कलयुग में हनुमान जी की उपासना को सबसे फलदायी माना गया है. धर्म ग्रंथों के अनुसार, बजरंगबली बाल ब्रह्मचारी हैं और वे सभी स्त्रियों को माता के समान मानते हैं. इसलिए महिलाओं के लिए हनुमान जी की पूजा के कुछ विशेष नियम और सावधानियां बताई गई हैं. महिलाएं हनुमान जी को दीप अर्पित कर सकती हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और संकट मोचन का पाठ कर सकती हैं, लेकिन उन्हें हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श करने की मनाही है. इसके अलावा, मंगलवार के दिन चमेली के तेल का दीपक जलाने और चोला चढ़ाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है. धन प्राप्ति के लिए लाल पुष्प अर्पित करने और विद्या के लिए विशेष मंत्रों का जाप करने का विधान है. हनुमान शब्द के हर अक्षर में ब्रह्मा, अर्चना, लक्ष्मी और पराक्रम का वास माना गया है. सही विधि और नियमों का पालन करके महिलाएं भी बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं.
वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में होते हैं। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। पूजा का उत्तम समय सुबह 10:49 से दोपहर 12:20 तक है। इस दिन गजकेसरी, त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि जैसे कई शुभ योग बन रहे हैं। अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इस दिन सोना, चांदी, वाहन या पीतल के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। सोने की खरीदारी के लिए दोपहर का समय सबसे उपयुक्त है। इसके अलावा, इस दिन पितरों के लिए तर्पण, जल, जौ, सत्तू और फलों का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर विशेष मंत्रों का जाप करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है।
सनातन संस्कृति में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व है। इस पवित्र यात्रा का शुभारंभ अक्षय तृतीया के दिन से होता है। यह यात्रा यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री और केदारनाथ होते हुए भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के साथ संपन्न होती है। मान्यता है कि इन चारों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं। इस वर्ष 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसके बाद 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। यमुनोत्री को मां यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है, जबकि गंगोत्री मां गंगा का पावन धाम है। केदारनाथ में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं और बद्रीनाथ को धरती का वैकुंठ कहा जाता है जहां भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। इस यात्रा के जरिए भक्त अपने जीवन को सफल बनाते हैं।
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में वैशाख अमावस्या के महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई. मान्यता है कि वैशाख अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. कार्यक्रम में बताया गया कि जो लोग पितृ दोष से पीड़ित हैं, उन्हें इस दिन स्नान के बाद पितरों के निमित्त तिल युक्त जल और दूध से तर्पण करना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. इसके अलावा, इस दिन अन्न, वस्त्र, काले तिल, छाता और जूते-चप्पलों का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने की सलाह दी गई है. ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य से नवग्रहों की शांति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' में सत्यनारायण भगवान की पूजा के महत्व और इसकी सही विधि पर विस्तार से चर्चा की गई. कलयुग में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की उपासना को सबसे कल्याणकारी माना गया है. इस पूजा से घर में सुख, शांति और संपन्नता आती है. कार्यक्रम में बताया गया कि पूर्णिमा, एकादशी या बृहस्पतिवार के दिन सत्यनारायण की कथा सुनना अत्यंत शुभ होता है. पूजा के लिए केले के पेड़ का मंडप, शालिग्राम, पंचामृत, पंजीरी और तुलसी दल का विशेष महत्व है. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति व्रत करने में असमर्थ है, तो वह बिना व्रत के भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ यह पूजा कर सकता है. साथ ही, जीवन में अन्न दान, जल दान, विद्या दान और स्वर्ण दान के महत्व को भी समझाया गया है, जिससे नवग्रहों की शांति होती है और व्यक्ति को हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है.
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में बुध प्रदोष व्रत की महिमा और पूजा विधि पर विस्तार से चर्चा की गई। यह व्रत महादेव और बुध ग्रह को समर्पित है। मान्यता है कि बुधवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से शिवजी, चंद्रमा और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कुंडली में बुध ग्रह के कमजोर होने से त्वचा संबंधी रोग, कमजोर याददाश्त और धन की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि बुध को बलवान करने के लिए प्रदोष काल में श्वेत वस्त्र धारण कर शिवजी की उपासना करनी चाहिए और उन्हें बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा, हरी मूंग गाय को खिलाने और कन्याओं को हरे रंग का रुमाल दान करने जैसे उपाय भी लाभकारी माने गए हैं। साथ ही, सूर्य देव की उपासना और अर्घ्य देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिससे शारीरिक आरोग्यता और पूर्व जन्मों के दोषों से मुक्ति मिलती है।
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में सूर्य के मेष राशि में गोचर और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है। 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष सूर्य की उच्च और मित्र राशि है। इस गोचर से सौर वर्ष और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है। कार्यक्रम में बताया गया है कि यह राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा। मेष, सिंह और मिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभकारी रहेगा, जबकि कुछ अन्य राशियों को स्वास्थ्य और करियर में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, कुंडली में सूर्य के कमजोर होने के लक्षण और उसे बलवान करने के महाउपाय भी साझा किए गए हैं। सूर्यदेव को जल अर्पित करने, मंत्रों का जाप करने और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है।
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में वरुथिनी एकादशी के महत्व, पूजा विधि और नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु के वराह, वामन और मधुसूदन स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने पापों से मुक्ति दिलाता है और सौभाग्य में वृद्धि कर मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। कार्यक्रम में राजा मान्धाता की पौराणिक कथा का भी जिक्र किया गया, जिनका पैर एक भालू ने खा लिया था, लेकिन वरुथिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से वे रोग मुक्त हो गए। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस दिन जल, सत्तू और मौसमी फलों का दान करना अत्यंत फलदायी होता है। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन का उपयोग, तामसिक भोजन, और गहरे रंग के कपड़े पहनने की मनाही है। उत्तम सेहत और आर्थिक संपन्नता के लिए इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित कर नारायण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में सूर्य देव की महिमा और रविवार को किए जाने वाले अचूक उपायों के बारे में बताया गया है। मान्यता है कि सूर्य देव को नियमित अर्घ्य देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। विज्ञान भी मानता है कि सूर्य की किरणों से शरीर को विटामिन डी मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। कार्यक्रम में आदित्य हृदय स्तोत्र के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी स्तोत्र का पाठ करने की सलाह दी थी। इसका नियमित पाठ करने से मुकदमों में जीत, प्रशासनिक सेवाओं में सफलता और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसके अलावा, रविवार के दिन नमक का त्याग करने और गुड़, गेहूं तथा तांबे का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में शनि देव के नौ वाहनों और साढ़ेसाती या ढैया के दौरान उनके प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव गधे, घोड़े, हाथी, भैंसे, शेर, सियार, कौवे, मोर और हंस पर सवार होकर आते हैं। व्यक्ति की कुंडली में शनि किस वाहन से प्रवेश करेंगे, इसका निर्धारण जन्म नक्षत्र और शनि के राशि बदलने की तिथि के नक्षत्र की संख्या को जोड़कर नौ से भाग देने पर बची शेष संख्या से होता है। हंस, घोड़े और मोर की सवारी को शुभ फलदायी माना गया है, जबकि गधे, हाथी और सियार की सवारी जीवन में संघर्ष और चुनौतियां लाती है। भैंसे, शेर और कौवे की सवारी मिले-जुले परिणाम देती है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया है कि शनि देव न्यायकर्ता हैं और व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं, इसलिए हमेशा सत्कर्म करने चाहिए।
गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर सरगम पंत श्रीवास्तव शुक्र ग्रह के महत्व और जीवन पर इसके प्रभावों के बारे में चर्चा कर रही हैं। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को सुख, समृद्धि, विलासिता और प्रेम का कारक माना गया है। कार्यक्रम में बताया गया कि यदि कुंडली में शुक्र मजबूत हो, तो व्यक्ति को भौतिक सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, जबकि इसके कमजोर होने पर दांपत्य जीवन और आर्थिक स्थिति में बाधाएं आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्र को मजबूत करने के लिए मां लक्ष्मी की उपासना, 'ॐ शुं शुक्राय नमः' मंत्र का जाप, और महिलाओं का सम्मान करना अत्यंत फलदायी होता है। इसके अलावा, सफेद रंग के प्रयोग, इत्र के इस्तेमाल और शुक्रवार के व्रत से भी शुक्र के शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं। कार्यक्रम में शुक्र के स्वरूप और इसकी अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के संबंध पर भी प्रकाश डाला गया है।