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प्रार्थना हो स्वीकार

शिक्षा में सफलता के लिए कैसे करें सूर्य उपासना और क्या है आदित्य हृदय स्तोत्र का महत्व? जानिए सबकुछ

14 जनवरी 2026

गुड न्यूज़ टुडे के खास कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में एंकर Geetika Pant ने शिक्षा और करियर में सफलता के लिए सूर्य उपासना के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम में बताया गया कि 'शिक्षा में तरक्की और सफलता के लिए सूर्य देव की उपासना बेहद कारगर मानी गई है।' ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सूर्य को ज्ञान और एकाग्रता का स्वामी माना जाता है। यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो, तो शिक्षा में बाधाएं आती हैं, जिन्हें आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ और सूर्य के बीज मंत्रों के जाप से दूर किया जा सकता है। Geetika Pant ने विद्यार्थियों के लिए सूर्य नमस्कार, ब्रह्म मुहूर्त में उठने और पिता का सम्मान करने जैसे अचूक उपाय साझा किए। इसके अलावा, सूर्य के 21 चमत्कारी नामों और रविवार के विशेष नियमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जो स्मरण शक्ति बढ़ाने और जीवन में तेज लाने में सहायक हैं।

मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना और दान का क्या है महत्व, किन उपायों से बदलेंगे भाग्य के सितारे? जानिए

13 जनवरी 2026

गुड न्यूज टुडे की एंकर सरगम पंथ श्रीवास्तव ने मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्य देव की उपासना और दान के महत्व पर प्रकाश डाला है. उन्होंने बताया कि 'सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है और इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं.' इस विशेष बुलेटिन में बताया गया कि कैसे सूर्य के उत्तरायण होने से ऋतुओं में परिवर्तन आता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है.

श्री हरि की कृपा से दूर होंगे सारे संकट और दरिद्रता, जानिए षटतिला एकादशी पर तिल के 6 चमत्कारी प्रयोग

12 जनवरी 2026

प्रार्थना हो स्वीकार कार्यक्रम में सरगम पंत श्रीवास्तव के साथ जानिए माघ मास की षटतिला एकादशी का महत्व, जिसे मोक्षदायिनी भी कहा गया है। जानकारों के अनुसार, 'भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न होने के कारण इस तिल का बहुत महत्व है'। इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग किया जाता है - तिल से स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन और दान। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 13 जनवरी को शुरू होकर 14 जनवरी को समाप्त होगी, इसलिए व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा.

बच्चों की पढ़ाई में आ रही है दिक्कत? जानें शिक्षा में सफलता के अचूक ज्योतिषीय उपाय

11 जनवरी 2026

हर माता-पिता का सपना होता है कि उनकी संतान शिक्षा में सफल हो, लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पाता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बच्चों की शिक्षा और ग्रहों के बीच एक गहरा संबंध है। कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चे का जीवन मुख्य रूप से चंद्रमा, बुध और सूर्य से प्रभावित होता है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात पर जोर दिया: 'बुध का खराब होना यह स्पष्ट लक्षण है कि पढ़कर तो गए और जहां लिखना है वहां जाकर भूल गए।' विशेषज्ञ ने ग्रहों की स्थिति को मजबूत करने के लिए कई उपाय सुझाए, जैसे कि सही रत्न धारण करना, दुर्गा जी और हनुमान जी की उपासना करना, और अध्ययन की जगह पर चंदन की सुगंध का प्रयोग करना। इसके अतिरिक्त, बच्चों की स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए गायत्री मंत्र के जाप को विशेष रूप से प्रभावी बताया गया है।

संकटमोचन दूर करेंगे संकट, जानिए हनुमान पूजा के चमत्कारी

10 जनवरी 2026

गुड न्यूज़ टुडे पर गुंजन ने बताया कि हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए राम नाम, सिंदूर, चमेली का तेल, ध्वज और तुलसी दल जैसे पाँच उपाय प्रमुख हैं. प्रस्तुतकर्ता के अनुसार, 'हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सिंदूर अर्पित किया जाता है. ध्यान रहे कि यह सिंदूर नारंगी रंग का होना चाहिए.' सिंदूर, तुलसी और चमेली का तेल हनुमान जी को अतिप्रिय हैं; मंगलवार को इनका प्रयोग दिव्य फल देता है. ध्वज चढ़ाने और शाखा की पूजा करने से संपत्ति व सुरक्षा संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं. हनुमान जी की भक्ति सरल तरीके से करें और पहले राम नाम का जाप अवश्य करें. गुंजन ने आगे बताया कि श्रद्धा व विश्वास से ही जीवन की समस्याओं का समाधान संभव है.

गुस्से और आलस से हैं परेशान? ये जादुई रत्न बदल सकते हैं आपकी किस्मत और आदतें

08 जनवरी 2026

गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'प्रार्थना हो स्वीकार' में ज्योतिषीय सलाह के माध्यम से बताया गया कि कैसे रत्न इंसान के व्यक्तित्व और आदतों को प्रभावित करते हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि गुस्से, आलस और नशे जैसी बुरी आदतों को दूर करने में रत्न अहम भूमिका निभा सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि और राहु के प्रभाव से नशे की लत लग सकती है, जिसे जमुनिया और गोमेद जैसे रत्नों से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, आलस दूर करने के लिए गार्नेट और गुस्से पर काबू पाने के लिए मोती या मूंगा धारण करने की सलाह दी गई है।

सृष्टि का पालन और ब्रह्मांड का संचालन करते हैं ब्रह्मदेव, जानिए महिमा और महाउपाय

07 जनवरी 2026

'प्रार्थना हूं स्वीकार' के इस विशेष अंक में एंकर गुंजन दीक्षित और पंडित शैलेंद्र पांडेय ने त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश की महिमा पर चर्चा की। पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि 'भगवान की नाभि से जो कमल निकलने पर जो ब्रह्मा जी का दर्शन हुआ तो इसलिए इनको नाभिज अज और कमरज भी कहा जाता है।' कार्यक्रम में विस्तार से बताया गया कि कैसे ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और उनके चार मुख चारों वेदों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का प्रतिनिधित्व करते हैं.

माघ महीने में माधव की उपासना से दूर होंगे कष्ट, ज्योतिषाचार्य से जानें दान और स्नान का महत्व

06 जनवरी 2026

माघ का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, जिसे 'माधव' का महीना भी कहा जाता है. इस विशेष बुलेटिन में एंकर गुंजन और ज्योतिषी पंडित शैलेंद्र पांडेय माघ मास के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा कर रहे हैं. पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, 'माघ का महीना पहले माध का महीना था जो बाद में माघ हो गया.' इस महीने में संगम तट पर कल्पवास, गंगा स्नान और तिल-गुड़ के दान का विशेष विधान है.

संतान की खुशहाली और संकट मुक्ति के लिए करें संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानिए विधि और नियम

05 जनवरी 2026

'हिंदू धर्म शास्त्र के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है.' यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन के संकटों को दूर करने के लिए समर्पित है. कार्यक्रम में माघ महीने की चतुर्थी, जिसे तिल चतुर्थी भी कहा जाता है, के पूजन विधान और लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया.

श्री राम के जीवन से हमें क्या सिख मिलती है? जानिए मर्यादा पुरुषोत्तम की महिमा

04 जनवरी 2026

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन आदर्शों की एक ऐसी गाथा है, जो हर युग में प्रासंगिक है। गुड न्यूज टुडे की इस खास पेशकश में एंकर सुनीता राइ शर्मा ने बताया कि कैसे भगवान राम ने एक आज्ञाकारी पुत्र, आदर्श भाई और न्यायप्रिय राजा के रूप में समाज के सामने उदाहरण पेश किया। 'राम के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि मर्यादा का पालन करते हुए कैसे कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।' इस बुलेटिन में रामेश्वरम धाम की महिमा और वहां स्थापित ज्योतिर्लिंग के इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान राम ने स्वयं यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यह स्थान आज भी शैव और वैष्णव दोनों संप्रदायों के लिए अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। रामेश्वरम का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा माना जाता है, जिसमें 1212 स्तंभ हैं।

जानें राम रक्षा स्तोत्र की महिमा और रामटेक मंदिर का पौराणिक इतिहास

03 जनवरी 2026

गुड न्यूज टुडे के विशेष कार्यक्रम 'प्रार्थना' में एंकर गुंजन ने राम रक्षा स्तोत्र के आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर चर्चा की. कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि 'राम रक्षा स्तोत्र का पाठ काल के गाल में समाये व्यक्ति को भी वापस लाने की क्षमता रखता है'. इसके नियमित पाठ से न केवल अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 41 दिनों तक निरंतर पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रामटेक मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डाला गया, जहाँ वनवास के दौरान भगवान राम ने चार महीने व्यतीत किए थे. इसी पावन स्थल पर महाकवि कालिदास ने 'मेघदूत' की रचना की थी. यह स्तोत्र शारीरिक कष्टों और ग्रहों के दोषों के निवारण के लिए एक अचूक कवच माना जाता है