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221 फीट लंबी तिरंगा कांवड़ बना आकर्षण का केंद्र, देशभक्ति का संदेश लेकर निकले 21 शिवभक्त

कांवड़ उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के कुरड़ी गांव के 21 शिवभक्त लेकर चल रहे हैं. शिवभक्तों ने 2 अगस्त को हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा शुरू की थी. करीब 190 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में यह टोली रोजाना 20 से 22 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है.

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Tiranga Kanwar Yatra Tiranga Kanwar Yatra

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में इस बार एक से बढ़कर एक अनोखी कांवड़ देखने को मिल रही हैं. इन्हीं के बीच बुधवार रात मुजफ्फरनगर पहुंचे 221 फीट लंबी और 11 फीट ऊंची तिरंगा कांवड़ ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 स्थित कांवड़ मार्ग पर इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. दूर-दूर से श्रद्धालु और राहगीर इस अनोखी कांवड़ के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए.

हरिद्वार से बागपत तक 190 किलोमीटर की यात्रा
यह तिरंगा कांवड़ उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के कुरड़ी गांव के 21 शिवभक्त लेकर चल रहे हैं. शिवभक्तों ने 2 अगस्त को हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा शुरू की थी. करीब 190 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में यह टोली रोजाना 20 से 22 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है. उनका लक्ष्य 11 अगस्त को अपने गांव पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना है.

शहीदों को समर्पित है तिरंगा कांवड़
कांवड़ लेकर चल रहे श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभक्ति का संदेश भी देती है. उनका कहना है कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है और यह कांवड़ देश के वीर शहीदों को समर्पित है. यात्रा के दौरान टोली लोगों से राष्ट्रप्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश भी दे रही है. श्रद्धालुओं का कहना है कि हर युवा के मन में देश के प्रति समर्पण और सम्मान की भावना होनी चाहिए.

पहली बार निकाली तिरंगा कांवड़ यात्रा
टोली के सदस्य हरेंद्र कुमार ने बताया कि यह उनकी पहली तिरंगा कांवड़ यात्रा है. उन्होंने कहा कि 21 शिवभक्त मिलकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले हैं और पूरे रास्ते लोगों को राष्ट्रभक्ति का संदेश दे रहे हैं. उनका मानना है कि धर्म और देशभक्ति दोनों साथ-साथ चल सकते हैं और यही इस यात्रा का उद्देश्य भी है. हरिद्वार से जल लेकर लाखों शिवभक्त इन दिनों मुजफ्फरनगर के रास्ते दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की ओर बढ़ रहे हैं. इसी वजह से कांवड़ मार्ग पर कई आकर्षक, कलात्मक और थीम आधारित कांवड़ देखने को मिल रही हैं.

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