भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और बुद्धि प्रदाता माना जाता है, जिनकी उपासना से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और विजय का वरदान मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्य सिद्धि के लिए गणपति को मोदक और दुर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी होता है. शत्रुओं पर विजय के लिए दुर्वा गणेश स्वरूप की पूजा लाभकारी बताई गई है. इसके साथ ही गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ और 'ॐ गं गणपतये नमः' का नियमित जाप हर बाधा का निवारण करता है. केतु ग्रह के नियंत्रक भगवान गणेश होने के कारण उनकी साधना से केतु से जुड़े कष्ट शांत होते हैं. घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में पंचमुखी गणेश जी की स्थापना और नियमित दीपक जलाने की सलाह दी जाती है. पूजन के दौरान पीले वस्त्र धारण करने और गणेश जी को तुलसी दल अर्पित न करने के नियमों का पालन आवश्यक माना गया है.
गणेशोत्सव के पावन अवसर पर भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप और उनके विभिन्न अंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है. शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति का बड़ा मस्तक कुशाग्र बुद्धि और नेतृत्व क्षमता का द्योतक है, जबकि उनकी छोटी आंखें हर कार्य को सूक्ष्मता से देखने और परखने की सीख देती हैं. भगवान के बड़े कान सुनने की महत्ता और सूप की तरह सही निर्णय लेने का संदेश देते हैं. गणपति का एकदंत रूप जीवन में हर वस्तु के सदुपयोग और दृढ़ निश्चय को दर्शाता है, जिससे उन्होंने महाभारत ग्रंथ की रचना की. इसके साथ ही भगवान का बड़ा उदर यानी लंबोदर स्वरूप हर अच्छी-बुरी बात को पचाने और खुशहाली का प्रतीक है. वहीं, गणपति की सक्रिय सूंड़ कर्म पर नियंत्रण और सजगता का संदेश देती है. मूषक वाहन चंचल मन और इच्छाओं पर संयम का प्रतीक माना गया है. भगवान गणेश की चार भुजाएं और शस्त्र मनुष्य को सांसारिक बंधनों, मोह और बुराइयों से मुक्ति की प्रेरणा देते हैं.
गणेश उत्सव के पावन अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और विशेष ज्योतिषीय उपायों की संपूर्ण जानकारी दी गई है. कार्यक्रम में बताया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले दस दिवसीय गणेश महोत्सव में गणपति की पूजा कैसे विधि-विधान से करनी चाहिए. भगवान गणेश को मोदक, दूर्वा, पीले वस्त्र और सिंदूर अर्पित करने का विशेष महत्व है. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के पत्तों को विशेष मंत्रों के साथ अर्पित कर संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य, कार्य बाधा निवारण, आर्थिक लाभ और शनि दोष शांति के उपाय बताए गए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पौराणिक कारणों से गणेश पूजन में तुलसी दल वर्जित है. विवाह में देरी, नौकरी में अड़चन और नया मकान बनाने की कामना के लिए भी विशेष मंत्र जप और पूजन विधान साझा किए गए हैं.
हरतालिका तीज का पावन पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है. यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा करती हैं. कार्यक्रम में हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है. इसके अलावा विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और दांपत्य जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय और महामंत्र का जाप करने की विधि भी बताई गई है.
गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 07:44 बजे तक रहेगी. गणेश जी की प्रतिमा स्थापना मध्याह्न काल में शुभ मानी जाती है. दिल्ली के पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक रहेगा. पूजा के लिए स्वच्छ स्थान पर चौकी सजाएं, पीले वस्त्र, दूर्वा, मोदक, अक्षत और चंदन अर्पित करें. प्राकृतिक मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. ज्योतिष के अनुसार विभिन्न स्वरूपों जैसे हरिद्रा गणपति, ऋणमोचन गणपति और संकष्टहरण गणपति की उपासना का अलग-अलग महत्व है. उत्सव के दौरान सात्विकता बनाए रखने, काले वस्त्र और तुलसी दल न चढ़ाने की सलाह दी गई है.
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह का जन्मोत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी का उद्धार किया था. इस दिन भगवान वराह और पृथ्वी माता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. पंचामृत से अभिषेक, पीले पुष्प, पीले वस्त्र और नैवेद्य अर्पित करने के साथ 'ॐ वाराहाय नमः' मंत्र का जाप किया जाता है. मान्यता है कि भगवान वराह की उपासना से संकट, पितृ दोष और वास्तु दोष दूर होते हैं तथा भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ मिलता है.
भाद्रपद माह की पिठोरी अमावस्या को कुशाग्रहणी और श्राद्ध अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता के अनुसार इस तिथि पर स्नान, दान, पितृकर्म और वर्ष भर के धार्मिक कार्यों के लिए कुश संग्रह करने का विधान है. पिठोरी अमावस्या पर माताएं संतान की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं तथा पिठोरी देवी, सप्त मातृकाओं व 64 योगिनियों का विधिवत पूजन करती हैं. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज धरती पर आते हैं, इसलिए इस दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दीपदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा पीपल के पेड़ की पूजा, काले तिल, अन्न व वस्त्र दान करने तथा 'ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः' मंत्र के जाप से पितृ प्रसन्न होते हैं. कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत करने और चंद्र दोष निवारण के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक व चंद्र मंत्रों के जाप का विशेष महत्व बताया गया है.
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम और बाबा नीब करौरी के चमत्कारों की ख्याति देश और दुनिया भर में फैली हुई है. उन्हें हनुमान जी का परम भक्त और कई लोग उनका अवतार भी मानते हैं. उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में जन्मे बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. उन्होंने गृहस्थ जीवन के बाद संन्यास का मार्ग अपनाया और वर्ष 1964 में नैनीताल के पास कैंची धाम की स्थापना की. बाबा के चमत्कारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से वैश्विक हस्तियां भी प्रभावित रहीं, जिनमें एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा हॉवर्ड के पूर्व प्रोफेसर रिचर्ड अल्पर्ट भी बाबा के सानिध्य में आकर उनके शिष्य रामदास बने. बाबा अपने भक्तों के मन की बात जान लेते थे और उन्हें हनुमान चालीसा के पाठ के लिए प्रेरित करते थे. 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनका देहावसान हुआ, जहां उनका समाधि मंदिर स्थित है. हर साल 15 जून को कैंची धाम में विशाल मेला आयोजित होता है.
सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सोलह शृंगार को सुहाग, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शृंगार का सीधा संबंध ग्रहों की अनुकूलता और जीवन में खुशहाली से होता है. सिंदूर, बिंदी, मांग टीका, काजल, नथ, झुमके, मंगलसूत्र, बाजूबंद, मेहंदी, चूड़ियां, अंगूठी, कमरबंद, पायल, बिछिया, गजरा और विशेष परिधान जैसे सोलह शृंगार शरीर के ऊर्जा चक्रों को संतुलित रखने के साथ नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करते हैं. शास्त्रों के अनुसार मंगलसूत्र में काले मोती और सोने का लॉकेट बृहस्पति को मजबूत कर वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाते हैं. वहीं कांच की चूड़ियां वात, पित्त और कफ को नियंत्रित करती हैं तथा चांदी की पायल और बिछिया रक्त प्रवाह एवं हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार होती हैं.
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अजा एकादशी को भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर अश्वमेध यज्ञ और गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. पौराणिक कथा के अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ राज्य और पारिवारिक सुख पुनः प्राप्त किया था. एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करने और भगवान विष्णु को प्रिय फल, फूल व मिष्ठान अर्पित कर आराधना करने का विधान है. इसके साथ ही जीवन की विभिन्न समस्याओं के निवारण के लिए विशेष दान का महत्व बताया गया है, जैसे स्वास्थ्य के लिए अन्न, आर्थिक उन्नति के लिए वस्त्र या छाता और शीघ्र विवाह के लिए हल्दी या केले का दान. संतान संबंधी बाधाओं के निवारण हेतु संतान गोपाल मंत्र के जाप और पीपल का वृक्ष लगाने का उल्लेख किया गया है.
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सिंदूर को अत्यंत शुभ, सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि सिंदूर के विशेष प्रयोगों से नौकरी की समस्याएं, कर्ज का बोझ और दुर्घटनाओं जैसी परेशानियां दूर हो सकती हैं. नौकरी में सफलता के लिए मंगलवार को हनुमान जी के चरणों के सिंदूर से सफेद कागज पर स्वस्तिक बनाकर रखने का उपाय बताया गया है. कर्ज मुक्ति के लिए चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर पीपल के पत्तों पर राम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करने का विधान है. दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए महिलाएं मां गौरी को सिंदूर अर्पित कर सकती हैं. बजरंगबली को चमेली के तेल के साथ सिंदूर का चोला चढ़ाने से शनि पीड़ा, ग्रह दोष और रोजगार की बाधाएं समाप्त होती हैं. इसके अलावा, भाद्रपद मास में राधा अष्टमी, हरतालिका तीज, लोलार्क षष्ठी, गणेशोत्सव और अनंत चतुर्दशी के व्रत-पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है.