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Akarkara Plant Benefits: फूल से लेकर जड़ तक, इस पौधे का हर अंग है दवा, दिमाग रहता है ताजा... जानिए इसके कमाल

Akarkara Benefits: हमारी प्रकति ने हमें कई प्रकार के औषधीय गुणों वाली जड़ी बूटियां मुफ्त में प्रदान की है. जिसमें आपने अश्वगंधा और शतवार के बारे में तो आपने सुना ही होगा. लेकिन आज हम आपको ऐसी ही एक औषधि के बारे में बता रहे हैं जिसका नाम है अकरकरा.

Akarkara Plant Benefits Akarkara Plant Benefits

Akarkara Plant Benefits: हमारी प्रकति ने हमें कई प्रकार के औषधीय गुणों वाली जड़ी बूटियां मुफ्त में प्रदान की है. जिसमें आपने अश्वगंधा और शतवार के बारे में तो आपने सुना ही होगा. लेकिन आज हम आपको ऐसी ही एक औषधि के बारे में बता रहे हैं जिसका नाम है अकरकरा. इसमें समाहित गुण विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं में हमें लाभ पहुंचाती हैं. भारत में पौधा हिमालय, जम्मू और कश्मीर, बंगाल और अन्य उत्तरी क्षेत्रों में पाया जाता है.

अकरकरा के फायदे अनेक
इस पौधे को लेकर यह आम धारणा है कि अकरकरा का पौधा विषैला और मनुष्यों के लिए खतरनाक होता है. हम आपको बता दें कि इस पौधे की जड़ों और तनों में एमिरिन, गिग्नोटॉल और कैलोट्रोपिस जैसे यौगिकों के साथ-साथ मदार अलबान और फ्लेबल क्षार की थोड़ी मात्रा पाई जाती है. इसके रस को इसके कड़वे, तीखे और गर्म गुणों के लिए जाना जाता है, जो कान दर्द, कृमि, बवासीर, खांसी, कब्ज, त्वचा रोग और सूजन जैसी विभिन्न बीमारियों से राहत दिला सकता है. यानी पौधा एक और फायदे अनेक.

साथ ही पुरुषों में होने वाली पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं में लाभ के साथ ही हिचकी रोकने, लकवा रोग में इसके सेवन से लाभ मिलता है. इसके समय से सेवन से याददाश्त भी बढ़ती है. लगातार शरीर में बढ़ रही कमजोरी को दूरी करने के साथ ही महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म की समस्या में बहुत ही लाभकारी होता है.  सिरदर्द से राहत, बुखार कम करना, गठिया से राहत, बवासीर का उपचार,  बालों का पुनर्विकास और त्वचा संबंधी समस्याओं का उपचार केवल इस एक पौधे से हो सकता है.

अकरकरा के सेवन का तरीका
वैसे तो इस पौधे की जड़ अमृत के समान काम करती हैं.  बाजार में इसका चूर्ण और कैप्सूल भी मिल जाता हैं. हिचकी आने पर आप एक चम्मच शहद के साथ आधा चम्मच अकरकरा पाउडर का सेवन कर सकते हैं. कब्ज और गैस के साथ ही बदहजमी की समस्या को दूर करने के लिए प्रयोग होता है.

इन बातों का रखें ख्याल
इसके फायदों के बावजूद, इसकी जड़ की छाल का अधिक सेवन करने से पेट और आंतों में जलन हो सकती है, जिससे मतली और उल्टी हो सकती है. इसका ताजा रस अधिक मात्रा में हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसका उपयोग सावधानी से करना बेहद जरूरी है. इसके हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए घी और दूध का सेवन अक्सर अनुशंसित किया जाता है. 

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