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प्रार्थना हो स्वीकार

बंगाल में बुलडोजर एक्शन और ईरान-अमेरिका युद्ध के वायरल दावों का सच

22 जून 2026

सोशल मीडिया पर इन दिनों कई भ्रामक वीडियो वायरल हो रहे हैं। पहले दावे में एक वीडियो शेयर कर कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में अवैध कब्जों पर बुलडोजर एक्शन हो रहा है। गुड न्यूज़ टुडे की फैक्ट चेक टीम की पड़ताल में यह दावा झूठा साबित हुआ। असल में यह वीडियो बांग्लादेश के चटगांव का है, जहां एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का रैंप बनाने के लिए दुकानों को हटाया गया था। दूसरे वायरल वीडियो में दावा किया गया कि ईरान ने एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। जांच में सामने आया कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि एआई की मदद से बनाया गया है। इसके अलावा बुलेटिन के आखिरी हिस्से में कुछ दिल छू लेने वाले वायरल वीडियो भी दिखाए गए हैं। इनमें एक बच्ची द्वारा महात्मा गांधी बने बच्चे को खाना खिलाना, गाय को पानी पिलाती बच्ची, नारियल के खोल से कलाकृतियां बनाता बुजुर्ग और बॉलीवुड गाने गाती विदेशी महिला शामिल हैं।

सनातन धर्म, ज्योतिष और विज्ञान में 108 अंक का महत्व, जानें इसके पीछे का रहस्य

22 जून 2026

सनातन धर्म में 108 के अंक को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों में 108 मनकों की माला का ही उपयोग किया जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है और पृथ्वी से सूर्य की दूरी भी सूर्य के व्यास की 108 गुना है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं, जिनका गुणनफल 108 आता है। इसी तरह 27 नक्षत्रों के चार चरणों का गुणनफल भी 108 ही होता है। योग विज्ञान के मुताबिक, मानव शरीर में 108 मुख्य नाड़ियां होती हैं जो हृदय चक्र में मिलती हैं। इसके अलावा उपनिषदों की संख्या 108 है और भगवान शिव के तांडव में 108 मुद्राएं शामिल हैं। जैन और बौद्ध धर्म में भी 108 अंक का विशेष महत्व बताया गया है। समुद्र मंथन के दौरान भी 54 देवता और 54 राक्षस यानी कुल 108 लोग शामिल थे। यही कारण है कि 108 को ब्रह्मांड की ऊर्जा और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

योग दिवस: सूर्य नमस्कार के 12 आसनों से पाएं निरोगी काया, जानें सही विधि और मंत्र

21 जून 2026

21 जून को पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है. योग से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं. महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं. योगासनों में सूर्य नमस्कार को सबसे उत्तम माना गया है. सूर्य नमस्कार के 12 आसनों के नियमित अभ्यास से मोटापा दूर होता है, शरीर में लचीलापन आता है, पाचन तंत्र सुधरता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसे सुबह खाली पेट उगते सूर्य के सामने करना चाहिए. सूर्य नमस्कार करते समय 12 विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है. कमर या रीढ़ की हड्डी की समस्या वाले लोगों को इसे करने से बचना चाहिए. जो लोग शारीरिक रूप से सूर्य नमस्कार करने में असमर्थ हैं, वे सूर्य के सामने पद्मासन या सुखासन में बैठकर इसके मंत्रों का जाप कर सकते हैं. काले कपड़े पहनकर और अभ्यास के तुरंत पहले या बाद में पानी पीने से बचना चाहिए.

योग से ईश्वर का साक्षात्कार, महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग और योग सूत्र के रहस्य

20 जून 2026

योग, ध्यान और साधना के जरिए आत्मा का परमात्मा से मिलन संभव माना जाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह श्वास, ध्यान और जीवन शैली का एक समग्र विज्ञान है। वैदिक काल से चली आ रही यह साधना मन को एकाग्र करती है और तनाव को दूर कर जीवन में संतुलन लाती है। महर्षि पतंजलि ने चित्त वृत्तियों के नियंत्रण को योग कहा है और इसके आठ अंग बताए हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इन आठों अंगों को मिलाकर अष्टांग योग कहा जाता है। योग सूत्र की रचना के कारण महर्षि पतंजलि को योग का पिता कहा जाता है। योग सूत्र को चार भागों में बांटा गया है, जिन्हें पाद कहते हैं- समाधि पाद, साधन पाद, विभूति पाद और कैवल्य पाद। अष्टांग योग के पालन से मनुष्य का तन स्वस्थ और मन शांत रहता है। इसके अभ्यास से इंद्रियों पर पूर्ण संयम प्राप्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति के शिखर पर पहुंचकर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

वेद, उपनिषद और भगवद्गीता में योग का महत्व, जानिए सनातन धर्म में कैसे हुआ योग का उद्भव

19 जून 2026

भारतीय धर्म ग्रंथों में योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का साधन माना गया है. गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' के इस एपिसोड में वेदों, उपनिषदों, पुराणों और श्रीमद्भागवत गीता में योग की विस्तृत व्याख्या की गई है. ऋग्वेद और अथर्ववेद में ध्यान, समाधि और प्राणशक्ति का उल्लेख मिलता है. वहीं, 108 प्रमुख उपनिषदों में से 20 को योग उपनिषद कहा गया है. शिव पुराण, अग्नि पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी योग और ओंकार साधना का वर्णन है. भगवान शिव को संसार का सबसे बड़ा योगी और श्रीकृष्ण को सबसे बड़ा कर्मयोगी माना गया है. गीता में श्रीकृष्ण ने 'योगः कर्मसु कौशलम्' का संदेश दिया है, जिसका अर्थ है कुशलतापूर्वक कर्म करना ही योग है. महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग और प्राणायाम के माध्यम से शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है. योग सनातन धर्म की एक ऐसी सर्वोच्च पद्धति है, जो मनुष्य को मोक्ष और आत्म-कल्याण के मार्ग पर ले जाती है.

कुंडली में गुरु ग्रह को कैसे बनाएं मजबूत? जानें देव गुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के महामंत्र

18 जून 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में जानिए देव गुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के महामंत्र और जीवन में उनका महत्व. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नौ ग्रहों में बृहस्पति को गुरु और मंत्रणा का कारक माना जाता है. कुंडली में बृहस्पति के मजबूत होने से व्यक्ति को सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है. वहीं, बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या, धन प्राप्ति और विवाह में बाधाएं आती हैं. साथ ही गंभीर बीमारियां और संतान पक्ष की समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं. इस खास पेशकश में बताया गया है कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करने, पीले वस्त्र धारण करने, केले के पौधे की पूजा करने और चने की दाल व गुड़ का भोग लगाने से गुरु ग्रह के दोष दूर होते हैं. इसके अलावा 'ओम ब्रिम बृहस्पतये नमः' और 'ओम ग्रांग ग्रिंग ग्राउंग सह गुरुवे नमः' जैसे बीज मंत्रों का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और देव गुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

गरुड़ पुराण में छिपा है मृत्यु के बाद का रहस्य, जानें कैसे तय होता है स्वर्ग और नर्क का सफर

17 जून 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में गरुड़ पुराण के अनुसार जन्म और मृत्यु के रहस्यों पर चर्चा की गई है. सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है लेकिन आत्मा अमर रहती है. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही यमलोक में उसके पाप और पुण्य का हिसाब होता है. अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग और बुरे कर्म करने वाले नर्क के अधिकारी होते हैं. मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक यात्रा और सद्गति के लिए किए जाने वाले कर्मों का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसके अलावा, जीवन में सफलता और मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु, एकादशी व्रत, गंगा, तुलसी, ज्ञानी जन और गाय की पूजा का महत्व बताया गया है. गौदान, भूमि दान, तिल और स्वर्ण दान जैसे कर्मों से परलोक में आत्मा को कष्टों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.

शारीरिक कष्टों को दूर करने के लिए कैसे करें हनुमान बाहुक का पाठ?

16 जून 2026

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग शारीरिक कष्टों और बीमारियों से पीड़ित हैं। कई बार बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पाता है। ऐसे में हनुमान बाहुक का पाठ एक रामबाण उपाय है। माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने बांहों में असहनीय पीड़ा और तंत्र प्रयोग से मुक्ति पाने के लिए हनुमान बाहुक की रचना की थी। इसके पाठ से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और एक शक्तिशाली रक्षा कवच बनता है। पाठ की उत्तम विधि के लिए हनुमान जी और प्रभु श्री राम की प्रतिमा स्थापित करें। घी, आंवले या चमेली के तेल का दीपक जलाएं और एक पात्र में जल भरकर रखें। श्री राम की स्तुति के बाद हनुमान जी का ध्यान कर पाठ करें। पाठ के बाद पात्र का थोड़ा जल रोगी को पिलाएं और बचा हुआ जल रोगग्रस्त हिस्से पर लगाएं। इस पाठ की शुरुआत मंगलवार से करनी चाहिए और इसे विषम संख्या जैसे एक, तीन, पांच या ग्यारह बार करना चाहिए। पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ हर संकट और पीड़ा का अंत करता है।

सोमवती अमावस्या के अचूक उपाय और सूर्य के मिथुन गोचर का राशियों पर असर

15 जून 2026

सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर भगवान शिव, चंद्रदेव और पितरों की आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पीपल के वृक्ष की पूजा और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन पितृ दोष और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जा सकते हैं, जैसे काले तिल से तर्पण करना और पान के पत्ते पर धान व हल्दी रखकर तुलसी के पास रखना। इसके साथ ही 15 जून को सूर्यदेव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मिथुन राशि में बुध के पहले से मौजूद होने के कारण बुधादित्य और भद्र योग का निर्माण हो रहा है। सूर्य के इस गोचर से मेष, मिथुन, कन्या, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वालों को विशेष लाभ होगा, जबकि वृषभ, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों को सावधान रहने की आवश्यकता है। इस गोचर के प्रभाव से प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उथल-पुथल की भी संभावना है।

पेड़-पौधों से संवरेगी आपकी किस्मत, जानिए किस ग्रह दोष को दूर करने के लिए कौन सा पौधा लगाएं

14 जून 2026

हमारे आसपास मौजूद पेड़-पौधे न सिर्फ पर्यावरण के लिए जरूरी हैं, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इनका सीधा संबंध हमारे ग्रह-नक्षत्रों और भाग्य से भी होता है। गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना और स्वीकार' के इस एपिसोड में बताया गया है कि कैसे सही पौधे लगाने से कुंडली के ग्रह दोष दूर किए जा सकते हैं। हर ग्रह का किसी न किसी पौधे से संबंध होता है। उदाहरण के लिए, सूर्य को मजबूत करने के लिए मदार, चंद्रमा के लिए चंदन या बेला, मंगल के लिए आंवला, बुध के लिए दूब, बृहस्पति के लिए केले का पौधा, शुक्र के लिए हरसिंगार और शनि देव की कृपा पाने के लिए शमी का पौधा लगाना चाहिए। इसके अलावा, महादेव को प्रिय बेल का पौधा और भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी का पौधा घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। हालांकि, पीपल का पौधा घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए। इन पौधों को सही दिशा, नक्षत्र और विधि-विधान के साथ लगाने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं.

शादी में हो रही है देरी? जानें विवाह में रुकावट डालने वाले 4 ज्योतिषीय योग और उनके अचूक उपाय

13 जून 2026

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह में देरी या रुकावट के पीछे कई ग्रहों की स्थिति और ज्योतिषीय योग जिम्मेदार होते हैं. कुंडली में कमजोर बृहस्पति और शुक्र के कारण विवाह में विलंब होता है. मुख्य रूप से चार ऐसे योग हैं जो शादी में बाधा डालते हैं. पहला कारण शनि और चंद्र का विष योग है, जिससे विवाह में देरी और अकेलापन आता है. इसका उपाय शिवजी की उपासना है. दूसरा कारण सप्तम भाव में बृहस्पति का होना है, जो महिलाओं की कुंडली में तालमेल की समस्या पैदा करता है. इसके लिए शिवजी की गुरु रूप में पूजा करनी चाहिए. तीसरा योग शुक्र और चंद्र की युति है, जिससे वैवाहिक सुख में कमी आती है. इसके समाधान के लिए श्री हरि और माता लक्ष्मी की उपासना के साथ पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है. चौथा कारण शुक्र की अशुभ स्थिति है, जिसके लिए माता लक्ष्मी की पूजा और ओपल धारण करना लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा मांगलिक दोष भी विवाह में बड़ी रुकावट पैदा करता है.