Snail meat benefits for Liver
Snail meat benefits for Liver
फैटी लिवर की समस्या आजकल बहुत तेजी से बढ़ रही है. जिसके कारण लोगों को बहुत कम उम्र में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसकी जो सबसे बड़ी वजह है, वह है खराब खानपान, ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना, शराब, मीठी चीजों का अधिक सेवन और आधुनिकता के बढ़ने से शारीरिक गतिविधियों में कमी आना. ऐसे में लोग दवाइयों का रूख तो करते ही हैं. लेकिन सिर्फ दवा ही काम नहीं करती, बल्कि डाइट भी बहुत जरूरी है. सही खान-पान लीवर को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करता है. वहीं अगर आप नॉनवेज खाना पसंद करते हैं, तो चिकन और मटन के अलावा घोंघे का मीट भी इस बीमारी से निजात पाने में मुख्य भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद प्रोटीन, जिंक, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व लीवर को सपोर्ट पहुंचाते हैं और लिवर को हेल्दी रखते हैं. हालांकि ये इलाज का विकल्प नहीं है, लेकिन इलाज का हिस्सा साबित हो सकता है.
लीवर पर इस तरीके से करता है काम
दरअसल घोंघे के मीट में अच्छी मात्रा में प्रोटीन मिलता है, जो लीवर की कोशिकाओं(cells) की मरम्मत और शरीर के ऊतकों को बनाए रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद जिंक शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है, जबकि विटामिन A, E, K और B12 शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं. विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है. यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकता है, जो फैटी लिवर की समस्या बढ़ने का एक कारण माना जाता है. वहीं इसमें मौजूद फैटी एसिड शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. ध्यान रखने वाली बात ये भी है कि 'बॉडी डिटॉक्स' का काम जरूरी काम लीवर और किडनी खुद कर लेते हैं. कोई भी एक खाद्य पदार्थ शरीर को तुरंत डिटॉक्स नहीं करता, लेकिन बॉडी में रिएक्ट करके डिटॉक्स करने में मदद कर सकता है.
चिकन और मटन से कैसे अलग है?
घोंघे का मीट आमतौर पर कम फैट और अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन का स्रोत माना जाता है. कई हिस्सों में इसमें मटन की तुलना में सैचुरेटेड फैट कम होता है. ऐसे में सीमित मात्रा में और सही तरीके से पकाकर खाया जाए, तो यह कुछ लोगों के हेल्थ के लिए बेहतर ऑप्शन बन सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चिकन या मटन पूरी तरह नुकसानदायक हैं. बिना चर्बी वाला चिकन भी लीवर-फ्रेंडली डाइट का हिस्सा हो सकता है. वहीं ज्यादा फैट वाला लाल मांस (रेड मीट) बार-बार खाने से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर फैटी लिवर के मरीजों को.
कब और कैसे खाएं?
अगर आप पहली बार घोंघे का मीट खा रहे हैं, तो इसे हमेशा अच्छी तरह साफ करके और पूरी तरह पकाकर ही खाएं. अधपका या कच्चा घोंघा खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसे दोपहर या रात के खाने में उबालकर, थोड़े मसालों के साथ और कम तेल में पकाकर खाया जा सकता है. फैटी लिवर के ज्यादा तेल मसाला फायदे की जगह नुकसान पहंचा सकता है. साथ में हरी सब्जियां और सलाद इसके साथ खाने के लिए शामिल करने से डाइट ज्यादा फायदेमंद बन जाती रहती है.
नोट- GNTTV यह जानकारी सामान्य सूचना के उद्देश्य से दे रहा है. यदि आप फैटी लिवर, लिवर से जुड़ी किसी अन्य बीमारी या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो घोंघे का मीट या किसी भी नए खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह जरूर लें.
ये भी पढ़ें