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खतरे में दुनिया! कनाडा में मिली 'क्लाइमेट चेंज' की पहली मरीज, सांस लेने में हो रही तकलीफ

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक डॉक्टर ने 'जलवायु परिवर्तन' से पीड़ित एक मरीज की पहचान की है. यह संभवत: इस तरह का पहला मामला दर्ज किया गया है. मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही है जो जाहिर तौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मामला है. 

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
हाइलाइट्स
  • दुनिया की पहली 'क्लाइमेट चेंज' की मरीज

  • डायग्नोसिस रिपोर्ट में किया गया 'क्लाइमेट चेंज' शब्द का इस्तेमाल

आज के समय में 'जलवायु परिवर्तन' यानी की 'क्लाइमेट चेंज' सबसे बड़ी महामारी के रूप में सामने आ रहा है. जलवायु परिवर्तन से लगभग हर देश, चाहे वह विकसित हो, विकासशील हो या तीसरी दुनिया, हर कोई प्रभावित है. समाज के हर सामाजिक-आर्थिक स्तर के लोगों पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है.

और अब दुनिया में 'जलवायु परिवर्तन' की पहली मरीज की पहचान हुई है. कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक डॉक्टर ने 'जलवायु परिवर्तन' से पीड़ित एक मरीज की पहचान की है. यह संभवत: इस तरह का पहला मामला दर्ज किया गया है. मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही है जो जाहिर तौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मामला है. 

पहली बार डॉक्टर ने डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में इस्तेमाल किया 'क्लाइमेट चेंज' शब्द:

बताया जा रहा है कि मरीज एक 70 वर्षीया महिला हैं. कनाडा की इस महिला का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.ब्रिटिश कोलंबिया के नेल्सन में आपातकालीन विभाग में पहुंचने पर  डॉ काइल मेरिट ने इनकी जांच की. मरीज अस्थमा से पीड़ित है और उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही है. 
 
कनाडा के स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि मरीज के लक्षणों के लिए जलवायु परिवर्तन से उतपन्न हुए हालात हैं. डॉ. मेरिट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 10 वर्षों में यह पहला मौका है जब उन्हें लगा है कि मरीज की बीमारी का कारण जलवायु परिवर्तन है. 

उन्होंने यह भी कहा कि अगर हम सिर्फ बीमारी के लक्षणों के आधार पर काम करते रहे, और बीमारी के के मूल कारण को जानने की कोशिश नहीं की तो हालात बिगड़ते रहेंगे. उनके मुताबिक मरीज की बीमारी के बारे में जून के महीने में पता चला. 

हीटवेव से कनाडा में हुई सैकड़ों लोगों की मौत: 

उस समय कनाडा में रिकॉर्ड को तोड़ने वाली गर्मी पड़ी. और इस हीटवेव में सैकड़ों लोगों की मौत हुई. लू चलने से लोगों की हालत खराब थी और तापमान 121 फहरेनहाइट पहुंच गया था. वायु की गुणवत्ता भी बहुत ज्यादा गिर गयी थी. 

नेल्सन में इस मामले के सामने आने के बाद डॉक्टरों और नर्सों ने मिलकर प्लेनेटरी हेल्थ नामक संगठन बनाया है. जिससे फिलहाल 40 हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स जुड़े हैं. संगठन ने अपना ट्विटर पेज भी बनाया है. डॉ. मेरिट का कहना है कि अभी भी लोगों में पर्यावरण को लेकर कोई गंभीरता नहीं है. 

लेकिन उन्होंने इस मरीज का इलाज किया है और इसलिए वह जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता है. हालांकि, पिछले दिनों ग्लास्गो में हुए COP-26 क्लाइमेट समिट में भी ग्लोबल टेम्परेचर और एक्सट्रीम हीट वेब्स का मुद्दा उठाया गया है. 

लेकिन देखना यह होगा कि इस दिशा में अलग-अलग देश और उनके नागरिक किस तरह से पहल करते हैं.  

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