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मध्य प्रदेश के मंडला जिले में एक महिला ने 4 बच्चों को ऑटो जन्म दिया, लेकिन बच्चों ने जन्म के कुछ समय बाद ही दम तोड़ दिया. इस बीच महिला के पति ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पति का कहना है कि एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने की वजह से चारों बच्चों की जान चली गई है. पिता का कहना है कि यदि एंबुलेंस समय रहते मिल जाती तो बच्चों की जान बच सकती थी. उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय से पहले जन्म होने की वजह से इन बच्चों की मौत हुई है.
ऑटो से 14-15 किलोमीटर का सफर करना पड़ा तय
महिला रजनी सिंगराम नयगांव की रहने वाली है उसे 6वें महीने में लेबर पेन शुरू हो गया था. इसके बाद उसे नजदीकी घुटास स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछिया रेफर कर दिया गया. इस दौरान एंबुलेंस नहीं मिलने की वजह से उसे ऑटो से ही करीब 14-15 किलोमीटर का सफर तय कर बिछिया पहुंचना पड़ा. इस दौरान रास्ते में ही उसने चार प्रीमेच्योर बच्चों को जन्म दिया. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछिया पहुंचने से पहले ही चारों बच्चों की मौत हो गई.महिला को बिछिया स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है. इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े किए हैं. यदि उसे समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो संभव है कि उसे बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल पाता और प्रीमेच्योर डिलीवरी होने से बच सकती थी या बच्चों को बचाया जा सकता था.
क्या बोले प्रभारी CMHO
इस पूरे मामले में प्रभारी CMHO डॉ. पीएल कोरी का कहना है कि गर्भवती महिला को प्राइवेट वाहन से पीएससी घुटास लाया गया था. वहां पर डॉक्टर और नर्स ने उसे देखा तो यह पाया कि उसके पेट में एक से अधिक बच्चे हैं. महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सीएससी, बिछिया रेफर कर दिया गया था. यदि उस समय 108 पर एंबुलेंस को कॉल करते तो तो उसे आने में कम से कम आधा घंटा लगता. उस वक्त समय महत्वपूर्ण था इसलिए उसे उसी वाहन से भेज दिया गया जिससे वह आई थी. हालांकि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही महिला ने निजी वाहन में चार बच्चों को जन्म दिया. चारों बच्चों तीन लड़कियां और एक लड़के की मौत हो गई क्योंकि वे समय से पहले पैदा हुए थे. उनमें से हर एक का वजन लगभग 1.5 किलोग्राम था.
महिला के पति का आरोप
महिला के पति धनेश कुमार सेन्द्राम ने कहा कि मेरी पत्नी 5-6 माह की गर्भवती थी. महिला के पति का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा को फोन किया था, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो वे घरवाली ऑटो-रिक्शा से अस्पताल ले गए. आधे रास्ते में डिलीवरी हो गई. इसके बाद बिछिया अस्पताल में पहुंचे हैं. चार बच्चे मृत पाए गए हैं और मेरी घरवाली स्वस्थ है. महिला के पति का दावा है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो बच्चे बच सकते थे. उधर, इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर मंडला के जिला मजिस्ट्रेट राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि उन्हें इस मामले में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत मिलती है तो मामले की जांच की जाएगी और जरूरी कार्रवाई की जाएगी.