कोण यानी पूर्व-उत्तर दिशा में होना चाहिए। मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां नौ अंगुल से बड़ी और खोखली नहीं होनी चाहिए। पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और वहां सुबह-शाम शुद्ध घी का दीपक जलाना आवश्यक है। घर के मंदिर को जागृत करने के लिए नियमित रूप से एक ही समय पर पूजा और मंत्र जाप करना चाहिए। मंदिर को कभी भी शयनकक्ष, सीढ़ियों के नीचे या शौचालय के पास नहीं बनाना चाहिए। इसके अलावा, पूजा घर में खंडित मूर्तियां, पूर्वजों के चित्र या शनि देव की मूर्ति रखने से बचना चाहिए। सही दिशा और नियमों का पालन करते हुए घर में मंदिर की स्थापना करने से आर्थिक समृद्धि आती है और परिवार में आपसी तालमेल बना रहता है।

हनुमान जी के 12 चमत्कारी नाम, जाप के फायदे और चित्रकूट की हनुमान धारा का रहस्य

11 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में शगुफ्ता साहिल देव ने हनुमान जी के बारह चमत्कारी नामों की महिमा बताई है. कलयुग में संकट मोचन हनुमान की उपासना सबसे उत्तम फल देती है. उनके बारह दिव्य नाम- हनुमान, अंजनी सुत, वायुपुत्र, महाबली, रामेष्ट, फाल्गुन सखा, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उद्धि क्रमण, सीता शोक विनाशन, लक्ष्मण प्राण दाता और दशग्रीव दर्पदा हैं. इन नामों का प्रातः, दोपहर या रात में जाप करने से आयु, धन और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. पीले कागज पर लाल रंग से इन नामों को लिखकर मुख्य द्वार पर लगाने या भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर लॉकेट में पहनने से व्यक्ति की रक्षा होती है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित हनुमान धारा का भी वर्णन किया गया है. पौराणिक कथा के अनुसार, लंका दहन के बाद हनुमान जी की पूंछ की जलन शांत करने के लिए भगवान राम ने अपने बाण से यह शीतल जलधारा प्रकट की थी. यहां पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

शनि और राहु को शांत करने के लिए नीले रंग का महाउपाय, जानें धन और रोजगार प्राप्ति के अचूक तरीके

10 जुलाई 2026

शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए नीले रंग का विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नीला रंग न केवल मानसिक तनाव को दूर करता है, बल्कि यह शनि और राहु से जुड़ी समस्याओं के समाधान में भी बेहद कारगर माना जाता है. इस रंग का सही प्रयोग जीवन में धन, रोजगार और सुख-शांति ला सकता है. हालांकि, जल और अग्नि प्रधान कुंडलियों के अनुसार नीले रंग के इस्तेमाल में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए. नीले रंग के साथ सफेद, पीला या लाल रंग मिलाने से इसके सकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं. इसके अलावा, शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, शनि चालीसा का पाठ करने और निर्धनों को दान देने जैसे उपायों से आर्थिक और व्यावसायिक बाधाएं दूर की जा सकती हैं. नीले रंग की शुभता सनातन धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों में भी गहराई से जुड़ी हुई है.