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प्रार्थना हो स्वीकार

हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक और धार्मिक रहस्य

06 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में हिंदू धर्म की सदियों पुरानी परंपराओं के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा की गई है। सनातन धर्म में व्रत रखने, बड़ों के चरण स्पर्श करने, माथे पर तिलक लगाने और सूर्य को जल चढ़ाने जैसी कई मान्यताएं हैं। व्रत रखने से जहां शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं और पाचन तंत्र ठीक रहता है, वहीं हाथ जोड़कर नमस्ते करने से उंगलियों पर पड़ने वाला दबाव एक्यूप्रेशर का काम करता है, जिसका सीधा असर आंख, कान और दिमाग पर पड़ता है। इसके अलावा, माथे पर तिलक लगाने से आज्ञा चक्र नियंत्रित होता है और एकाग्रता बढ़ती है। उगते सूर्य को जल चढ़ाने से आंखों की रोशनी तेज होती है और शरीर को विटामिन डी मिलता है। तुलसी के पौधे की पूजा भी वातावरण को शुद्ध करती है और इम्युनिटी बढ़ाती है। ये सभी सनातनी परंपराएं मानव कल्याण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम करती हैं।

महादेव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की कथा, शिव और शक्ति के बिना सृष्टि का निर्माण क्यों है अधूरा?

05 जुलाई 2026

सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को एक-दूसरे का पूरक माना गया है. शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप में शिव और शक्ति दोनों समाहित हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन और गति के लिए आवश्यक हैं. इस वीडियो में जानिए कि महादेव ने अर्धनारीश्वर रूप क्यों धारण किया था. पौराणिक कथा के अनुसार, भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की पूजा करते थे और माता पार्वती की उपेक्षा करते थे. उनकी इस भूल को सुधारने और सृष्टि के सृजन का संदेश देने के लिए शिव ने माता पार्वती के साथ मिलकर अर्धनारीश्वर रूप लिया था. इसके अलावा, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब जीवों की वृद्धि के लिए भगवान शिव ने इसी स्वरूप में प्रकट होकर उन्हें स्त्री और पुरुष के मिलन से प्रजनन की प्रेरणा दी थी. अर्धनारीश्वर स्वरूप की उपासना करने से दांपत्य जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.

महिलाओं के लिए हनुमान पूजा के क्या हैं नियम और कैसे करें बजरंगबली की उपासना?

04 जुलाई 2026

हिंदू धर्म में संकट मोचन हनुमान की उपासना का विशेष महत्व है. कलयुग में भगवान हनुमान को सबसे सिद्ध और शीघ्र फल देने वाला देवता माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, बाल ब्रह्मचारी होने के कारण हनुमान जी की पूजा में महिलाओं के लिए कुछ विशेष नियम और वर्जनाएं हैं. महिलाएं दीप जला सकती हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान अष्टक का पाठ कर सकती हैं. साथ ही वे बजरंगबली को भोग भी अर्पित कर सकती हैं. लेकिन, महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति का स्पर्श करने की मनाही होती है क्योंकि वह सभी स्त्रियों को माता के समान मानते हैं. इसके अलावा मंगलवार के दिन विशेष उपाय करके भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं. धन प्राप्ति के लिए लाल पुष्प अर्पित करना और विद्या के लिए विशिष्ट मंत्रों का जाप करना लाभकारी बताया गया है. नियमों का सही पालन करने से बल, बुद्धि और विद्या का वरदान मिलता है.

धर्म, ज्योतिष और मनोविज्ञान में क्या है सपनों का रहस्य और आपके जीवन पर इसका गहरा प्रभाव

03 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में सपनों की दुनिया और उनके रहस्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है. धर्म ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों और स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने हमारे भविष्य की घटनाओं का संकेत देते हैं. रामायण में माता सीता और त्रिजटा के सपने हों या महाभारत में कुंती और गांधारी के अशुभ स्वप्न, ये सभी भविष्य में होने वाली घटनाओं का प्रतिबिंब साबित हुए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रात के अलग-अलग प्रहर में देखे गए सपनों का फल अलग समय में मिलता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना केवल दस दिन में सच हो सकता है. सपने में मृत्यु देखने का अर्थ संकट टलना माना गया है. वहीं विज्ञान और मनोविज्ञान, जैसे सिगमंड फ्रायड और कार्ल जुंग के सिद्धांतों के अनुसार, सपने हमारी दबी हुई इच्छाओं, अवचेतन मन और दिनभर की घटनाओं का परिणाम होते हैं. हालांकि, धर्म और ज्योतिष सपनों को ईश्वरीय संकेत और भविष्य का सूचक मानते हैं.

अमरनाथ यात्रा कल से शुरू: बालटाल-पहलगाम रूट तैयार, जानें बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग का रहस्य

02 जुलाई 2026

बाबा बर्फानी के भक्तों का इंतजार खत्म होने जा रहा है. कल से अमरनाथ यात्रा की विधिवत शुरुआत हो रही है. यह यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा. यात्रा के लिए दो मुख्य मार्ग तय किए गए हैं- 41 किलोमीटर लंबा पारंपरिक पहलगाम रूट और 14 किलोमीटर लंबा बालटाल रूट. हाल ही में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल और श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने बाबा बर्फानी की प्रथम पूजा की. अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल लाखों शिव भक्त कश्मीर पहुंचते हैं. गुफा का यह स्वयंभू हिमलिंग विज्ञान के लिए एक चुनौती और भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. मान्यता है कि इसी पवित्र गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी, जिसे सुनकर दो कबूतर भी अमर हो गए थे. सुरक्षा और सुविधाओं के लिए श्राइन बोर्ड ने कड़े इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के दर्शन कर सकें.

तिरुपति बालाजी के अद्भुत रहस्य: असली हैं भगवान के बाल, मूर्ति से आती है समुद्र की लहरों की आवाज

01 जुलाई 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर सरगम पंत श्रीवास्तव ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के रहस्यों और मान्यताओं के बारे में जानकारी दी. भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति एक विशेष पत्थर से बनी है जो पूरी तरह जीवंत प्रतीत होती है. मान्यता है कि इस मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाज आती है और भगवान के बाल असली हैं, जो कभी उलझते नहीं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भृगु ऋषि द्वारा भगवान विष्णु के वक्ष स्थल पर प्रहार करने के बाद माता लक्ष्मी वैकुंठ छोड़कर पृथ्वी पर आ गईं. उन्हें खोजते हुए भगवान विष्णु तिरुमला आए और देवी पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से ऋण लिया. इसी कर्ज को चुकाने के लिए भक्त आज भी मंदिर में धन और आभूषण दान करते हैं. मंदिर में बिना तेल और घी के एक दीपक सदियों से जल रहा है. साथ ही आषाढ़ महीने के महत्व और इसमें होने वाली पूजा-पाठ के लाभ के बारे में भी विस्तार से बताया गया है.

आषाढ़ माह में कैसे मिलेगी श्रीहरि की कृपा? जानें व्रत-त्योहार और नियम

30 जून 2026

हिंदू कैलेंडर का चौथा और बेहद खास महीना आषाढ़ शुरू हो गया है। इसे भगवत उपासना, जप, तप और कामना पूर्ति का माह माना जाता है। इस महीने से चातुर्मास लग जाता है, जिससे चार महीने के लिए शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में बताया गया है कि आषाढ़ मास में भगवान विष्णु, भगवान जगन्नाथ, माता दुर्गा और भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इसी महीने में जगन्नाथ रथयात्रा, गुप्त नवरात्रि और देवशयनी एकादशी जैसे प्रमुख व्रत-त्योहार आते हैं। इसके अलावा, आषाढ़ महीने में तुलसी के पौधे में गंगाजल और दूध अर्पित करने तथा पीपल, नीम और बरगद के पौधे लगाने से आर्थिक स्थिति सुधरती है। स्वास्थ्य के लिहाज से इस माह में बेल और पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए और सत्तू, खस, हींग, नींबू तथा नारियल पानी का सेवन करना चाहिए, ताकि पाचन शक्ति मजबूत रहे।

कैलाश पर्वत के अनसुलझे रहस्य और पौराणिक महत्व, क्यों नहीं चढ़ सका कोई?

29 जून 2026

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील केवल हिंदू ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लोगों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। समुद्र तल से 22,028 फीट ऊंचा कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इस पवित्र पर्वत की यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़, सिक्किम के नाथु ला दर्रा और नेपाल के रास्ते से की जाती है। कैलाश पर्वत अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए है। माना जाता है कि इस पर्वत पर आज तक कोई इंसान नहीं चढ़ सका है। इसके पास दो मुख्य झीलें मौजूद हैं, मीठे पानी की मानसरोवर झील जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है, और खारे पानी की राक्षस ताल जहां जीवन नहीं पनपता। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार कैलाश का आकार एक पिरामिड जैसा है और यहां समय तेजी से बीतने, बाल और नाखून जल्दी बढ़ने जैसी अलौकिक घटनाओं का दावा किया जाता है। विभिन्न पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में इस पवित्र स्थल की महिमा और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गंगा स्नान, वट वृक्ष पूजा और दान से दूर होंगे वैवाहिक व वास्तु दोष

28 जून 2026

ज्येष्ठ पूर्णिमा, जिसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की उपासना करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. स्नान, ध्यान और दान का इस तिथि पर बहुत पुण्यदायी फल मिलता है. गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों को जल, फल, छाता या चप्पल दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. वट वृक्ष की परिक्रमा और पूजा कर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. संतान प्राप्ति के लिए इस दिन बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और तुलसी के पास विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. साथ ही, घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भगवान वराह की तस्वीर ईशान कोण में लगाने और आम के पत्तों का वंदनवार मुख्य द्वार पर बांधने के उपाय भी बताए गए हैं. सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाती है.

सनातन धर्म की 7 मोक्षदायिनी पुरियां, जानें अयोध्या, काशी और उज्जैन का पौराणिक महत्व

27 जून 2026

सनातन धर्म में मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष माना गया है. शास्त्रों में मोक्ष प्राप्ति के कई साधन बताए गए हैं, जिनमें से एक है 'सप्तपुरी' की यात्रा. ये सात पवित्र नगरियां हैं - अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारका. मान्यता है कि देवों से जुड़ी ये प्राचीन नगरियां साक्षात मोक्ष का द्वार हैं. अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है, तो मथुरा श्रीकृष्ण की लीलाओं का गवाह. हरिद्वार को हरि का प्रवेश द्वार माना जाता है, जबकि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी अविनाशी नगरी है. कांचीपुरम ब्रह्मा और शिव की उपासना का केंद्र है, उज्जैन में भगवान महाकाल विराजमान हैं, और द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था. सतयुग से लेकर कलियुग तक इन सातों नगरियों का नाता देवताओं से रहा है, इसलिए सनातन शास्त्र इन सभी को मोक्षदायिनी कहते हैं.

शनिदेव कैसे करते हैं कर्मों का न्याय? जानें साढ़ेसाती से बचने के अचूक उपाय और लाभकारी मंत्र

26 जून 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना स्वीकार' में भगवान शनिदेव के न्याय और उनके प्रकोप से बचने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई है. शनिदेव को ब्रह्मांड का दंडाधिकारी और न्यायकर्ता माना जाता है, जो इंसानों को उनके कर्मों के आधार पर फल देते हैं. बुरे कर्म करने वालों को शनि की साढ़ेसाती, महादशा और ढैय्या के दौरान भारी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, ज्योतिष के जानकारों के अनुसार कुछ विशेष उपायों से शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है. पीपल के पेड़ के पास चींटियों को गुड़ और तिल खिलाना, तिल के तेल का दीपक जलाना और लोहे का छल्ला धारण करना बेहद लाभकारी माना गया है. इसके अलावा, शनिदेव की कृपा पाने के लिए 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' जैसे चमत्कारी मंत्रों का जाप और छाया दान करने की विधि भी बताई गई है. सही आचरण रखने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं.