गुड न्यूज टुडे के प्रोग्राम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर पूजा ने दान की महिमा और विधान को विस्तार से समझाया. कार्यक्रम में बताया गया कि सनातन संस्कृति में दान की महिमा अपरंपार है. ज्योतिष जानकार मानते हैं कि दान करने से जीवन की तमाम परेशानियों का अंत खुद ब खुद होने लगता है. अन्न दान, जल दान और विद्या दान को अनिवार्य बताया गया है. अलग-अलग ग्रहों के हिसाब से अलग-अलग वस्तुओं का दान करने से विभिन्न समस्याओं का समाधान होता है. कार्यक्रम में राशि अनुसार दान के नियम भी बताए गए। मेष राशि वालों को सूर्य का दान नहीं करना चाहिए, वृष राशि वालों को शनि और लोहे का दान नहीं करना चाहिए. इसके अलावा प्लास्टिक, झाड़ू, स्टील की वस्तुओं और पहने हुए कपड़ों का दान अशुभ माना जाता है.
Good News Today के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में ब्रजमंडल की होली की अनोखी परंपराओं को दिखाया गया। ब्रज में होली बसंत पंचमी से लेकर फागुन पूर्णिमा तक पूरे 40 दिनों तक खेली जाती है। यह परंपरा 5000 साल से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली विश्व प्रसिद्ध है जिसमें महिलाएं पुरुषों पर लट्ठ बरसाती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। 24 फरवरी को बरसाना में लड्डूमार होली, 25 फरवरी को बरसाना में लट्ठमार होली, 26 फरवरी को नंदगांव में लट्ठमार होली और 28 फरवरी को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली खेली गई। मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में फुलडोल उत्सव और रंगभरी एकादशी से लेकर धुलंडी तक होली मनाई जाती है। राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम की निशानी ये परंपराएं आज भी जीवित हैं।
गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में होली के अवसर पर विशेष ज्योतिषीय उपाय बताए गए। कार्यक्रम में बताया गया कि शुक्र दो तारीख से सूर्योदय के बाद अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे जहां उनके साथ शनि का संयोग बनेगा। होली की शाम से जुड़े कई उपाय बताए गए जिनमें खुशहाली के लिए चंद्रमा को सफेद फूल डालकर अर्घ्य देना, सेहत के लिए ओम सोम सोमाय नमः मंत्र का जाप, प्रेम सफलता के लिए राधा कृष्ण को गुलाब की माला चढ़ाना शामिल है। विवाह में देरी के लिए शिव को इलायची चढ़ाने और होलिका में सात लौंग डालने का उपाय बताया गया। चंद्र ग्रहण के बाद राशि अनुसार दान करने की सलाह दी गई जिसमें मेष और कन्या राशि वालों को सफेद मिठाई, वृष और धनु को दूध, कर्क को चावल का दान करना चाहिए। होलिका दहन तीन मार्च को शाम छह बजकर छियालीस मिनट के बाद करना उचित बताया गया।
Good News Today के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में होलिका दहन और चंद्र ग्रहण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई। इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को शाम 6:46 बजे चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद किया जाना उचित होगा। ज्योतिषी बताते हैं कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए और रात 11:30 से 12:50 के बीच का समय शुभ मुहूर्त है। चंद्र ग्रहण 3 मार्च को शाम 6 बजे से शुरू होगा जो लगभग 48 मिनट का रहेगा। यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर लगेगा। सूतक काल सुबह 9:38 बजे से शुरू होगा। होलिका दहन के दौरान काले तिल, हरी इलायची, कपूर, चंदन की लकड़ी और हवन सामग्री अर्पित करने से विभिन्न समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए। 4 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी।
GNT के शो प्रार्थना हो स्वीकार में तिलक के महत्व और लाभ के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि माथे पर लगाया गया तिलक न केवल सौभाग्य लाता है बल्कि कुंडली के दोषों को भी दूर करता है। शास्त्रों में चंदन, रोली, केसर, भस्म और कुमकुम से तिलक लगाने की परंपरा बताई गई है। तिलक दोनों भौंहों के बीच आज्ञा चक्र पर लगाया जाता है जिससे मस्तिष्क की तंत्रिकाएं शांत होती हैं। चंदन का तिलक मानसिक शांति देता है और क्रोध को कम करता है। कुमकुम का तिलक ज्ञान चक्र प्रज्वलित करता है जबकि केसर का तिलक शीतलता प्रदान करता है। हल्दी का तिलक परीक्षा में सफलता देता है। तिलक से विभिन्न ग्रहों को मजबूत किया जा सकता है। लाल चंदन से सूर्य, सफेद चंदन से चंद्रमा, नारंगी सिंदूर से मंगल, केसर से बृहस्पति मजबूत होते हैं। शो की प्रस्तुति सुनीता राय शर्मा ने की।
गुड न्यूज टुडे के इस कार्यक्रम में पूजा उपासना में प्रयोग होने वाली विभिन्न सामग्रियों के महत्व और उनके चमत्कारी प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि गणपति को मोदक प्रिय है और हनुमान जी को लड्डू चढ़ाने से मुकदमों और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। देवी दुर्गा को शुक्रवार के दिन सफेद वस्तु चढ़ाने से लक्ष्मी की कामना पूरी होती है। कपूर के तीन प्रकार बताए गए - जापानी, भीमसेनी और पत्री कपूर। आरती में कपूर जलाने की विधि समझाई गई। दीपक जलाने के पीछे का कारण यह बताया गया कि सूर्य नारायण की उपस्थिति के लिए दीपक जलाया जाता है और यह नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करता है। धन के लिए घी का दीपक, रोग शांति के लिए सरसों के तेल का दीपक और मनोकामना पूर्ण करने के लिए चमेली के तेल का दीपक जलाने का विधान बताया गया।
गुड न्यूज टुडे के शो प्रार्थना हो स्वीकार में एंकर सरगम पंच श्रीवास्तव ने शनिदेव के पांच प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिरों की महिमा बताई। इनमें महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर शामिल है, जहां पांच फीट नौ इंच ऊंची प्रतिमा स्थापित है। मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित जूनी इंदौर का शनि मंदिर दुनिया का सबसे प्राचीन शनि मंदिर माना जाता है। ग्वालियर के पास ऐंती गांव में त्रेतायुगीन शनि मंदिर है, जिसकी प्रतिमा उल्कापिंड से निर्मित बताई जाती है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में विश्वनाथगंज से दो किलोमीटर दूर कुशपरा के जंगल में शनि धाम स्थित है। दिल्ली के मेहरौली में फतेहपुर बेरी का शनि मंदिर अष्ट धातु से बनी सबसे बड़ी मूर्ति के लिए विख्यात है। कार्यक्रम में ज्योतिष विशेषज्ञ ने बताया कि शनिदेव धर्माचारी व्यक्ति से प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती तथा ढैया में भी सच्चे भक्तों को कष्ट नहीं देते।
गुड न्यूज टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना में रंगभरी एकादशी की विशेषता बताई गई। यह तिथि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है जो काशी में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव विवाह के बाद पहली बार माता पार्वती को लेकर वाराणसी गए थे। काशीवासियों ने रंग और गुलाल उड़ाकर उनका स्वागत किया था। इस वर्ष यह एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। श्रीहरि को आंवला अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। काशी में इस दिन से होली का पर्व आरंभ होता है जो छह दिन तक चलता है। बाबा विश्वनाथ का विशेष शृंगार होता है और भक्त रंग, अबीर, गुलाल से होली खेलते हैं। व्रत रखने से धन, स्वास्थ्य और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
गुड न्यूज टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना हो स्वीकार में रंगों और प्रेम के संबंध पर चर्चा की गई. ज्योतिष विशेषज्ञ ने बताया कि हर रंग की एक अलग तरंग होती है जो प्रेम और भावनाओं को नियंत्रित करती है. लाल रंग को मंगल और ऊर्जा का प्रतीक बताया गया. पीला रंग पवित्रता और बृहस्पति से जुड़ा है. हरा रंग प्रकृति और शांति का प्रतीक है जो मन को रोग मुक्त करता है. नीला रंग गहराई और अध्यात्म से जुड़ा है. गुलाबी रंग प्रथम दृष्टि प्रेम का प्रतीक बताया गया. सफेद रंग सातों रंगों का मिश्रण है और ईश्वर से संबंधित है. काला रंग शनि के प्रभाव को दर्शाता है. कार्यक्रम में बताया गया कि दुनिया में मुख्य रूप से दो शक्तियां काम करती हैं - रंग और तरंग। रंगों से ही हमारा मिलन होता है और रंग ही हमें दूर भी करते हैं.
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की परंपरा पर विशेष रिपोर्ट। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल को दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह चार से छह बजे तक भस्म आरती होती है। यह रिपोर्ट बताती है कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत, भस्म आरती में चिता की राख का उपयोग नहीं होता। वास्तव में कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़ियों को मंत्रोच्चार के साथ जलाकर भस्म तैयार की जाती है। महाकाल मंदिर परिसर तीन हिस्सों में विभाजित है - निचले हिस्से में महाकालेश्वर, मध्य में औकारेश्वर और ऊपरी खंड में नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार राजा चंद्रसेन के समय दूषण नामक राक्षस का वध करने के लिए भगवान शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए थे।
गुजरात के भरूच जिले के जंबूसर में स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर एक अद्भुत तीर्थ स्थल है जहां दिन में दो बार समुद्र खुद शिवलिंग का जलाभिषेक करता है। अरब सागर के तट पर बना यह प्राचीन मंदिर चौबीस घंटे में दो बार पानी में पूरी तरह डूब जाता है और फिर उभर आता है। मान्यता है कि शिव पुत्र कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध करने के बाद प्रायश्चित के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी। स्कंद पुराण और शिव पुराण में इस तीर्थ का उल्लेख मिलता है। यहां माही नदी और सागर का संगम होता है इसलिए इसे महीसागर पीठ भी कहा जाता है। ज्वार-भाटा के कारण समुद्र का पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है और शिवलिंग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। भक्त गुजराती तिथि के अनुसार दर्शन के लिए आते हैं क्योंकि पानी का समय रोज बदलता रहता है।