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कोर्ट में जिसे बताया गया मुर्दा, वो मिला जिंदा, अदालत ने भेजा जेल

यूपी के आगरा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जिस शख्स का मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया गया था. वो जिंदा निकला. स्कूटी चलाते उसकी तस्वीर सामने आई तो कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया. कोर्ट के आदेश में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. अब उसे जेल भेज दिया गया है.

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उत्तर प्रदेश के आगरा में धोखाधड़ी के एक मामले में करीब 7 साल बाद ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया आरोपी सड़क पर स्कूटर चलाते हुए मिल गया. वादी पक्ष ने आरोपी को स्कूटर चलाते हुए देखा तो उसका फोटो खींच लिया. इसके बाद आरोपी के जीवित होने के साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए और मामला कार्रवाई के लिए अदालत पहुंचा.

कोर्ट ने भेजा जेल-
मामले में सोमवार को नगला बैनी प्रसाद, गांधी नगर निवासी ताराचंद शर्मा ने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवा नंद गुप्ता की अदालत में आत्मसमर्पण किया और जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया. अदालत ने सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज करते हुए आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए.

1999 में धोखाधड़ी केस में कोर्ट ने किया था तलब-
वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता समीर भटनागर के मुताबिक, ताराचंद शर्मा को एक सितंबर 1999 को धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने तलब किया था. आरोप है कि उसने फर्जी वसीयत तैयार की थी. मामले में हाईकोर्ट से भी आरोपी को राहत नहीं मिली थी.

कोर्ट में दिया था फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र-
अधिवक्ता के अनुसार, आरोपित पक्ष ने कथित तौर पर वर्ष 2019 में खुद को मृत दर्शाने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और मृत्यु आख्या कोर्ट में पेश की. आरोप है कि तत्कालीन थाना न्यू आगरा के थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से यह पूरा षड्यंत्र रचा गया. दस्तावेज कोर्ट में पेश होने के बाद ताराचंद के खिलाफ चल रही कार्रवाई निरस्त हो गई थी.

अब जिंदा मिला 'मुर्दा'-
मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब छह फरवरी 2026 को वादी राजकुमार वर्मा ने ताराचंद शर्मा को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाते हुए देखा. वादी ने उसका फोटो खींच लिया. यही फोटो और अन्य साक्ष्य बाद में कोर्ट में पेश किए गए. वादी पक्ष ने 20 मार्च 2026 के न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे.

अधिवक्ता समीर भटनागर के मुताबिक, राजकुमार वर्मा की ओर से ताराचंद शर्मा, गिरीश चंद शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा, संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था. कोर्ट के आदेश पर 9 मार्च 2026 को तत्कालीन थानाध्यक्ष और आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.

अब सोमवार को ताराचंद शर्मा के अदालत में आत्मसमर्पण के बाद उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. अदालत ने वादी पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया और आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए.

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