Ravi Gopal (File Photo)
Ravi Gopal (File Photo)
उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित महमूदाबाद थाना क्षेत्र के बघाइन गांव से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. घर की गरीबी मिटाने के लिए सऊदी अरब के रियाद शहर में मजदूरी करने गया 26 वर्षीय रवि गोपाल अब कभी वापस नहीं लौटेगा. ईरान-इजराइल संघर्ष की आग ने हजारों किलोमीटर दूर बैठे इस यूपी के परिवार की दुनिया उजाड़ दी. परिजनों के मुताबिक, रवि 18 मार्च 2026 की रात फैक्टरी में काम खत्म करने के बाद पत्नी से फोन पर बात कर रहा था, तभी अचानक जोरदार धमाके की आवाज आई और फोन कट गया. कुछ ही सेकेंड में मोबाइल बंद हो गया और उसी पल परिवार की खुशियां भी जैसे हमेशा के लिए बुझ गईं.
और घर में मच गया मातम
रात 9 बजकर 53 मिनट पर फोन कटा, घर में मच गया मातम. पत्नी ने सुनी धमाके की आवाज, फिर कभी नहीं लौटी पति की आवाज. रवि की पत्नी रितु के मुताबिक, भारतीय समयानुसार रात करीब 8 बजकर 20 मिनट पर बातचीत शुरू हुई थी. सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन 9 बजकर 53 मिनट पर अचानक फोन कट गया. पीछे से तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और फिर मोबाइल लगातार बंद आने लगा. परिवार ने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. अगले दिन 19 मार्च को रवि के दोस्त ने बड़े भाई मनमोहन को सूचना दी कि रियाद में हुए मिसाइल हमले में रवि की मौत हो गई है. एक फोन कॉल ने पूरे परिवार की रूह कंपा दी. जिस बेटे के भरोसे घर चल रहा था, वही जंग की मार में हमेशा के लिए छिन गया.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इकलौते कमाने वाले की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बूढ़े माता-पिता, पत्नी और चार साल के बेटे का सहारा युद्ध ने छिन लिया है. रवि गोपाल घर का इकलौता कमाने वाला था. पिता रवनीत बुजुर्ग हैं, मां बैजंती बेसहारा हैं. पत्नी रितु की आंखों से आंसू थम नहीं रहे और चार साल का मासूम बेटा अभी यह भी नहीं समझ पा रहा कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है. परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए रवि ने विदेश का रुख किया था. उसकी शादी 23 सितंबर 2020 को मिश्रपुर की रितु से हुई थी. शादी के बाद वह पहली बार सऊदी गया, फिर 2025 में बहन की शादी के लिए घर लौटा और 18 सितंबर 2025 को दूसरी बार रोजी-रोटी कमाने रियाद चला गया. किसे पता था कि रोटी की तलाश में गया बेटा जंग की राख बनकर खबरों में लौटेगा.
शव वापसी की गुहार
रवि की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन उससे भी बड़ा दर्द यह है कि दो दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी परिवार को कोई ठोस सरकारी मदद नहीं मिली. परिजनों ने डायल 112 पर सूचना दी. पुलिस ने जानकारी जुटाने की बात कही, लेकिन मौके पर न प्रशासनिक सक्रियता दिखी, न शव वापस लाने की कोई स्पष्ट पहल. अब परिवार की एक ही मांग है, रवि का शव जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि आखिरी बार अपनों की मिट्टी उसे नसीब हो सके.