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प्रार्थना हो स्वीकार

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से मिलती है ज्ञान, तप और सिद्धि की प्राप्ति

19 मार्च 2026

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करने वाली। मां के दाहिने हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से ज्ञान, विद्या, सिद्धि और तप बल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि इनकी पूजा से हर प्रकार की सिद्धियां और ज्ञान का वरदान मिल सकता है। पिछले जन्म में पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक केवल फल, फूल और बाद में केवल बेलपत्र खाकर तप किया। इस कठिन साधना के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी देवी कहा गया। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग सबसे प्रिय है। चंद्रमा को बलवान करने के लिए देवी को सफेद पुष्प अर्पित करने और ओम श्राम श्रीं श्रौं सह चंद्रमसे नमः का जाप करने का विधान है।

चैत्र नवरात्रि शुरू, मां शैलपुत्री की पूजा विधि, भोग और मनोकामना पूर्ति के उपाय

18 मार्च 2026

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि में नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों का पूजन किया जाता है। माँ शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और ये वृषभ यानी नंदी बैल पर सवार होती हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, पूर्व जन्म में माँ शैलपुत्री का नाम सती था जो भगवान शिव की पत्नी थीं। पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव के अपमान से आहत होकर उन्होंने यज्ञ कुंड में स्वयं को भस्म कर दिया और अगले जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लीं। माँ शैलपुत्री की उपासना से जीवन में स्थिरता, सुख, समृद्धि, आरोग्यता और लंबी आयु का वरदान मिलता है। देवी को गाय के शुद्ध घी का भोग सबसे प्रिय है। सफेद फूलों का हार, सफेद वस्त्र और सफेद मिठाई अर्पित करनी चाहिए। मंत्र 'ओम दुम दुर्गाय नमः' का जाप करना चाहिए। नवरात्रि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक भोजन और आचरण की शुद्धता बनाए रखना आवश्यक है।

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि जानें

17 मार्च 2026

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होने जा रही है और समापन 27 मार्च को होगा। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर सवार होकर विदा होंगी, जिसे समृद्धि का सूचक माना जाता है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है, जिसे विक्रम संवत भी कहते हैं। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। इस बार महा अष्टमी और महा नवमी एक साथ पड़ने जा रही है। नवमी तिथि 26 मार्च को दोपहर 2:15 से शुरू होकर 27 मार्च को दोपहर 12:02 तक रहेगी। व्रत रखने वाले भक्त दशमी को पारण करेंगे।

सोम प्रदोष व्रत से संतान प्राप्ति, चंद्रमा दोष निवारण और मनोकामना पूर्ति का फल

16 मार्च 2026

आज सोम प्रदोष की तिथि है। माना जाता है कि इस दिन शिवजी की उपासना करने वाले भक्त की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष व्रत को सर्व सुख प्रदान करने के साथ परम कल्याणकारी बताया गया है। हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष का व्रत रखा जाता है। सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहा जाता है। सोम प्रदोष व्रत रखने से मनचाही इच्छा पूरी होती है, संतान संबंधी मनोकामना की पूर्ति होती है और चंद्रमा संबंधी समस्याओं का निवारण आसानी से होता है। प्रदोष काल में विशेष रूप से शाम के समय भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए। शिवजी को जल, बिल्वपत्र, सफेद वस्तु का भोग, कच्चा दूध और मिश्री युक्त दूध अर्पित करना चाहिए। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से रोग दूर होते हैं, विवाह की बाधाएं दूर होती हैं और धन की कमी खत्म होती है।

क्या है पूजा स्थल की सही दिशा? जानिए घर के मंदिर स्थापित करने का क्या है नियम

15 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर शिव गुप्ता साहिल देव ने बताया कि घर में मंदिर स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भाग्य में सुधार आता है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, घर का मंदिर ईशान कोण या पूर्व दिशा में होना चाहिए ताकि सूर्य की रोशनी आ सके। मंदिर में पंच देवताओं - गणेश, लक्ष्मी, शिव, नारायण और लड्डू गोपाल - की स्थापना करनी चाहिए। मंदिर को साफ-सुथरा रखना, सुबह-शाम शुद्ध घी का दीपक जलाना और नियमित पूजा करना आवश्यक है। मूर्तियां नौ अंगुल से बड़ी नहीं होनी चाहिए और टूटी-फूटी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। शयन कक्ष में मंदिर बनाने से बचें और यदि बनाना पड़े तो पर्दा लगाएं। लाल रंग की जगह पीले रंग के कपड़े का उपयोग करें। नियमित पूजा से घर में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है।

पापमोचनी एकादशी पर पापों से मिलेगी मुक्ति, जानिए पूजा विधि

14 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम प्रार्थना और स्वीकार में पापमोचनी एकादशी के महत्व और पूजा विधि की जानकारी दी गई। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी पर व्रत रखने से जाने-अनजाने किए गए सभी पापों का नाश हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की संयुक्त उपासना करने से जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम में बताया गया कि एकादशी के व्रत का सीधा प्रभाव मन और शरीर पर पड़ता है और यह चंद्रमा के खराब प्रभाव को रोकने में सहायक है। पूजा विधि में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा, पीले वस्त्र, पीले फूल, पीली मिठाई अर्पित करना और विष्णु सहस्रनाम या भगवत कथा का पाठ शामिल है। इस व्रत से गोदान का पुण्य मिलता है और अंत में वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। मंत्र जाप के लिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय का उच्चारण करना चाहिए।

सबरीमाला मंदिर की 18 सीढ़ियों का रहस्य, एक खास दिन प्रकट होती है दिव्य ज्योति?

13 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर गीतिका पंत ने केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े रहस्यों और परंपराओं पर चर्चा की। यह मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है जिन्हें भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी अवतार का पुत्र माना जाता है। मंदिर की 18 सीढ़ियों का विशेष महत्व है जो मानवीय इंद्रियों, भावनाओं और गुणों का प्रतीक हैं। यहां 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक पाबंदी थी क्योंकि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव मानते हुए खत्म कर दिया था, लेकिन मामला पुनर्विचार के लिए अप्रैल 2026 में सुनवाई के लिए लंबित है। मकर संक्रांति पर यहां दिव्य ज्योति प्रकट होने का दावा किया जाता है जिसे भक्त भगवान अयप्पा का आशीर्वाद मानते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को 41 दिन का कठोर व्रत रखना पड़ता है।

सबरीमाला मंदिर की 18 सीढ़ियों का रहस्य, एक खास दिन प्रकट होती है दिव्य ज्योति?

13 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर गीतिका पंत ने केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े रहस्यों और परंपराओं पर चर्चा की। यह मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है जिन्हें भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी अवतार का पुत्र माना जाता है। मंदिर की 18 सीढ़ियों का विशेष महत्व है जो मानवीय इंद्रियों, भावनाओं और गुणों का प्रतीक हैं। यहां 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक पाबंदी थी क्योंकि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव मानते हुए खत्म कर दिया था, लेकिन मामला पुनर्विचार के लिए अप्रैल 2026 में सुनवाई के लिए लंबित है। मकर संक्रांति पर यहां दिव्य ज्योति प्रकट होने का दावा किया जाता है जिसे भक्त भगवान अयप्पा का आशीर्वाद मानते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को 41 दिन का कठोर व्रत रखना पड़ता है।

बृहस्पति की कृपा से करियर में मिलेगी सफलता, जानिए नौकरी में तरक्की पाने के ज्योतिषीय उपाय

12 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में शुगुफ्ता साहिल देव ने नौकरी में तरक्की पाने के ज्योतिषीय उपायों के बारे में बताया। कार्यक्रम में बताया गया कि नौकरी और करियर गुरु ग्रह बृहस्पति के अधीन होते हैं और बृहस्पति को बलवान बनाकर नौकरी में तरक्की पाई जा सकती है। जानकारों के अनुसार, बृहस्पति वित्त, कानून और शिक्षा से संबंध रखते हैं। कार्यक्रम में कुछ उपाय बताए गए जिनमें बृहस्पतिवार को केले की जड़ में जल डालना, चने की दाल और केले का दान करना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना, हल्दी मिलाकर सूर्य को जल अर्पित करना और पीले रंग का रुमाल साथ रखना शामिल हैं। बृहस्पति की कृपा से कानूनी मामलों और आर्थिक परेशानियों से भी राहत मिल सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की के लिए भी बृहस्पति के उपाय कारगर बताए गए।

सूर्य यंत्र की पूजा से प्रसन्न होते हैं भगवान भास्कर

11 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे के शो 'प्रार्थना हो स्वीकार' में सूर्य यंत्र की पूजा विधि और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। रविवार को सूर्य देव की उपासना का दिन माना जाता है और इस दिन सूर्य यंत्र की पूजा शुभ फलदायी मानी जाती है। सूर्य यंत्र दो प्रकार से बनाया जाता है - कांसे या स्वर्ण से, और भोजपत्र या श्वेत वस्त्र पर लाल चंदन से। ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो, उन्हें सूर्य यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। यंत्र की स्थापना रविवार को करें और 'ओम् घृणी सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। सूर्य यंत्र से मान-सम्मान मिलता है, नेत्र और हृदय रोगों में लाभ होता है, सरकारी मामलों में सफलता मिलती है। शो में बताया गया कि पिता का सम्मान करना और रविवार को उपवास रखना भी सूर्य को प्रसन्न करने के उपाय हैं।

मंगलवार को हनुमान जी की उपासना से जीवन के संकट होते हैं दूर, जानें चमत्कारी मंत्र

10 मार्च 2026

प्रार्थना हो स्वीकार कार्यक्रम में बताया गया कि मंगलवार को हनुमान जी की उपासना परम फलदायी मानी जाती है। इस दिन हनुमान जी के मंत्रों के जाप से जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो सकते हैं। कार्यक्रम में कई चमत्कारी मंत्रों की जानकारी दी गई। धन-संपत्ति की समस्या के लिए 'ओम श्री हनुमते नमः', विजय के लिए 'ओम वीरा वीराय नमः', रोजगार के लिए 'ओम पिंगाक्षाय नमः', और मान-सम्मान के लिए 'ओम व्यापकाय नमः' मंत्र का जाप करना लाभकारी बताया गया। बताया गया कि मंगलवार को मंदिर जाकर हनुमान जी के सामने चालीसा का पाठ करने, बूंदी या लड्डू का भोग लगाने और निश्चित संख्या में मंत्र जाप करने से हर प्रकार की समस्या का समाधान हो सकता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि संकट मोचन मंत्र 'ओम नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्व शत्रु संहारणाय, सर्व रोग हराय, सर्व वशीकरणाय रामदूताय स्वाहा' सबसे शक्तिशाली माना जाता है।