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नुकसान के बाद शुरू किया डिलीवरी का काम, ठगों ने लिया 20 हजार रुपए महीने पर खाता.. और घुमा दिया 130 करोड़ का पासा

पीड़ित का खाता लिया किराए पर जिसका इस्तेमाल कर किया 130 करोड़ का लेनदेन.

आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

कानपुर में एक डिलीवरी बॉय के बैंक खाते के जरिए 130 करोड़ रुपए के लेनदेन का मामला सामने आया है. इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने बीकॉम फाइनल ईयर के छात्र सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पीड़ित के अनुसार, शुरुआत में खाते उसके खाते से करीब 35 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ था, पर बाद में ये रकम बढ़कर 130 करोड़ रुपए तक पहुंच गई. जिसके बाद खाता शक की निगाह में आ गया, और पुलिस हरकत में.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बैंक खुलने के बाद खाते की दोबारा जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. पहले जहां 35 करोड़ रुपए के लेनदेन की बात सामने आई थी, वहीं डिटेल जांच में यह आंकड़ा बढ़कर 130 करोड़ रुपए हो गया.

फर्जी कंपनियों के जरिए बनाया नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने शहर के अलावा दिल्ली और अन्य स्थानों की करीब 19 फर्जी कंपनियों के खातों का इस्तेमाल कर लेनदेन किया था. लेकिन फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के पास कितने 'म्यूल अकाउंट' हैं और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. डीसीपी के मुताबिक, महज 9 महीने के भीतर इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन किए गए हैं, जो साफ इशारा कर रहे हैं कि इसमें पूरा एक गैंग शामिल है.

विदेश से पैसा मंगवाने का झांसा
पीड़ित ओवेस, जो बेकनगंज क्षेत्र का रहने वाला है, पहले गल्ला कारोबार करता था. इसी सिलसिले में उसने बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया था. लेकिन उस कारोबार चोपट हो गया, जिससे वह नुकसान में आ गया. बाद में वह डिलीवरी का काम करने लगा. 

पीड़ित का कहना है कि इसी दौरान उसकी मुलाकात दो आरोपियों से हुई, जिन्होंने विदेश में रहने वाले अपने रिश्तेदार से पैसे मंगवाने के नाम पर उसका बैंक खाता किराए पर ले लिया. इसके बदले उसे हर महीने 20 हजार रुपए देने की बात कही गई. साथ ही आरोपियों ने पीड़ित से चेकबुक और एटीएम को भी अपने कब्जे ले लिया. जिसके बाद पूरे खाते पर उनका कंट्रोल हो गया और मनमर्जी उसे चलाने लगे.

बरामदगी से पुलिस भी हैरान
हरकत में आई पुलिस ने आरोपियों के पास से कई अहम दस्तावेज और उपकरण बरामद किए हैं, जिसमें एक लैपटॉप, पैसे गिनने की मशीन, 6 मोबाइल फोन, 28 चेकबुक, 19 एटीएम कार्ड, 39 साइन किए हुए चेक, फर्मों के बैनर, एग्रीमेंट और आधार कार्ड शामिल हैं.

साइबर ठगी या जीएसटी फ्रॉड की आशंका
शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि इस रकम का संबंध साइबर ठगी या फर्जी कंपनियों के जरिए जीएसटी रिफंड लेने से हो सकता है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है.

- सिमर चावला की रिपोर्ट