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भोपाल अस्पताल अग्न‍िकांड: 8 बच्चों को बचाया लेक‍िन अपने 8 महीने के भतीजे को नहीं बचा सके राशिद खान

8 मासूमों का जान बचा कर भोपाल के राशिद ने कई माओ की गोद उजड़ने से बचाया है. जिस वार्ड आग लगी उसी वार्ड में राशिद का नवजात भतीजा भी एडमिट था, लेकिन माहौल को देखते हुए राशिद ने एक पल के लिए भी ये नहीं सोचा कि उन्हें पहले अपने भतीजे को बचाना चाहिए.

 "वे सभी मासूम थे जिन्हें बचाने की जरूरत थी" राशिद खान "वे सभी मासूम थे जिन्हें बचाने की जरूरत थी" राशिद खान
हाइलाइट्स
  • भोपाल के राशिद ने आठ मासूमों को बचाया, पर अपने भतीजे को नहीं बचा सके

  • कहा- सोचा था मेरे बच्चों को अल्लाह बचा लेगा

मध्य प्रदेश की राजधानी में स्थित कमला नेहरू अस्पताल में लगी आग के बाद भोपाल के रहने वाले राशिद खान कई परिवार वालों के लिए मसीहा बन गए हैं. राशिद ने ऐसे वक्त में 8 मासूमों की जान बचाई जब पूरे हॉस्पिटल में अफरा-तफरी का आलम था. 8 मासूमों की जान बचा कर आज राशिद ने कई माओं की गोद उजड़ने से बचाने का नेक काम किया है, लेकिन राशिद अपने भतीजे को नहीं बचा पाए.

राशिद ने किया 8 बच्चों को बचाने का नेक काम

राशिद खान की बहन इरफाना ने शादी के 12 साल बाद 2 नंवबर को बच्चे को जन्म दिया, उस दिन राशिद अपने घर में खाना खा रहे थे, जब हॉस्पिटल से बहन इरफाना का फोन आया, और इरफाना ने अपने भाई को हॉस्पिटल में आग लग जाने की खबर दी. बहन का फोन आते ही राशिद  हॉस्पिटल पहुंचे. राशिद जब अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) पहुंचे, तो देखा कि अफरा-तफरी का माहौल था. हताश डॉक्टर और नर्स नवजात बच्चों को लेकर वार्ड से बाहर ले जाने के लिए दौड़ रहे थे.  अफरा-तफरी में वह अपने नवजात भतीजे की तलाश करने के बजाय, डॉक्टरों और नर्सों के साथ बचाव काम में लग गए. राशिद ने कहा कि मेरे मन ख्याल आया कि अगर मैं इन मासूम बच्चों की जान बचा लूंगा, तो अल्लाह मेरे भी बच्चे की हिफाजत करेंगे.

36 नवजातों का किया गया रेसक्यू

इस हादसे में 36 नवजातों को बचाया गया है, और चार मासूम बच्चों की जान गई है जिसमें राशिद का भतीजा भी शामिल है. राशिद खान की बहन इरफाना भोपाल के गौतम नगर की रहने वाली हैं. शादी के 12 साल बाद सामान्य डिलीवरी हुई थी. जन्म के समय बच्चे को सांस लेने में दिक्कत थी.  जिसके चलते उसे कमला नेहरू चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बता दें कि इरफाना के साथ-साथ अस्पताल की आग ने तीन और घरों के चिराग बुझा दिए हैं, लेकिन राशिद ने बिना कुछ सोचे समझे 8 बच्चों को नई जिंदगी दे दी.

भतीजे राहिल को नहीं बचा सके राशिद

खान ने बताया कि उन्होंने आठ नवजातों को बचाया लेकिन अपने भतीजे राहिल को वो नहीं बचा सके. उन्होंने कहा कि वहां कमरा धुएं से भरा हुआ था लेकिन आग की लपटें कम थीं.  हमने तारों को काटना शुरू कर दिया, और बच्चों को दूसरे वार्ड में ले गए.  उन्होंने बताया कि उन्हें ये बताया गया कि सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. लेकिन राशिद को उनका भतीजा नहीं मिला,   तड़के 3 बजे मुझे मुर्दाघर में पता करने के लिए कहा गया. और राशिद खान को वहां अपने भतीजे की लाश मिली.