साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुआ बुजुर्ग.
साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुआ बुजुर्ग.
दिन-प्रतिदिन साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. गुजरात के वडोदरा से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पर 63 वर्षीय रिटायर्ड फाइनेंसर के साथ साइबर धोखाधड़ी की गई है. गूगल से बैंक ऑफ इंडिया का नकली कस्टमर केयर नंबर लेकर चेक क्लियर कराने की प्रक्रिया शुरू करने वाले बुजुर्ग से ठगों ने एक APK ऐप डाउनलोड करवाया और उनके खाते से 19.30 लाख रुपए उड़ा लिए.
और जीत लिया भरोसा
पुलिस को मिली शिकायत के अनुसार मांजलपुर इलाके में रहने वाले 63 वर्षीय रिटायर्ड फाइनेंसर ने पिछली 31 अगस्त को अपनी बहन के बैंक खाते में मौजूद 19.05 लाख रुपए का चेक क्लियर कराने के लिए बैंक ऑफ इंडिया की एसएम रोड ब्रांच का संपर्क नंबर गूगल पर सर्च किया था. इस दौरान उन्हें मिले एक मोबाइल नंबर पर फोन करने पर, सामने वाले व्यक्ति ने अपना नाम मुकेश कुमार बताया और कहा कि वह बैंक ऑफ इंडिया के कस्टमर केयर विभाग से मैनेजर बोल रहा है. ऐसा बोलकर उसने बुजुर्ग का भरोसा जीत लिया.
ऐसे की ठगी
ठग ने चेक क्लियर करने की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी करने को कहा और व्हाट्सएप पर 'Customer support.apk' नाम का एक ऐप भेजा. फोन पर बातचीत जारी रखते हुए ही आरोपी ने बुजुर्ग से यह ऐप इंस्टॉल करवाया. इसके बाद ऐप में नाम और मोबाइल नंबर के अलावा डेबिट कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, पिन और नेट बैंकिंग यूजर आईडी, पिन व ट्रांजैक्शन पासवर्ड जैसी बैंकिंग जानकारियां भरवा लीं. इस प्रक्रिया के दौरान बुजुर्ग के मोबाइल पर लगातार OTP आने लगे और कुछ ही देर में अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए उनके खाते से कुल 19.30 लाख रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर हो गए. इसी बीच, मोबाइल फोन की बैटरी खत्म होने के कारण मोबाइल बंद हो गया.
पुलिस कर रही मामले की जांच
अगले दिन ठग ने फिर से WhatsApp कॉल किया और पूछा कि फोन क्यों बंद किया था. उसने कहा कि प्रक्रिया अधूरी रह गई थी और दोबारा प्रक्रिया करवाई, जिससे बुजुर्ग को शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है. जब बुजुर्ग ने पैसे वापस करने की बात कही, तो आरोपी ने कहा कि पैसे वापस आ जाएंगे और फोन काट दिया. इसके बाद में अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया. धोखाधड़ी का पता चलने पर बुजुर्ग ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मोबाइल नंबर धारकों, WhatsApp यूजर्स, पैसे पाने वाले खाताधारकों और APK एप्लीकेशन बनाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी जांच शुरू कर दी है.