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प्रार्थना हो स्वीकार

वृंदावन बांके बिहारी मंदिर के रहस्य, क्यों हर दो मिनट में लगाया जाता है पर्दा? जानिए

19 फरवरी 2026

वृंदावन के हृदय स्थल में विराजमान श्री बांके बिहारी जी की महिमा और उनके प्राकट्य की अलौकिक कथा इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है. मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में स्वामी हरिदास की संगीत साधना और अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण और राधा रानी एक ही विग्रह में समाहित होकर निधिवन में प्रकट हुए थे. इस स्वयंभू मूर्ति की विशेषता यह है कि इसमें राधा-कृष्ण का संयुक्त रूप है और भगवान त्रिभंगी मुद्रा में विराजमान हैं. मंदिर की अनूठी परंपराओं के अनुसार, यहाँ साल भर मंगला आरती नहीं होती क्योंकि भक्त मानते हैं कि बाल स्वरूप बिहारी जी रात में रास रचाकर देर से विश्राम करते हैं. साथ ही, बिहारी जी के नयनों के तीव्र आकर्षण और भक्त के वशीभूत होकर उनके साथ चले जाने के डर से हर दो मिनट में गर्भगृह का पर्दा गिरा दिया जाता है.

फुलेरा दूज पर कैसे करें राधा-कृष्ण की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

18 फरवरी 2026

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पावन पर्व मनाया जाता है, जिसे 'अभूज मुहूर्त' माना जाता है. इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न किया जा सकता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी और ब्रजवासियों के साथ पहली बार फूलों की होली खेली थी. यदि किसी की कुंडली में विवाह संबंधी दोष या प्रेम का अभाव है, तो इस दिन राधा-कृष्ण की संयुक्त उपासना से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है. पूजा के दौरान 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का जाप और मधुराष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है. प्रेम संबंधों में सुधार के लिए गुलाबी और वैवाहिक सुख के लिए पीले वस्त्र धारण करने की सलाह दी गई है. इस दिन सात्विक रहकर काले वस्त्रों के त्याग का विधान है.

हनुमान जी की बुद्धि और बल: कैसे बजरंगबली ने किया राक्षसों के छल का नाश?

17 फरवरी 2026

गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में आज पवनपुत्र हनुमान के अद्भुत बल और विवेक की चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि कैसे जामवंत ने हनुमान जी को उनकी विस्मृत शक्तियों का स्मरण कराया, जिसके बाद उन्होंने अमोघ बाण की भांति समुद्र लांघा. लंका पहुंचकर हनुमान जी ने न केवल माता सीता की खोज की, बल्कि अशोक वाटिका उजाड़कर रावण की शक्ति का आकलन भी किया. 'ब्रह्मास्त्र का आदर करने के लिए हनुमान जी स्वयं बंध गए ताकि वे रावण की रणनीति समझ सकें.' इसके अलावा, लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने और अहिरावण के संहार जैसे प्रसंगों के माध्यम से उनके संकटमोचन स्वरूप को दर्शाया गया है.

फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का साया, जानें स्नान-दान का महत्व और महाउपाय

16 फरवरी 2026

फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि पर इस बार सूर्य ग्रहण का साया रहने वाला है. शास्त्रों में इस तिथि को पितरों के निमित्त स्नान और दान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. कार्यक्रम में बताया गया कि 'इस बार फाल्गुन अमावस्या का संयोग 17 फरवरी को बन रहा है' और इसी दिन साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण भी लगेगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' कहा जा रहा है. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक के नियम मान्य नहीं होंगे, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसका प्रभाव व्यापक होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, पितरों का तर्पण और भगवान शिव की उपासना से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के दोषों से मुक्ति मिल सकती है. धन प्राप्ति और पारिवारिक सुख-शांति के लिए विशेष महाउपायों की चर्चा भी की गई है.

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का महत्व और मनोकामना पूर्ति के अचूक उपाय

15 फरवरी 2026

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष महत्व है. इस कार्यक्रम में बताया गया है कि महाशिवरात्रि की रात चार प्रहर की पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है. 'चार प्रहर की पूजा संध्या काल से शुरू होकर ब्रह्म मुहूर्त तक चलती है, जिसमें दूध, दही, घी और शहद से महादेव का अभिषेक किया जाता है.' पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे प्रहर में शहद अर्पित करने का विधान है. इसके अलावा, रोजगार, धन प्राप्ति और कर्ज मुक्ति के लिए विशेष मंत्रों और उपायों की जानकारी दी गई है. कुंभ राशि में बन रहे विशेष राजयोगों के कारण इस बार की शिवरात्रि तुला, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जा रही है.

महादेव से वरदान पाने की सबसे चमत्कारी तिथि है महाशिवरात्रि, जानिए शिव-पार्वती विवाह का महत्व और पूजन के विशेष नियम

14 फरवरी 2026

गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम 'प्रार्थना स्वीकार' में महाशिवरात्रि 2026 के पावन पर्व की तैयारियों और महत्व पर चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि इस वर्ष 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू होगी, जो 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी. 'महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा का विधान है, जिसमें पहले पहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद अर्पित करना चाहिए.' इसके साथ ही शीघ्र विवाह के लिए उम्र के बराबर बेलपत्र चढ़ाने और 'नमः शिवाय' मंत्र के जाप का विशेष उपाय बताया गया. भक्तों को सलाह दी गई कि वे शिवलिंग पर हल्दी और शंख से जल न चढ़ाएं, बल्कि चंदन और गंगाजल का प्रयोग करें.

श्री कृष्ण की भक्ति से दूर होंगे शनि के कष्ट, जानें शनिवार के विशेष उपाय और पौराणिक कथा

13 फरवरी 2026

गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में आज शनि देव के कष्टों से मुक्ति पाने के अचूक उपायों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि शनि देव भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त हैं और जो लोग कृष्ण की उपासना करते हैं, उन्हें शनि कभी प्रताड़ित नहीं करते. 'ग्रह, नक्षत्र, देवी देवता, मानव, असुर, शुभ अशुभ सब कृष्ण के ही अधीन हैं, इसीलिए शनि भी कृष्ण की शक्ति के ही अधीन हैं.' विशेषज्ञों के अनुसार, शनिवार के दिन व्रत रखने और 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र का जाप करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव कम होता है. इसके अलावा, हनुमान जी की पूजा को भी शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है. कार्यक्रम में शनि के शुभ-अशुभ संकेतों और दान-पुण्य के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई.

शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता के लिए ऐसे करें श्री हरि की उपासना

12 फरवरी 2026

विजया एकादशी का व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. इस विशेष तिथि पर भगवान विष्णु की उपासना का विधान है. मान्यता है कि त्रेता युग में स्वयं भगवान श्री राम ने लंका विजय से पूर्व सागर तट पर इस व्रत को किया था, जिसके प्रभाव से उन्होंने रावण का अंत किया. इस दिन 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष फलदायी होता है. व्रत के दौरान तामसिक भोजन, चावल और बैंगन का त्याग करना चाहिए. शाम को आरती के बाद सात्विक आहार ग्रहण करें और अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन व दान देकर व्रत का पारण करें. यदि कोई शत्रुओं से परेशान है, तो उसे इस दिन शालिग्राम का पूजन और दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए.

पूजा में फूलों का महत्व, मनोकामना पूर्ति और ग्रहों की शांति के लिए अपनाएं ये खास ज्योतिषीय उपाय

11 फरवरी 2026

गुड न्यूज़ टुडे के विशेष कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में आज ज्योतिष शास्त्र में फूलों के महत्व पर चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि फूलों का संबंध सीधे तौर पर ग्रहों और देवी-देवताओं से होता है. 'सुगंधित फूल चढ़ाना भगवान की प्रसन्नता के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं और फूलों के जो इत्र होते हैं, वह फल को कई गुना बढ़ा देते हैं.' चर्चा के दौरान बताया गया कि शिक्षा में सफलता के लिए मां सरस्वती को पीले या सफेद फूल अर्पित करने चाहिए, जबकि करियर में बाधा दूर करने के लिए मां काली को गुड़हल का फूल चढ़ाना लाभकारी होता है. इसके अलावा, धन लाभ के लिए मां लक्ष्मी को गुलाब और शीघ्र विवाह के लिए लक्ष्मी-नारायण को संयुक्त रूप से फूलों की माला अर्पित करने का सुझाव दिया गया है. कार्यक्रम में कर्नाटक के प्रसिद्ध कोटिलिंगेश्वर महादेव मंदिर की महिमा का भी वर्णन किया गया.

रीवा और मंडी के महामृत्युंजय मंदिरों की महिमा, 1001 छिद्रों वाले शिवलिंग और रंग बदलती शिव प्रतिमा

09 फरवरी 2026

इस विशेष कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के रीवा और हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित अद्भुत महामृत्युंजय मंदिरों की महिमा का वर्णन किया गया है. रीवा के मंदिर में 1001 छिद्रों वाला एक अनोखा सफेद स्वयंभू शिवलिंग है, जिसे भगवान के सहस्त्र नेत्र माना जाता है. मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से असाध्य रोगों और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है. वहीं मंडी के 'छोटी काशी' में स्थित महामृत्युंजय मंदिर में महादेव की काले पत्थर की चतुर्भुज प्रतिमा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह दिन में पांच बार अपना स्वरूप बदलती है. कार्यक्रम में महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति और इसके जाप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसे 'वेद का हृदय' कहा जाता है. इन मंदिरों का इतिहास बघेल और मंडी के राजाओं के काल से जुड़ा है.

भक्ति का सबसे सरल मार्ग क्या है? जानिए सच्चे भक्त के लक्षण

08 फरवरी 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में आज भक्ति की महिमा और ईश्वर से जुड़ाव के रहस्यों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम में बताया गया कि भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि निराकार परब्रह्म के प्रति सर्वस्व समर्पण का भाव है. शास्त्रों में वर्णित 'नवधा भक्ति' के माध्यम से कोई भी साधक ईश्वर तक पहुँच सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ज्ञान और कर्मकांड का मार्ग अत्यंत कठिन है, जबकि भक्ति मार्ग सबसे सुलभ है जहाँ भक्त स्वयं को ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देता है. इसके साथ ही, मध्य प्रदेश के आगर मालवा स्थित 'केवड़ा स्वामी भैरव धाम' की अद्भुत महिमा का वर्णन किया गया, जहाँ भगवान भैरव जंजीरों में बंधे हुए हैं. मान्यता है कि यहाँ दाल-बाटी का भोग लगाने से बाबा प्रसन्न होते हैं और शत्रुओं पर विजय का वरदान देते हैं.