Bijnor Police Station
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हिंदी सिनेमा के महान गायक रहे मोहम्मद रफी की लोकप्रियता और उनके नाम से जुड़े पारिवारिक संपर्क का कथित तौर पर इस्तेमाल कर लाखों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है. दरअसल बिजनौर के काजीपाड़ा निवासी एक सरकारी शिक्षक ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद रफी की जयंती के मौके पर मुंबई स्थित उनके आवास पर बने संपर्कों के जरिए उनसे और उनके परिवार से करीब 65 लाख रुपए लिए गए.
आरोप है कि वर्ष 2021 में शिक्षक को रेलवे विभाग में नौकरी लगवाने और कैंटीन का ठेका दिलाने का भरोसा दिया गया था. कई वर्षों तक अलग-अलग खातों में रकम भेजने के बावजूद जब नौकरी या ठेके से संबंधित कोई काम नहीं हुआ तो शिक्षक ने अपनी रकम वापस मांगी. पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद उसे पैसे लौटाने के बजाय धमकियां दी जाने लगीं.
शिकायतकर्ता मुजीबुर्रहमान बिजनौर के काजीपाड़ा इलाके के रहने वाले हैं और प्राथमिक विद्यालय में सरकारी शिक्षक हैं. शिकायत के मुताबिक वह संगीत के शौकीन हैं और मोहम्मद रफी के बड़े प्रशंसक हैं.
मोहम्मद रफी की जयंती पर वह हर साल मुंबई स्थित रफी मेंशन जाते थे और वहां गायक को श्रद्धांजलि देते थे. इसी दौरान वर्ष 2021 में उनकी मुलाकात मोहम्मद रफी के परिवार से जुड़े कुछ लोगों से हुई. धीरे-धीरे उनके बीच संपर्क बढ़ गया और बातचीत व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच गई.
शिक्षक का आरोप है कि संपर्क बढ़ने के बाद उन्हें बताया गया कि आरोपितों के रेलवे विभाग के बड़े अधिकारियों से संबंध हैं. इन संपर्कों के आधार पर उनके परिवार के लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया.
इसके साथ ही रेलवे में कैंटीन का ठेका दिलाने की बात भी कही गई. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फरहीन पत्नी इरफान परवेज अहमद ने शिक्षक को लगातार भरोसा दिलाया कि रेलवे में नियुक्ति और अन्य काम वैध तरीके से कराए जा सकते हैं और इसके लिए होने वाला खर्च बैंक खातों के माध्यम से लिया जाएगा. जिसके बाद 30 अलग-अलग बार पैसे लिए गए.
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2021 से अलग-अलग समय पर रकम कई बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट माध्यमों के जरिए भेजी गई. पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने कई बैंक खातों, खाताधारकों, UPI आईडी और मोबाइल नंबरों का विवरण भी उपलब्ध कराने की बात कही है.
शिकायतकर्ता का दावा है कि पिछले करीब पांच वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 65 लाख रुपये लिए गए. रकम देने के बाद भी न तो नौकरी लगवाई गई और न ही कैंटीन का ठेका दिलाया गया.
शिक्षक के अनुसार, रकम लेने के बाद आरोपित अलग-अलग समय पर काम पूरा होने का भरोसा देते रहे. समय बीतता गया, लेकिन उन्हें नौकरी या ठेके से संबंधित कोई ठोस परिणाम नहीं मिला.
जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई और अब पैसे मांगने पर धमकी दी जा रही है.
शिकायत में इरफान परवेज अहमद, उनकी पत्नी फरहीन, उनके बेटे उबैद और इमाद के अलावा शहाना कुरैशी, रिहाना कुरैशी और शाहनवाज कुरैशी समेत अन्य लोगों के नाम दिए गए हैं. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इरफान परवेज अहमद मोहम्मद रफी के धेवते हैं, जबकि फरहीन उनकी पत्नी हैं.
शिकायत में फरहीन को कथित तौर पर पूरे मामले की मुख्य भूमिका में बताया गया है. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि इस मामले में उसके अलावा उसके परिवार और करीब 30 अन्य परिवारों से जुड़े लोगों को भी कथित तौर पर नौकरी और अन्य लाभ दिलाने का भरोसा दिया गया था.
उसने पुलिस से मांग की है कि अलग-अलग बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर पूरी रकम का पता लगाया जाए और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पैसे वापस दिलाए जाएं.
शहर कोतवाल अवनीत मान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच की जा रही है. पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन, शिकायत में बताए गए लोगों की भूमिका और लगाए गए अन्य आरोपों की जांच करेगी.
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायत में बताई गई पूरी 65 लाख रुपये की रकम किस-किस व्यक्ति को और किस उद्देश्य से दी गई तथा आरोपितों की ओर से इन लेनदेन को लेकर क्या पक्ष है. पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी.